डॉ. लिपि जैन की पुस्तक ‘जैन विजन फोर सस्टेनेबल एंड पीसफुल कोएक्सिस्टेंस’ का विमोचन,
युवाचार्य श्री महावीर कुमार को प्रथम प्रति उपहृत
लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अहिंसा एवं शांति विभाग की सहायक आचार्या एवं युवा विदुषी ड लिपि जैन द्वारा लिखित पुस्तक ‘जैन विजन फॉर सस्टेनेबल एंड पीसफुल कोएक्सिस्टेंस’ पुस्तक का लोकार्पण युवाचार्य श्री महावीर मुनि के सान्निध्य में उन्हें प्रथम प्रति भेंट करके विमोचन किया गया। यह विमोचन कार्यक्रम युवाचार्य श्री महावीर कुमार के मनोनयन पश्चात् उनके अभिनंदन में विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह के दौरान किया गया। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, जैन विश्वभारती के पूर्व अध्यक्ष वर्तमान परिसर संयोजक धर्मचंद लूंकड एवं पुस्तक लेखिका डॉ. लिपि जैन द्वारा यह पुस्तक विमोचन किया गया। यह पुस्तक जैन विश्वभारती संस्थान द्वारा स्वीकृत एवं समर्थित शोध परियोजना का महत्वपूर्ण अकादमिक परिणाम रहा। लेखिका डॉ. लिपि जैन ने जानकारी देते हुए कहा कि पुस्तक के माध्यम से जैन दर्शन के शाश्वत सिद्धांतों को वर्तमान वैश्विक संदर्भ से जोड़ते हुए सतत विकास, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, अहिंसा, अनेकांतवाद, अपरिग्रह और मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता को शोधपरक दृष्टि से प्रस्तुत किया है। उन्होंने पुस्तक संबंधी समस्त बिंदुओं को उपस्थित सभा के समक्ष प्रस्तुत किया। समारोह में पुस्तक लेखिका डॉ. लिपि जैन ने पुस्तक प्रकाशन के लिए जैन विश्वभारती संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कृति उनके लिए केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध और मानवीय मूल्यों को समाज के व्यापक हित से जोड़ने का प्रयास है।कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि जैन विश्वभारती संस्थान जैन दर्शन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन अकादमिक विमर्श से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने डॉ. लिपि जैन को इस महत्वपूर्ण शोधपरक कृति के लिए बधाई दी और कहा कि ऐसी रचनाएं संस्थान की शोध एवं ज्ञान-सृजन की परंपरा को आगे बढ़ाती हैं। डॉ. जैन की पुस्तक ‘जैन विजन फोर सस्टेनेबल एंड पीसफुल कोएक्सिस्टेंस’ शोधार्थियों, शिक्षाविदों तथा जैन दर्शन और सतत विकास के अध्येताओं के लिए उपयोगी संदर्भ कृति सिद्ध होने की अपेक्षा व्यक्त की।तेरापंथ धर्मसंघ के युवाचार्य श्री महावीर कुमार ने अपने आशीर्वचन में जैन दर्शन की सार्वभौमिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन दर्शन केवल आध्यात्मिक साधना का मार्ग नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलित संबंध स्थापित करने वाली जीवन-दृष्टि है। ज्ञातव्य रहे कि डॉ. लिपि जैन ने 5 अन्य पुस्तकों का लेखन भी किया है और 2 पुस्तकों का संपादन भी वे कार्य कर चुकी है। डॉ. लिपि के साहित्य साधना एवं उत्कृष्ट लेखन, संपादन के लिए अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से पुरस्कृत किया जा चुका है।
कार्यक्रम में जैन विश्वभारती के अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़, जयंतीलाल सुराणा, प्रो. बीएल जैन, प्रो. लक्ष्मीकांत व्यास, प्रो. जिनेंद्र जैन, प्रो. रेखा तिवारी, प्रो. युवराज सिंह खंगारोत, प्रो. वंदना कुंडलिया, संस्थान परिवार सहित एवं सैकड़ो विद्यार्थी, शैक्षिक सदस्य एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।