शोध में गुणवता के साथ जवाबदेही और उपयोगिता के गुण भी आवश्यक- प्रो. दूगड़,
लाडनूं में तीन दिवसीय शोध उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन, शोधार्थियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए


जगदीश यायावर। लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती सस्थान के शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के तत्वावधान में तीन दिवसीय शोध उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें देश भर से आए करीब 70 शोधार्थियों ने भाग लिया। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने शोधार्थियों की बैठक लेकर उन्हें शोध-प्रक्रिया और शोध को उच्च गुणवता-सम्पन्न बनाने के बारे में उनका मार्गदर्शन किया। कुलपति प्रो. दूगड़ ने बताया कि शोध का उद्देश्य हमेशा नवीन विषयों की खोज करना होना चाहिए, जिससे मनुष्य समुदायों के बीच के तनाव और टकराव को कम करके जीवन को सुगम बनाया जा सके। शोध में गुणवत्ता लाने की तरफ भी शोधार्थी को ध्यान रखना चाहिए। शोध में साक्ष्यों-तथ्यों की मजबूती, नैतिकता और नीति निर्माण में सक्षमता आवश्यक है, जो सदैव उपयोगी सिद्ध हो सके। शोध में पारदर्शिता, जवाबदेही, व्यावसायिकता, उपयोगिता आदि का पालन आवश्यक है। उन्होंने विषय-चयन को महत्वपूर्ण बताया तथा कहा कि उसके बाद संदर्भों की खोज और गहन अध्ययन-चिंतन के बाद उनका प्रस्तुतिकरण महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए एक अच्छे शोधार्थी में गृहीत विषय का ज्ञान, क्षमता, कार्य-संलग्नता, कृतज्ञता, लेखन-क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तटस्थता,
सकारात्मकता और सहनशीलता के गुण आवश्यक है।
छह सत्रों में शोध-प्रगति प्रतिवेदन के साथ शोध-पत्र प्रस्तुत
यह रिसर्च ओरिएंटेशन कार्यक्रम छह सत्रों में सम्पन्न किया गया, जिसमें सभी शोधार्थियों ने अपनी शोध की प्रगति सम्बंधी प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के साथ ही एक-एक शोध-पत्र का वाचन भी किया। इसमें जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय के जैन विद्या विभाग, प्राकृत व संस्कृत विभाग, अंग्रेजी विभाग, अहिंसा एवं शांति विभाग, जीवन विज्ञान एवं योग विभाग, शिक्षा विभाग, समाज कार्य विभाग के विभिन्न विषयों में शोध कर रहे शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। कुलसचिव डा. अजयपाल कौशिक ने शोधपत्र वाचन सत्र की अध्यक्षता करते हुए शोधार्थियों के लिए रिसर्च को एक चुनौती मानते हुए विषय चयन, डेटा संकलन, विश्लेषण, तार्किक प्रस्तुतिकरण के बारे में बताते हुए कहा कि प्रत्येक कार्य में समयबद्धता व अनुशासन बहुत जरूरी है। गुणवता के साथ भी किसी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की विशेषताओं, यहां की विशाल लाईब्रेरी आदि के बारे में जानकारी दी। विभिन्न सत्रों में शोध निदेशक प्रो. जिनेन्द्र जैन, प्रो. दामोदर शास्त्री, प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा, प्रो. समणी कुसुम प्रज्ञा, प्रो. बीएल जैन, प्रो. रेखा तिवाड़ी, प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, डा. समणी अमलप्रज्ञा, डा. समणी संगीतप्रज्ञा, डा. रामदेव साहू, प्रो. समणी सत्यप्रज्ञा, प्रो. समणी श्रेयश प्रज्ञा, डा. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, डा. युवराज सिंह खंगारोत, डा. रविन्द्र सिंह राठौड़, डा. आभा सिंह, डा. बलवीर सिंह, डा. लिपि जैन, डा. अमिता जैन, डा. सत्यनारायण भारद्वाज आदि विद्वानों ने शोधार्थियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। शोध निदेशक प्रो. जिनेन्द्र जैन ने बताया कि आगामी 22 मई को विदेशस्थ शोधार्थियों के लिए आॅनलाईन ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किया जाएगा।






