लाडनूं। तहसील के ग्राम मीठड़ी के सरपंच की सिलवासा गुजरात स्थित फेक्ट्री में काम करते वक्त गांव के ही एक व्यक्ति की मौत हो जाने के मामले में सरपंच द्वारा मृतक के परिवार के साथ की गई धोखेबाजी के खिलाफ न्याय की मांग लेकर मृतक की पत्नी और ग्रामवासियों ने लगातार दूसरे दिन सरपंच के मीठड़ी स्थित निवास के सामने धरना-प्रदर्शन जारी रखा तथा न्याय नहीं मिलने पर अनिश्चित काल तक धरना-प्रदर्शन किए जाने की चेतावनी दी है। मीठड़ी के रहने वाले कुशलाराम मेघवाल को सरपंच प्रतिनिधि भगवानी राम बाजारी ने अपनी सिलवासा स्थित फेक्ट्री में काम दिया था। वहां काम के वक्त उसकी मौत हो गई थी। धरनार्थियों का आरोप है कि सिलवासा मंे बाजारी की फेक्ट्री में गत 18 जुलाई को कुशालाराम की संदिग्ध अवस्था मंे मौत हो गई थी। इस पर बाजारी ने पीड़ित परिवार को पैसों का लालच देकर हत्या जैसे मामले को दबाया। अब वह मृतक की पत्नी को कोई भी मुआवजा देने तक से इंकार कर दिया है। इसे लेकर मृतक की पत्नी के साथ सभी समाज के लोग भगवानाराम बाजारी के मीठड़ी के घर पर लगातार दूसरे दिन भी धरने पर बैठे हैं।
जब तक न्याय नहीं, संघर्ष जारी रहेगा

धरने में आए सुद्रासन के सरपंच भागीरथ यादव ने कहा कि जब तक पीड़ित परिवार के साथ न्याय की बात नहीं होगी, तब तक धरना अनवरत जारी रहेगा। यादव ने कहा कि बाजारी ने इस गरीब परिवार के साथ धोखेबाजी करके हत्या जैसे इस मामले को दबाया है और हत्या के इस मामले को आत्महत्या में बदल कर कुशलाराम की डेड बॉडी को गुजरात के सिलवासा से लेकर यहां उनके पैतृक निवास लाकर पीड़ित परिवार को लोभ-लालच देकर उसका अंतिम संस्कार करवा दिया और इसके बाद आज तक ना पीड़ित परिवार को कोई मुआवजा नहीं दिया। उल्टा परिवार को जातिसूचक गालियां निकाल कर घर से बाहर निकाल दिया। धरने में भवानीसिंह ने कहा कि अगर गरीब की हत्या जैसे मामले को दबाया गया, तो आने वाले समय में और भी हत्याएं संभव हैं।
15 सालों तक बंधुआ मजदर बना रहा था कुशालाराम

धरने पर आए अम्बेडकर दलित अधिकार मंच के अध्यक्ष हरिराम मेहरड़ा ने बताया कि कुशलाराम पिछले 15 सालों से भगवानाराम बाजारी की सिलवासा स्थित फैक्ट्री में बंधुआ मजदूर की तरह काम कर रहा था। बाजारी ने भेदभाव की नीति अपनाते हुए 15 सालों में परिवार को कुछ भी नहीं दिया। मतक के परिवार की हालत ऐसी है कि उसके दो कमरों के मकान में दरवाजे तक नहीं है। मृतक कुशलाराम के चार साल की एक पुत्री एक 2 साल का पुत्र हैं। बूढ़े माता-पिता हैं। मेहरड़ा ने इस मौत का जिम्मेदार भगवानाराम बाजारी को ठहराते हुए बताया कि उसकी सिलवासा की फैक्ट्री में कुशलाराम की मौत हुई है और हत्या जैसे इस मामले को दबाया है, सबूत मिटाए हैं और परिवार के लोगों को धोखे में रखकर उसके शव का अंतिम संस्कार करवाया दिया। इस बारे में बाजारी ने स्वयं कहा था कि इस डेड बॉडी को गांव लाने में उसके सात लाख रुपये खर्च हो गए। इस प्रकार स्पष्ट है कि इस हत्या के मामले को आत्महत्या में बदलवाया गया है। विदेश से भी अगर डेड बॉडी लाई जाती है, तो भी सात लाख रुपये खर्च नहीं होते। इस परिवार के लिए न्याय की गुहार लगाते हुए सभी ग्रामीण बाजारी के घर के समक्ष दूसरे दिन भी धरने पर बैठे रहे और धरना लगातार जारी राा जाएगा। शीघ्र ही एक बड़ी आक्रोश रैली भी बुलाई जाएगी। एक सितम्बर को बड़ी रैली का ऐलान किया गया। उन्होंने बताया कि बाजारी की पत्नी सरपंच है और वह मुंबई महाराष्ट्र में रहती है। उसकी अनुपस्थिति में सरपंच के सारे कामकाज व मामलात सभी किसके द्वारा किए जाते हैं, इसकी जांच करवाई जाएगी। सैंकड़ों लोग एकत्र रहे धरने पर रविवार से चल रहे इस धरने पर सोमवार को दूसरे दिन भी सैकड़ों लोग उपस्थित रहे तथा मीठड़ी ग्राम के मुख्य मार्गाे से रैली भी निकाली जाकर सरपंच प्रतिनिधि के खिलाफ खूब नारेबाजी की गई।
इस अवसर पर सुरेंद्र मेहरा, हेमाराम बोहरा, श्रवण राम पूर्व सरपंच सुद्रासन लालाराम, फूलचंद कड़वासरा, नंदाराम जाखड़, रामूराम बेरी, कालूराम, जाकिर खान सुद्रासन, वीपी सिंह, प्रहलाद बोहरा, हेमाराम मेघवाल, भूराराम मेघवाल, कालूराम मेघवाल, भंवराराम, कानाराम, हेमाराम, पुरखाराम, धनाराम, राजूराम चांदबासनी, हरजीराम बाबा, नारायणराम एडवोकेट, संजय राठी एडवोकेट, मनोज विकास परिहार आदि उपस्थित थे।







