लाडनूं सहित पूरे दो जिलों में मची वेद प्रचार की धूम, 21 दिवसीय वेद प्रचार यात्रा में 22 गांवों में पहुंच कर जन-जन में जगाई वेदों की अलख, आर्य उप प्रतिनिधि सभा ने किया आयोजन, मुनियों और पदाधिकारियों ने सर्दी के बावजूद लोगों में पैदा की जागृति

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लाडनूं सहित पूरे दो जिलों में मची वेद प्रचार की धूम, 21 दिवसीय वेद प्रचार यात्रा में 22 गांवों में पहुंच कर जन-जन में जगाई वेदों की अलख,

आर्य उप प्रतिनिधि सभा ने किया आयोजन, मुनियों और पदाधिकारियों ने सर्दी के बावजूद लोगों में पैदा की जागृति

लाडनूं (kalamkala.in)। आर्य उप प्रतिनिधि सभा जिला नागौर व डीडवाना-कुचामन के तत्वावधान में इक्कीस दिवसीय वेद प्रचार यात्रा के 19वें दिन सुजानगढ़ (लाडनू़ं) में वेद प्रचार कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस वेद प्रचार यात्रा की शुरुआत एक नवम्बर को लाडनूं से शुरू की गई थी। अब तक इस यात्रा में 22 स्थानों पर वेद प्रचार कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका। इनमें लाडनूं, निम्बी जोधां, सांडास, कुचामन, भींचावा, बिलू, परबतसर, बड़ूं, पीलवा, डांगावास, मेड़ता, चोलीयास, कुचेरा, नागौर, खींवताणा, छोटी खाटू, कोलिया, डीडवाना, दुजार, बाकलिया, बादेड़, सुजानगढ़ (लाडनूं) में आर्य उप प्रतिनिधि सभा की वेद प्रचार टीम द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया चा चुका।

इन टीम ने किया वेदों का प्रचार 

इन सभी कार्यक्रमों में भजनोपदेशक पं. भूपेन्द्र सिहं अलीगढ़ (उ.प्र.), पं. लेखराज शर्मा के साथ आर्य उप प्रतिनिधि सभा के प्रधान गजेन्द्र परिहार, प्रचार मन्त्री ओम मुनि, संरक्षक यश मुनि आदि ने गांव-गांव में पहुंच कर वेदों और उनकी शिक्षाओं का प्रचार कर लोगों को भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं के प्रति जागरूक किया।

वेदों की ओर लौटो मिशन पर किया जा रहा कार्य

आर्य समाज और कार्यक्रमों के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान के पूर्व कार्यकारिणी सदस्य डॉ. जगदीश यायावर ने बताया कि महर्षि दयानन्द सरस्वती के 200वें जन्म जयन्ती वर्ष एवं आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। इसी कड़ी में यह 21 दिवसीय वेद प्रचार यात्रा नागौर व डीडवाना-कुचामन जिलों में आयोजित की गई। उन्होंने बताया कि आर्य समाज एक सुधारवादी वैदिक संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य वेद का प्रचार-प्रसार कर ‘वेदों की ओर लौटने’ के मिशन को सफल बनाना है। आर्य समाज द्वारा ही देश में पहली गौशाला स्थापित की गई थी। गुरुकुल पद्धति की पुनर्स्थापना भी आर्य समाज की ही देन है। नारी उत्थान, विधवा विवाह और धुआछूत उन्मूलन कर देश-प्रेम की लहर पूरे भारत में फैलाने का श्रेय आर्य समाज को है।

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Author: kalamkala

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