करोड़ों का छात्रवृत्ति महाघोटाला- कुचामन सिटी के गुरुकुल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट पर लगा हमेशा के लिए बैन; दर्ज होगी एफआईआर, कर्मचारी भी होंगे आरोपी, सभी आवेदन किए निरस्त, कुल छह शिक्षण संस्थानों पर पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने के आरोप

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करोड़ों का छात्रवृत्ति महाघोटाला-

कुचामन सिटी के गुरुकुल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट पर लगा हमेशा के लिए बैन; दर्ज होगी एफआईआर, कर्मचारी भी होंगे आरोपी, सभी आवेदन किए निरस्त,

कुल छह शिक्षण संस्थानों पर पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने के आरोप

कुचामन सिटी (kalamkala.in)। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े के मामले में प्रदेश के छह शिक्षण संस्थानों पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा बड़ी कार्रवाई करते हुए स्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इनके अलावा कुचामन सिटी स्थित गुरुकुल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट भी शामिल है। इनमें से चंदेल प्राइवेट इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, गुरुकृपा महाविद्यालय, ज्योतिबा प्राइवेट इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, राज टैगोर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट तथा कृष्णा महाविद्यालय पर भी स्थायी बैन लगाया गया है। इसकी द्विस्तरीय जांच के बाद पाया गया कि इस संस्थानों द्वारा मिलीभगत कर सरकार को गुमराह किया गया और छात्रवृत्ति राशि का अनुचित लाभ उठाया जाने के आरोप सही पाए गए। इनमें चंदेल प्राइवेट आईटीआई और गुरुकृपा महाविद्यालय तो पूरी तरह से शुरू भी नहीं हुए थे, लेकिन इन्होंने भी आवेदन भेजे।राज्य सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने इन संस्थानों की लॉग-इन आईडी ब्लॉक कर दी हैं। साथ ही इन सभी बैन किए गए संस्थानों और इनमें संलिप्त कर्मचारियों/संचालकों के खिलाफ कानूनी रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई जाएगी।

दो चरणों में हुई थी यह पूरी जांच

मामले की जांच दो चरणों में गठित समितियों, जिला अधिकारियों की रिपोर्ट और पोर्टल के डेटा विश्लेषण के आधार पर की गई। विभाग ने संस्थानों पर मिलीभगत कर सरकार को गुमराह करने और छात्रवृत्ति राशि का अनुचित लाभ उठाने का आरोप सही मानते हुए कार्रवाई की। विभागीय जांच में सामने आया कि छात्रवृत्ति के लिए फर्जी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड किए गए, बिना सत्यापन के आवेदन भेजे गए तथा अपात्र और पहले से छात्रवृत्ति प्राप्त कर चुके विद्यार्थियों के नाम पर भी आवेदन प्रस्तुत किए गए। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ संस्थानों ने संचालन शुरू होने से पहले ही छात्रवृत्ति के आवेदन भेज दिए और पेपरलेस उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना की एसओपी का गंभीर उल्लंघन किया। पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में फेरबदल की कुल दो बार जांच करवाई गई। दोनों बार फर्जीवाड़ा साबित हुआ। मामले की जांच के लिए विभाग ने पहली बार 24 अप्रैल 2025 को समिति बनाई, जिसने अपनी रिपोर्ट 19 मई 2025 को साैंप दी। वहीं मामले की गहराई से जांच के लिए 30 मई 2025 को दूसरी जांच कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने 13 जून 2025 को रिपोर्ट सौंपी थी। दोनों जांच कमेटियों की रिपोर्ट में इन कॉलेजों में भारी गड़बड़ियां सामने आयी हैं।

नोटिस की नहीं की इन संस्थानों ने कोई परवाह

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने गड़बड़ी वाली संस्थाओं को नोटिस देकर पक्ष रखने के लिए तलब किया। इनमें से कई संस्थाओं के प्रतिनिधि पक्ष रखने के लिए विभाग के सामने बिल्कुल ही नहीं पहुंचे और जिन संस्थानों के प्रतिनिधि विभाग के पास पहुंचे, उनका जवाब पर्याप्त नहीं माना गया।नोटिस के बावजूद कई संस्थानों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाने के बाद इन पर स्थायी प्रतिबंध लगाए जाने का निर्णय लिया गया।जांच समितियों की रिपोर्ट, जिला अधिकारी की रिपोर्ट और पोर्टल के डेटा विश्लेषण के आधार पर विभाग ने माना कि इन संस्थानों ने मिलीभगत के तहत सरकार को गुमराह करने का प्रयास किया है। इसके बाद 20 संस्थाओं पर बैन लगाने का फैसला किया गया। इस पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल कुचामन सिटी के गुरुकुल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट समेत देशभर के 6 शिक्षण संस्थानों पर परमानेंट बैन (हमेशा के लिए प्रतिबंध) लगा दिया गया है।

कुछ संस्थान तो खुले भी नहीं और कर डाला फर्जीवाड़ा

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में करोड़ों रुपये की हेराफेरी और फर्जीवाड़ा करने वाले कुल 20 शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई की गई है। इनमें से 6 संस्थानों पर हमेशा के लिए बैन लगाया गया है, जबकि 14 संस्थानों पर 3 से 5 साल तक की रोक लगाई गई है। इनके फर्जीवाड़ा करने के तरीके में की गई जांच में सामने आया कि इन कॉलेजों ने विद्यार्थियों के नाम पर फर्जी दस्तावेज (फर्जी मार्कशीट व जाति प्रमाण पत्र) बनाकर पोर्टल पर अपलोड किए थे। कई संस्थान तो ऐसे थे, जिनका भौतिक रूप से संचालन तक शुरू नहीं हुआ था, फिर भी वहां से छात्रवृत्ति के लिए फर्जी आवेदन भेजे गए। बैन किए गए सभी संस्थानों और इनमें संलिप्त कर्मचारियों/संचालकों के खिलाफ कानूनी रूप से एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने घोटाले ने शामिल संगठन के भेजे गए स्कॉलरशिप के आवेदनों को अस्वीकार कर दिया है। इसमें कई कॉलेजों ने पोर्टल पर स्टूडेंट्स के नाम पर भी फर्जी दस्तावेज़ अपलोड किए। वहीं कई कॉलेज ऐसे भी हैं, जो अभी चालू ही नहीं थे।

इस तरह किया गया स्कॉलरशिप आवेदनों को लेकर घोटाला

स्कॉलरशिप के लिए ऑनलाइन आवेदनों की जांच में फेरबदल सामने आने के बाद विभाग ने 6 इंस्टीट्यूट पर परमानेंट और 14 पर 3 से 5 साल तक का प्रतिबंध लगाया है। इस मामले में दो मेडिकल कॉलेज भी हैं। विभाग ने नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) के नारायणा मेडिकल कॉलेज और जबलपुर (मध्य प्रदेश) के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज पर 5 साल तक के लिए बैन लगाया है। साथ ही फर्जीवाड़े में शामिल इंस्टीट्यूट पर अब एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी। सरकार और कोर्ट की कार्रवाई के बाद अब ये संस्थान स्कॉलरशिप के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे, इन संस्थानों की लॉग-इन आईडी बैन कर दिए गई हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने जांच में दोषी पाई गई संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई के अलग-अलग आदेश जारी किए हैं। कई मामलों में ऐसे स्टूडेंट के पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के आवेदन भेजे गए, जो पात्र नहीं थे। इस मामले की जांच में सामने आया है कि कई आवेदन ऐसे भी थे, जो पहले उसी कोर्स में स्कॉलरशिप ले चुके थे। जो कोर्स स्कॉलरशिप के लिए पात्र नहीं था, उसके भी आवेदन मंजूर करके भेजे गए। कई सारे ऐसे कॉलेज और संस्थान भी थे, जो कि पूरी तरह चालू भी नहीं हुए थे, लेकिन उनके यहां से भी पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के आवेदन विभाग के पोर्टल से भेजे गए।

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Author: kalamkala

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