इलेक्ट्रोपैथी पूरी तरह से पौधों के रस पर आधारित हर्बल चिकित्सा पद्धति- राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े,
जयपुर में ‘इलेक्ट्रोपैथी अनुसंधान में डेटा का महत्व एवं भूमिका’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

जयपुर (kalamkala.in)। महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर जयपुर स्थित महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज में “इलेक्ट्रोपैथी अनुसंधान में डेटा का महत्व एवं भूमिका” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा विशिष्ट अतिथि तथा हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय सचिव संजय राय मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।
इलेक्ट्रोपैथी हुई जन-स्वास्थ्य के लिए बेहद प्रभावी सिद्ध
संगोष्ठी में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने अपने संबोधन में कहा कि अनुसंधान और डेटा पर केंद्रित यह संगोष्ठी सराहनीय पहल है। उन्होंने इलेक्ट्रोपैथी के मूल को भारतीय परंपरा से जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष प्रणालियों ने चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है, उसी प्रकार इलेक्ट्रोपैथी भी जन-स्वास्थ्य के लिए बेहद प्रभावी सिद्ध हो रही है। उन्होंने इलेक्ट्रोपैथी को पूरी तरह पौधों के रस (Plant Extract) पर आधारित हर्बल चिकित्सा पद्धति बताते हुए आयुर्वेद, होम्योपैथी और इलेक्ट्रोपैथी की औषधि निर्माण प्रक्रिया के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने वर्ष 2018 में राजस्थान सरकार द्वारा इलेक्ट्रोपैथी को प्रदान की गई कानूनी मान्यता और अधिनियम का भी उल्लेख किया।
चिकित्सा पद्धति की प्रगति निरंतर अनुसंधान, डेटा संकलन और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर
मुख्य वक्ता संजय राय ने महात्मा गांधी के विचारों एवं एकादश व्रतों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गांधीजी केवल उपदेशक नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों को सार्वजनिक जीवन में व्यवहार में उतारने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सकों से आह्वान किया कि किसी भी चिकित्सा पद्धति की प्रगति के लिए निरंतर अनुसंधान, डेटा संकलन और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कार्य करना आवश्यक है।
इलेक्ट्रोपैथी का सरलता के साथ सात्विक जीवनशैली से सामंजस्य
विशिष्ट अतिथि एवं सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के आदर्शों का स्मरण करते हुए इलेक्ट्रोपैथी की सरलता और सात्विक जीवनशैली के साथ उसके सामंजस्य पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, काशी विद्यापीठ और शास्त्रीजी के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति एवं सादगी का संदेश दिया।
इलेक्ट्रोपैथी में वैज्ञानिक अनुसंधान, क्लिनिकल डेटा के व्यवस्थित संकलन तथा फार्माकोपिया के विकास को गति देंगे
इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. हेमंत सेठिया ने संगोष्ठी की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए राजस्थान में इलेक्ट्रोपैथी की कानूनी मान्यता के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दांडी यात्रा की तर्ज पर यात्राएं निकालने, धरना-प्रदर्शन और जन जागरण हेतु घर-घर तुलसी वितरण जैसे अभियानों के परिणाम स्वरूप वर्ष 2018 में इलेक्ट्रोपैथी को कानूनी मान्यता प्राप्त हुई।अपने संबोधन में सेठिया ने कहा कि संगोष्ठी का प्रमुख उद्देश्य इलेक्ट्रोपैथी में वैज्ञानिक अनुसंधान, क्लिनिकल डेटा के व्यवस्थित संकलन तथा फार्माकोपिया के विकास को गति देना है। उन्होंने प्रदेशभर से आए चिकित्सकों का स्वागत करते हुए आह्वान किया कि वे अपने चिकित्सकीय अनुभवों का प्रामाणिक डेटा तैयार करें, ताकि इस पद्धति में अनुसंधान को मजबूत आधार मिल सके और इसे वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई जा सके।
इलेक्ट्रोपैथी में डेटा संकलन महत्वपूर्ण
उद्घाटन सत्र के पश्चात दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में एमएनआईटी MNIT के प्रोफेसर संगीत पिल्लई ने पीपीटी के माध्यम से इलेक्ट्रोपैथी अनुसंधान में प्रामाणिक डेटा के महत्व, उसके विश्लेषण एवं उपयोग की तकनीकों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। द्वितीय सत्र में राजस्थान विश्वविद्यालय की प्रोफेसर बिंदु शर्मा ने वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन, अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स के मानकों तथा शोध पत्र लेखन की प्रक्रिया पर व्यावहारिक जानकारी दी। संगोष्ठी में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सकों, शोधकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन इलेक्ट्रोपैथी में व्यवस्थित क्लिनिकल डेटा संकलन, वैज्ञानिक अनुसंधान और दस्तावेजीकरण को प्रोत्साहित करने के संकल्प के साथ हुआ।



