संयम के लिए अणुव्रत अपनाकर से जीवन को सफल बनाएं- आचार्यश्री महाश्रमण, शासनमाता की अंग्रेज अनुदित 11 पुस्तकों का लोकार्पण, मूलचंद नाहर को मिला संघ सेवा पुरस्कार व युवा गौरव पुरस्कार, हरियाणा को 108 दिनों के प्रवास की घोषणा

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संयम के लिए अणुव्रत अपनाकर से जीवन को सफल बनाएं- आचार्यश्री महाश्रमण,

शासनमाता की अंग्रेज अनुदित 11 पुस्तकों का लोकार्पण, मूलचंद नाहर को मिला संघ सेवा पुरस्कार व युवा गौरव पुरस्कार, हरियाणा को 108 दिनों के प्रवास की घोषणा

 लाडनूं। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण केे लाडनूं प्रवास के तृतीय दिवस यहां जेन विश्व भारती में उनके सान्निध्य में शासनमाता साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा की 11 कृतियों की अंग्रेजी अनुवादित पुस्तकों तथा अन्य कई पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इसके अलावा हरियाणा से गुरूदर्शन को आए हजारों श्रद्धालुओं के आग्रह पर आचार्यश्री ने भविष्य में हरियाणा को 108 दिनों का प्रवास प्रदान करने की घोषणा भी की।
छोटे-छोटे अणुव्रतों से जीवन संयममय और सुखी बनता है
रविवार को अपने प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा कि आदमी का जीवन संयम प्रधान हो तो उसका जीवन सुखी बन सकता है, वह सफल और सुफल बन सकता है। यदि जीवन में असंयम हो तो उसके दुःख के आगमन के द्वार खुल सकते हैं। उन्होंने कहा कि साधु तो महाव्रतों को पालने वाले होते हैं और सबके लिए महाव्रतों को अंगीकार संभव नहीं होता, इसके लिए गुरुदेव तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन का शुभारम्भ किया। इसके माध्यम से लोग छोटे-छोटे व्रतों को स्वीकार कर अपने जीवन को संयममय बना सकते हैं और उनका संयमी जीवन सफल-सुफल बन सकता है। अनावश्यक किसी भी प्राणी की हिंसा न हो, मन में अहिंसा के भाव पुष्ट रहें। दुनिया में विभिन्न प्रकार के दान होते हैं, किन्तु अभय का दान बहुत बड़ा दान होता है। अपनी ओर से समस्त प्राणियों को अभय का दान देने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को झूठ बोलने से बचने का प्रयास करना चाहिए। चोरी, ठगी और अनैतिक कार्यों से भी बचने का प्रयास हो। इस प्रकार आदमी छोटे-छोटे नियमों को जीवन में अंगीकार अपने जीवन को सुफल और अपनी चेतना को निर्मल बनाने का प्रयास करे।
हरियाणा प्रांत को 108 दिवस देने की घोषणा
इस अवसर पर लाडनूं स्थित वृद्ध साध्वी सेवाकेन्द्र में सेवा देने वाली साध्वी प्रबलयशा ने अपने श्रद्धाभावों को व्यक्त किया और अपनी सहवर्ती साध्वियों साथ गीत का संगान भी किया। जैन विश्व भारती के भिक्षु विहार मेें बने संतों के सेवाकेन्द्र में सेवा देने वाले मुनि विजयकुमार ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए। मुनि तन्मयकुमार ने गीत प्रस्तुत किया। रतनगढ़ में चातुर्मास कर गुरु सन्निधि में पहुंची साध्वी उदितयशा ने भी अपने भावों को अभिव्यक्त किया और सहवर्ती साध्वियों संग गीत का संगान किया। सरदारशहर में चातुर्मास करने के बाद गुरुदर्शन के लिए आई साध्वी सुमतिप्रभा ने अपने श्रद्धाभावों के व्यक्त किया। सरदारशहर से इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावकों की ओर से सुजानमल दूगड़ ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में उपस्थित हरियाणा प्रान्त श्रद्धालुओं की ओर से पदमचंद जैन ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी, जिसके बाद आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा कि भविष्य में अनुकूलता होने पर हरियाणा प्रान्त में कम से कम 108 दिनों तक प्रवास करने का भाव है। उनकी इस घोषणा से पूरा प्रवचन पंडाल ओम अह्म की ध्वनि से गुुंजायमान हो उठा।
पुस्तकों का लोकार्पण व नाहर को किया सम्मानित
इस अवसर पर आचार्यश्री महाश्रमण की सन्निधि में शासनमाता साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा की प्रकाशित 51 कृतियों में से 11 कृतियों के अंग्रेजी में अनुदित पुस्तकों का लोकार्पण जैन विश्व भारती द्वारा किया गया। इस संदर्भ में साध्वी स्वस्तिकप्रभा ने भावाभिव्यक्ति दी तथा आचार्यश्री ने आशीर्वाद प्रदान किया। अमृतवाणी द्वारा जेसराज सेखाणी की जीवनगाथा ‘गाथा पुरुषार्थ की’ नामक पुस्तक को आचार्यश्री महाश्रमण के समक्ष लोकार्पित किया गया। इस संदर्भ में सुखराज सेठिया, सरिता सेखाणी व संगीता सेखाणी ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। जैन विश्व भारती द्वारा मूलचंद नाहर को श्रीमती पानादेवी सेखानी स्मृति संघ सेवा पुरस्कार वर्ष 2021 प्रदान किया गया। इस सम्मान के लिए मूलचंद नाहर ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए। इस दौरान तंरापंथी महासभा के अध्यक्ष मनसुखलाल सेठिया ने भी विचार व्यक्त किए। स्थानीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से राजेन्द्र खटेड़ ने मूलचंद नाहर को युवा गौरव पुरस्कार भी प्रदान करने की घोषणा की और उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

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Author: kalamkala

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