आत्मा के अस्तित्व को मानना आस्तिकता है, इससे पूर्वजन्म और पुनर्जन्म के सिद्धांत, पुण्य-पाप और जन्म-मरण व मोक्ष भी मान्य होते हैं- आचार्यश्री महाश्रमण

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आत्मा के अस्तित्व को मानना आस्तिकता है, इससे पूर्वजन्म और पुनर्जन्म के सिद्धांत, पुण्य-पाप और जन्म-मरण व मोक्ष भी मान्य होते हैं- आचार्यश्री महाश्रमण

लाडनूं (kalamkala.in)। योगक्षेम वर्ष के दौरान नियमित आयोजित मुख्य प्रवचन के दौरान आचार्यश्री महाश्रमण ने ‘साध्य-साधन शुद्धि’ के बारे में अपने प्रतिबोध में कहा कि साध्य, साधन और शुद्धि इन तीन शब्दों में से ‘साध्य’ से जुड़ा हुआ ‘साधन’ होता है। साध्य और साधन में समानता का दर्शन भी किया जा सकता है। जैसा साध्य है, उसके अनुकूल ही साधन होता है, तभी साध्य की प्राप्ति संभव हो सकती है। धार्मिक जगत में आत्मवाद का सिद्धांत है। ‘आत्मा’ आस्तिकता की बात है।आत्मा के अस्तित्व को मानने वाला पूर्वजन्म और पुनर्जन्म के सिद्धांत को भी मानता है, पुण्य-पाप के फल को मानता है। आत्मा जन्म-मरण करती है, तो उसके मोक्ष की बात भी होती है। जिन्होंने साधुता को स्वीकार कर लिया है, उनके जीवन का मुख्य साध्य है- मोक्ष की प्राप्ति। मोक्ष जब साध्य होता है तो उसका साधन है पवित्र धर्म। मोक्ष पवित्र है तो उसकी प्राप्ति का साधन धर्म भी पवित्र होना चाहिए। साध्य-साधन में समानता होनी चाहिए। मोक्ष में वीतरागता होती है तो मोक्ष का साधन वीतरागता बन सकता है। मोक्ष में अनंत ज्ञान है तो मोक्ष का साधन सम्यक् ज्ञान बन सकता है। मोक्ष में अनंत दर्शन है तो मोक्ष का साधन भी सम्यक् दर्शन बनेगा। मोक्ष का साधन संयम बनेगा। इस प्रकार जो साध्य का स्वरूप होता है, उसी अनुरूप साधन भी होना चाहिए। साध्य और साधन में एकरूपता होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि अभी आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष चल रहा है, जिसे ‘भिक्षु चेतना वर्ष’ नाम दिया गया है। प्रवचनोपरांत आचार्यश्री महाश्रमण ने चारित्रात्माओं की जिज्ञासाओं को समाहित किया। कार्यक्रम का प्रारम्भ आचार्यश्री महाश्रमण के मंत्रोच्चारण से किया गया। साध्वीवृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया।आचार्यश्री महाश्रमण ने चारित्रात्माओं के लिए प्रारम्भ होने वाले ‘प्रेक्षाध्यान शिविर’ के शुभारम्भ पर संभागी चारित्रात्माओं को प्रेक्षाध्यान की उपसंपदा प्रदान की। अणुव्रत स्थापना दिवस के संदर्भ में अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रतापसिंह दूगड़, अणुव्रत समिति लाडनूं के अध्यक्ष शांतिलाल बैद व मंत्री राज कोचर ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। पायल बैद ने गीत का संगान किया।

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Author: kalamkala

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