लाडनूं की सहकारी समिति पर लगा लाखों के गबन-घोटाले का संगीन आरोप, पुलिस में मामला दर्ज, जांच जारी, कृषक लाडनूं क्रय-विक्रय सहकारी समिति लि. लाडनूं की चैक बुक गायब कर अवैध हथकंडे से हड़पे 41 लाख रुपए, समिति के अध्यक्ष जगन्नाथ बुरड़क ने करवाया दर्ज प्रकरण

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लाडनूं की सहकारी समिति पर लगा लाखों के गबन-घोटाले का संगीन आरोप, पुलिस में मामला दर्ज, जांच जारी,

कृषक लाडनूं क्रय-विक्रय सहकारी समिति लि. लाडनूं की चैक बुक गायब कर अवैध हथकंडे से हड़पे 41 लाख रुपए, समिति के अध्यक्ष जगन्नाथ बुरड़क ने करवाया दर्ज प्रकरण

लाडनूं (kalamkala.in)। कृषक लाडनूं क्रय-विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड, लाडनूं के बैंक खाते से करीब 41 लाख रुपयों की राशि का आहरण फ़र्जी तरीके से बिना किसी आधार के फर्जी हस्ताक्षरों से चैक काट कर कर लिया गया। जिसकी रिपोर्ट लाडनूं पुलिस ने दर्ज करके जांच शुरू की है। इसकी रिपोर्ट कृषक लाडनूं क्रय-विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड, लाडनूं के अध्यक्ष जगन्नाथ बुरड़क ने पुलिस को दी है। समिति के व्यवस्थापक देवेन्द्र सिंह इस गबन और घोटाले के बाद फरार हो गए, उनके दोनों मोबाइल नम्बर भी बंद हैं और समिति की चैक बुक भी समिति कार्यालय से तीन माह से गायब है।

समिति के व्यवस्थापक देवेन्द्र सिंह ने किया फर्जी हस्ताक्षरों का प्रयोग

उन्होंने बताया कि उनकी समिति के बैंक खाते से समिति के व्यवस्थापक देवेन्द्र सिंह ने फर्जी हस्ताक्षरों का प्रयोग कर अनाधिकृत भुगतान किया और राशि का गबन एवं धोखाधड़ी की, जिसके संबंध में एफआईआर दर्ज कर जांच की जाए। कृषक लाडनूं क्रय-विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड, लाडनूं के अध्यक्ष जगन्नाथ बुरड़क ने पुलिस को दी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि समिति के बैंक खाते से समिति के मुख्य व्यवस्थापक देवेन्द्र सिंह ने फर्जी हस्ताक्षरों एवं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अनाधिकृत भुगतान कर गबन किया गया है, जिससे समिति को आर्थिक हानि पहुंची है तथा प्रथम दृष्टया गबन, घोखाधडी, जालसाजी एवं आपराधिक षड्यंत्र का मामला बनता है। इस समिति का बैंक खाता भारतीय स्टेट बैंक, लाडनूं शाखा में संचालित है। समिति के कर्मचारी श्रीराम चौधरी ने 15 मई को उन्हें बताया गया कि 14 मई को समिति की अधिकृत मेल आईडी पर 7 लाख 79 हजार 952 रुपए 80 पैसे के भुगतान से संबंधित मेल प्राप्त हुआ। इस प्राप्त जानकारी एवं बैंक से प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार 14 मई को समिति खाते से चैक संख्या 138841 के माध्यम से 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान (आरटीजीएस चार्ज सहित) गोविंदराम पुत्र रावताराम के नाम किया गया। इसके चैक पर उनके हस्ताक्षरों की कूटरचना कर/फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने इस भुगतान के लिए किसी प्रकार की कोई स्वीकृति नहीं दी तथा न ही उस चैक पर उनके वास्तविक हस्ताक्षर हैं।

फर्जी भुगतान के लिए किया गया हस्ताक्षरों का दुरुपयोग

बैंक द्वारा उपलब्ध करवाई गई चैक की प्रति से स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है कि उनके हस्ताक्षरों का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से भुगतान करवाया गया है। उल्लेखनीय है कि भारतीय स्टेट बैंक लाडनूं द्वारा चैक की प्रति उपलब्ध करवा दी गई है. जिससे प्रथम दृष्ट्या यह स्पष्ट होता है कि यह भुगतान समिति के मुख्य व्यवस्थापक देवेंद्र सिंह द्वारा स्वयं किया गया है एवं आरटीजीएस फॉर्म पर भी उनके ही हस्ताक्षर हैं। साथ ही यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि गोविंदराम पुत्र रावताराम के नाम समिति की किसी प्रकार की वैधानिक लेनदारी नहीं है। समिति रिकॉर्ड में उक्त व्यक्ति के पक्ष में 7,80,000/- भुगतान का कोई आधार, बिल, स्वीकृति, प्रस्ताव अथवा भुगतान आदेश उपलब्ध नहीं है। इससे स्पष्ट है कि समिति राशि का अनाधिकृत रूप से गबन किया गया है।

दस दिनों से है व्यवस्थापक गायब, फोन भी बंद और तीन माह से चैक बुक भी गायब

रिपोर्ट में बताया गया है कि संबंधित अधिकारी देवेंद्र सिंह पिछले लगभग 10 दिनों से बिना सूचना अनुपस्थित हैं तथा उनका मोबाइल नंबर 9351046584, 8302827098 लगातार बंद आ रहा है। उनके अचानक अनुपस्थित होने से संदेह और अधिक मजबूत हो गया है। इस खाते की चैक बुक भी पिछले 3 महीने से भी अधिक समय से समिति कार्यकाल में उपलब्ध नहीं है एवं उनके पास ही है। इस संबंध में दिनांक 16.05.2026 को मेरे द्वारा भारतीय स्टेट बैंक, लाडनूं शाखा प्रबंधक को लिखित पत्र प्रेषित कर उक्त भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड, चैक प्रति एवं अन्य दस्तावेज उपलब्ध करवाने हेतु अनुरोध किया गया था।

लगातार की गई समिति के साथ जालसाजी और अनियमितताएं

बताया गया है कि बैंक द्वारा उपलब्ध करवाए गए रिकॉर्ड से मामले में गंभीर अनियमितता एवं जालसाजी सामने आई है। इस संबंध में समिति रिकॉर्ड एवं बैंक अकाउंट की जांच करने पर गबन की कुछ और प्रविष्टियां भी उजागर हुई है, जिनके अनुसार 6 अप्रेल 2026 को चैक संख्या 138833 द्वारा गणेश बीज भंडार के नाम लगभग 17 लाख 12 हजार 47 रुपए 20 पैसे का भुगतान किया गया, जबकि समिति की इस फर्म के प्रति किसी प्रकार की वैधानिक देनदारी नहीं है। यह भुगतान भी उनके फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर किया गया है। इसके अलावा 30 मार्च 2026 को चैक संख्या 138832 द्वारा मैसर्स अर्जुन खीचड़ के नाम 23 लाख रुपयों का भुगतान किया गया। इस चैक पर भी उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। इस चैक द्वारा विभिन्न तारीखों में 5 बार भुगतान का प्रयास किया गया, लेकिन भुगतान सफल नहीं हो सका एवं बिना अधिकृत हस्ताक्षर एवं विधिसम्मत अनुमति के भुगतान किया जाना गंभीर अनियमितता है।

अध्यक्ष बुरड़क व समिति के साथ छल कर बैंक में चैक लगा किया फर्जी भुगतान

बुरड़क ने लिखा है कि इस प्रकार देवेन्द्रसिंह ने उनके फर्जी व कूटरचित हस्ताक्षर कर यह जानते हुए कि ये हस्ताक्षर फर्जी व कूटरचित हैं, उसको असली के रूप में उपयोग में लेकर उनके साथ व संस्था के साथ छल करने की नियत से चैक को बैंक में लगाकर किसी ऐसे व्यक्ति को भुगतान कर दिया गया है, जिसका संस्था से कोई लेना देना नहीं है इस प्रकार उनके साथ व संस्था के साथ छल किया है। बुरड़क ने इस प्रकरण में देवेंद्र सिंह एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच करवाने एवं गबन की गई समस्त राशि वसूली कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की मांग की है।

मामला दर्ज कर पुलिस ने शुरू की जांच

कृषक लाडनूं क्रय-विक्रय सहकारी समिति लाडनूं के अध्यक्ष जगन्नाथ बुरड़क (67) पुत्र स्व. हरजीराम बुरड़क जाति जाट निवासी भरनावां, हाल लाडनूं की रिपोर्ट को लाडनूं पुलिस ने धारा 318 (4), 316 (5), 336 (2), 338, 336 (3) भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत दर्ज किया है और मामले की जांच उप निरीक्षक पुलिस राजेन्द्र गिला के सुपुर्द की गई है।

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Author: kalamkala

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