लाडनूं (kalamkala.in)। निकटवर्ती ग्राम जसवंतगढ़ तापड़िया परिवार के नाम से ही विख्यात है। तापड़िया परिवार को लोग भामाशाह, दानवीर, समाजसेवी के रूप में देश भर में लोग जानते-पहचानते हैं। इस परिवार के भामाशाह बजरंगलाल तापड़िया पुत्र सूरज मल तापड़िया का निधन 30 जनवरी, शुक्रवार को हो गया। उनका अंतिम संस्कार जसवंतगढ के मोक्ष धाम में शनिवार 31 जनवरी को किया गया। उनके पुत्र विजय कुमार तापड़िया ने उन्हें मुखग्नि दी। इस अवसर पर सम्पूर्ण जसवंतगढ बंद रखा गया। पूरे बाजार, समस्त शिक्षण संस्थाएं आदि सभी बंद रहे और कोई कामकाज नहीं हुआ। स्व. तापड़िया की अंतिम यात्रा में पूरा जसवंतगढ ही नहीं लाडनूं शहर और तहसील भर में प्रमुख लोगों के साथ चूरू, सीकर और अन्य जिलों से भी लोगों ने जसवंतगढ पहुंच कर सम्मिलित हुए। स्व. तापड़िया 91 वर्ष के थे। उन्होंने हाल ही मे ंअपना 92वां जन्मदिन भी मनाया था। उनकेे 92 जन्मोत्सव पर कन्याओं का सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया था। उनकी स्मृति सदैव विभिन्न सामाजिक सेवाओं में योगदान के लिए बनी रहेगी। इनके भाई महावीर प्रसाद तापड़िया हैं। भतीजा शिवरतन तापड़िया, पुत्र विजय कुमार तापड़िया और पौत्र विवेक कुमार तापड़िया एवं प्रपौत्रों में वीरेन व अक्षय आदि हैं।
जीवनपर्यंत करते रहे जनसेवा के अभूतपूर्व काम
स्व. बजरंग लाल तापड़िया को दानवीर, भामाशाह, जसवंतगढ के संरक्षक के रूप में याद किया जाता रहेगा। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अजमेर, बीकानेर आदि संभागों ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान में सुप्रीम फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा जिन सरकारी विद्यालयों में शिक्षक नहीं है वहां पर राजस्थान भर में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। समस्त सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने, कम्प्यूटर आदि विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाई। कोराना के समय की इनकी सेवाओं को आज तक सभी याद करते हैं। इन्होंने इस महामारी के दौरान 4 करोड रुपए पीएम केयर फंड में और चार करोड रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किये थे। सुजला क्षेत्र की जनता की सेवा में आपने क्षेत्र की अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाए और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर दिए। साथ ही अपने ट्रस्ट के माध्यम से हॉस्पिटलों में कर्मचारियों की नियुक्तियां भी दी है। कोरोना काल में जसवंतगढ़ में जरूरतमंद परिवारों को प्रतिदिन खाने का टिफिन उपलब्ध करवाए गए। साथ ही पूरी तहसील और जिला स्तर पर जरूरतमंदों को राशन के किट भी वितरित किए गए थे। जसवंतगढ़ और आसपास की गौशालाओं को सदा से इनका आर्थिक सहयोग का संरक्षण मिलता रहा है। जसवंतगढ़ और आसपास की गौशालाओं को लाखों रुपए प्रति वर्ष गौशालाओं को देकर आपने संरक्षण और गौ सेवा का अपूर्व कार्य किया। जसवंतगढ़ के सैंकड़ों घरों में आपके द्वारा मीठे पानी के कुंड बनाकर दिए गए, जरूरतमंदों के घर शौचालय बना कर दिए गए। आर्थिक दृष्टि से जरूरतमंदों को मकान बना कर दिए। जसवंतगढ़ की गलियों में बनाई गई अधिकांश सड़कों का निर्माण भी इनके द्वारा करवाया गया।









