सामाजिक कुरीतियों को बदलने के लिए कसुंबी अलीपुर में हुई जाट समाज की बैठक, लिए गए विभिन्न समाज सुधार के निर्णय

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सामाजिक कुरीतियों को बदलने के लिए कसुंबी अलीपुर में हुई जाट समाज की बैठक, लिए गए विभिन्न समाज सुधार के निर्णय

लाडनूं (kalamkala.in)। तहसील की ग्राम पंचायत कसुंबी जाखला के जाट समाज की बैठक में समाजोत्थान के निर्णयों की पहल व पालना के उपरांत खींवाराम राहड व हेमाराम के सान्निध्य में राहड़ गौत्र के जाट समाज की बैठक हुई, जिसमें मायरा व औसर-मौसर में बेस व कंबल की जगह 200/-रूपये लिफाफे में दिये जाने, शादी समारोह में घोड़ी के गीत गुवाने पर बर्तन बंटवाने के स्थान पर मिश्री, मिठाई या फल बंटाने, परिवार में भी शादी होने पर बहिन, बेटियों,, मामियों व सगियों द्वारा बर्तन नहीं बंटवाने का निर्णय लिया गया। हरिद्वार से आने पर भी वस्त्र, बैस या ओढनियां देना सख्त मना किया गया, घर बनाने के लिए पाया भरने पर भी वस्त्र बैस के लेन-देन नहीं करने तथा मौखाण पर सगियों को बेस की जगह लिफाफे में 200 रुपये दिये जाने के प्रस्ताव लिये गये। बैठक तलेटी मौहल्ले में हुई, जिसमें नेमी चंद, भगवानाराम, सूरजाराम राहड, मूलाराम, पन्नाराम, चुनाराम, हनुमानाराम, ओम प्रकाश, भारमल, भंवराराम, मांगी लाल, घींसाराम, माना राम, बगती राम, जोगेंद्र सिंह, बुधाराम, प्रदीप राहड़ व जैसा राम सहित दर्जनों लोग मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि बीरड़ा गौत्र के सैंकड़ों परिवारों में इन परम्पराओं की पालना पिछले लंबे समय से हो रही है। ज्ञात रहे कि सात दशक पहले पूर्व सरपंच व समाज सुधारक चौधरी रती राम राहड़ ने मूल चंद सिहाग व किसान केसरी बल देव राम मिर्धा की अगवाई में दिन में शादी समारोह सम्पन्न कराने सहित कई प्रकार के समाज सुधारों की पहल की थी।

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Author: kalamkala

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