लाडनूं के वार्डों की आरक्षण लॉटरी को लेकर लोगों में गहरा रोष, जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन,
जहां एक भी अनुसूचित जाति के व्यक्ति का निवास या एक भी मतदाता नहीं, फिर भी हो गया एससी में आरक्षित
लाडनूं (kalamkala.in)। आगामी नगर पालिका चुनाव को लेकर हाल ही में जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशन में निकलवाई गई आरक्षण लॉटरी को लेकर यहां अनेक वार्डों में लोगों में असंतोष है। लोगों का कहना है कि उनके वार्ड में एक भी मतदाता अनुसूचित जाति का नहीं होने पर भी उनके वार्ड को अनुसूचित जाति में आरक्षित कर दिया गया।इसी समस्या को लेकर लाडनूं के वार्ड सं. 29 के निवासियों ने जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन देकर नगर पालिका लाडनूं के चुनाव में वार्डवार आरक्षण की लॉटरी के दौरान बिना पर्याप्त अनुसूचित जाति मतदाता संख्या एवं जनसंख्या के नहीं होने के बावजूद वार्ड को अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित किए जाने के संबंध में जांच एवं पुनर्विचार की मांग की है। यह ज्ञापन देने वालों में हरजी सैनिक, हरिओम टाक, नोरतन गहलोत, सुरेश खींची, यशपाल आर्य व राजेश सांखला शामिल थे।
यह सब लिखा गया है ज्ञापन में
इस ज्ञापन में बताया गया है कि नगर पालिका लाडनूं क्षेत्र में आगामी चुनाव हेतु वार्डवार आरक्षण निर्धारित करने के लिए की गई लॉटरी की आरक्षण प्रक्रिया में वार्ड संख्या 29 को अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित घोषित किया गया है। इस वार्ड के संबंध में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मतदाता सूची एवं संबंधित अभिलेखों के अनुसार इस वार्ड में अनुसूचित जाति वर्ग के एक भी मतदाता/परिवार का उल्लेख नहीं है अथवा उनकी संख्या अत्यंत नगण्य है। ऐसी स्थिति में उक्त वार्ड को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए जाने को लेकर स्थानीय नागरिकों में गंभीर आपत्ति एवं असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
ज्ञापन में की गई है यह मांगें
ज्ञापन में मांग की गई है कि वार्ड संख्या 29 की वर्तमान मतदाता सूची एवं जनगणना/जनसंख्या संबंधी आधिकारिक अभिलेखों की जांच करवाई जाए। इस वार्ड में अनुसूचित जाति वर्ग की वास्तविक जनसंख्या एवं मतदाताओं की संख्या का सत्यापन करवाया जाए।वार्डवार आरक्षण की लॉटरी में उक्त वार्ड को एससी के लिए आरक्षित किए जाने का आधार एवं नियमों के अनुसार पात्रता स्पष्ट की जाए। यदि आरक्षण निर्धारण में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो आरक्षण/लॉटरी परिणाम का पुनः परीक्षण एवं आवश्यक संशोधन किया जाए। जांच पूर्ण होने तक इस संबंध में आगे की प्रक्रिया को नियमानुसार रोकने या स्थगित करने पर विचार किया जाए। इस मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच करवाकर वार्ड के वास्तविक जनसंख्या एवं मतदाता आंकड़ों के आधार पर नियमानुसार उचित कार्रवाई करवाई जाए।






