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जोधपुर में उठी आनंदपाल एनकाउंटर के बाद लोगों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग, मन्जीत पाल सिंह का आह्वान- सरकार भी अपनी होगी और सीएम भी हमारा, रावणा राजपूत समाज का महासम्मेलन ‘शौर्य महाकुम्भ’ आयोजित, हाइफा हीरो दलपतसिंह देवली को भारत रत्न देने की मांग, पाठ्यक्रम में किया जाए शामिल

जोधपुर में उठी आनंदपाल एनकाउंटर के बाद लोगों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग,

मन्जीत पाल सिंह का आह्वान- सरकार भी अपनी होगी और सीएम भी हमारा,

रावणा राजपूत समाज का महासम्मेलन ‘शौर्य महाकुम्भ’ आयोजित,

हाइफा हीरो दलपतसिंह देवली को भारत रत्न देने की मांग, पाठ्यक्रम में किया जाए शामिल

जोधपुर। यहां रावण का चबूतरा पर हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह शेखावत देवली के 105वें शहादत दिवस को शौर्य महासम्मेलन के रूप में प्रदेश स्तरीय रावणा राजपूत समाज के लोगों का महासम्मेलन आयोजित किया गया। इस महासम्मेलन में समाज ने अपनी ताकत को पुरजोर ढंग से प्रदर्शित किया। मंच पर संतों को भी जगह दी गई। सम्मेलन में सरकार से वर्मा और रोहिणी आयोग की रिपोर्ट लागू कर अलग से 5 प्रतिशत आरक्षण देने तथा मूल पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वग्र के लिए आरक्षण की अलग से व्यवस्था करने कही मांग की गई। बालिका शिक्षा के लिए हर जिला स्तर पर समाज की कन्या स्कूल खोले जाने की मांग उठाई गई। सम्मेलन में हाइफा हीरो दलपत सिंह की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग भी की गई। मेजर दलपत सिंह देवली के नाम से गठित बोर्ड में जल्द नियुक्तियां देने की मांग भी की गई। समारोह में प्रदेश भर से आई समाज की वीरांगनाओं का सम्मान किया गया। सम्मेलन में केशरियां रंग से साफे में युवा और परघ्म्परागत पोशाक में महिलाएं सम्मिलित हुई।

महासम्मेलन से उठी प्रमुख मांगें

1. राजस्व रिकाॅर्ड के अनुसार उनकी जाति का केवल ‘रावणा राजपूत समाज’ नाम अंकित हो।
2. रावणा राजपूत सहित मूल पिछड़ा वर्ग सहित अति पिछड़ी जातियों को अलग से आरक्षण दिया जाए।
3. राज्य ही नहीं देश भर में जातीय जनगणना करवाई जाए।
4. आंनंदपाल सिंह एनकाउंटर में समाज के लोगों पर दर्ज झूठे मुकदमें वापस लिए जाए।
5. राजस्थान में मेजर दलपतसिंह देवली बोर्ड में जल्द नियुक्तियां की जाए।
6. आगामी विधानसभा, लोकसभा चुनाव में समाज को संख्या बल के हिसाब से उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।
7. मेजर दलपतसिंह के पैतृक गांव देवली में उनका पैनोरमा बनाया जाए।
8. मेजर दलपतसिंह के शौर्य को स्कूली पाठ्यक्रमों में पढ़ाया जाए।
9. दलपतसिंह को उनके साहस के लिए भारत रत्न दिया जाना चाहिए।

महत्वपूर्ण रहा आनन्दपाल का परिवार

 

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर आनंदपाल के भाई मंजीत पाल सिंह और बेटी भी पहुंचे। मंजीत पाल सिंह मंच पर नहीं गए, मंच के बजाय नीचे जमीन पर बैठे। महासम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 150 गाड़ियों के काफिले के साथ मंजीत पाल सिंह पहुंचे। मंच पर संबोधन के दौरान उपस्थित लोगों ने जमकर नारेबाजी की। मंच पर आनंदपाल की पत्नी व बेटी भी मौजूद रही। आयोजन को लेकर शुक्रवार को मंजीत पाल सिंह के नेतृत्व में वाहन रैली भी निकाली गई, जिसमें सिर पर साफे और गले में केसरिया दुपट्टा डाले बाइक सवारों को लेकर यह रैली विभिन्न मार्गों से होते हुए रावण का चबूतरा पर पहुंचकर संपन्न हुई।

सरकार भी अपनी होगी और सीएम भी हमारा होगा

आनन्दपाल के भाई मंजीत पाल ने मारवाड़ी में बालते हुए कहा कि समाज से बड़ा कोई नहीं होता और समाज की संगठित शक्ति का कोई मुकाबला नहीं, इसलिए समाज को एकजुट करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर हम संगठित रहे तो राजस्थान की अगलह सरकार भी अपनी होगी और सीएम भी अपना ही होगा। मंजीत से इस सम्मेलन की गूज सरकार तक पहुंचाने का आह्वान किया।

योगिता बोली, ऐ तलवार तुझे झुकना होगा

कार्यक्रम में आनंदपाल की बेटी योगिता सिंह ने भी संबोधित किया। उसने सभी को प्रमाण करते हुए अपने सम्बोधन में समाज को संगठित रहने की बात कहते हुए कहा उनके पिता के समय लाखों की संख्या में सांवराद गांव पहुंचकर लोगों ने इकठ्ठा होकर साथ निभाया था। आज फिर हमें अपने अस्तित्व, मान, सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई संगठित होकर लड़नी होगी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों से संकल्प करवाते हुए योगिता ने कहा कि समाज के हर व्यक्ति के साथ मुसीबत में साथ खड़ा होना होगा। कार्यक्रम में आनंदपाल की बेटी योगिता ने सभी को संगठित रहकर आगे बढ़ने का संकल्प दिलाया तथा एक शेर सुनाते हुए कहा-
दरिया तेरी अब खैर नही, बूंदों ने बगावत कर ली है,
नादान ना समझ बुजदिल इनको, लहरों ने बगावत कर ली है।
हम परवाने है मौत समां, मरने का किसको खौफ यहां।
रे तलवार तुझे झुकना होगा, गर्दन ने बगावत कर ली है।।’

आनन्दपाल सिंह की मूर्ति लगाने के लिए भूमि की घोषणा

शहर के बनाड़ कैंट स्टेशन के पास आनंदपालसिंह की मूर्ति लगाई जाएगी। इसके लिए समाज के भामाशाह राजू सिंह दांता हाउस की तरफ से प्लाॅट की घोषणा की गई है। मंच पर इसकी घोषणा की गई। इसके लिए अब समाज के हर घर से सहयोग लिया जाएगा। मजदूर भी समाज के बंधु ही होंगे। इस महासम्मेलन में आनन्दपाल सिंह और उनका परिवार छाया रहा। ऐसा लग रहा था कि प्रदेश का सम्पूर्ण रावणा राजपूत समाज आनन्दपाल सिंह सांवराद को ही अपना हीरो मानता हैं, अपना आदर्श, आइकाॅन मानता है। लाडनूं के श्री आनन्द परिवार सेवा समिति के नेतृत्व में सैंकड़ों की संख्या में वाहन जोधपुर पहंुचे थे।

रावणा राजपूत समाज से 4 विधायकों का संकल्प

सम्मेलन में महेंद्र सिंह ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की अपील की। सरकार से कहा जिला स्तर पर आवासीय विद्यालय खोला जाना चाहिए। गांवों में शिक्षा के क्षेत्र में समाज को आगे बढ़ाने के लिए सरकार इस मांग पर ध्यान दें। राजस्थान के अंदर समाज को एक नाम रावणा राजपूत समाज नाम से जाना जाए। आरएएस अधिकारी रणवीर सिंह ने कहा कि समाज सबसे पहले है। अब समाज की एकता दिखाने का समय आ गया है। इस बार के चुनाव में 4 विधायक तो राजस्थान में समाज के होने की चाहिए। मुख्य वक्ता के तौर पर राजेंद्र सिंह राखी, पूर्व कुड़ी सरपंच देवीसिंह सिसोदिया, दीपक पंवार, ईश्वरसिंह बालोतरा, माला चैहान पे भी शामिल थे। मंच संचालन सिवाना से आए संतोष सिंह धांधल और प्रीति ने किया।

हजारों लोगों ने सम्मेलन में की शिरकत, लाडनूं चूरू जिले  से भी पहुंचे हजारों लोग

मेजर दलपत सिंह देवली के बलिदान दिवस पर बड़ी संख्या में समाज के लोग जुटे। सम्मेलन को लेकर पिछले कई दिनों से समाज की ओर से निमंत्रण दिया जा रहा था। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सुबह से ही समाज के लोगों के आने का सिलिसला शुरू हो गया। सम्मेलन को लेकर रावण का चबूतरा मैदान में डोम तैयार किए गए। शुक्रवार को सुबह से ही समाज के लोगों के पहुंचने शुरू हो गए। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए महिलाएं भी पहुंची। उनके लिए अलग अलग डोम में बैठने की व्यवस्था की गई। इसमें हिस्सा लेने के लिए जोधपुर, नागौर, पाली, बीकानेर, भीलवाड़ा, अजमेर, केकड़ी, बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, जयपुर से भी लोग शामिल हुए। लाडनूं से भी हजारों लोग जोधपुर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे। लाडनूं से मनजीत पाल सिंह सांवराद व योगिता सिंह के नेतृत्व में तथा पार्षद मोहन सिंह चैहान लाडनूं आदि जन समुदाय के साथ जोधपुर पहुंचे। चूरू से जिलाअध्यक्ष कैशर सिंह राठौड़ के नेतृत्व में व चूरू के युवा जिलाअध्सक्ष कालु सिह, उपाध्सक्ष नरपत सिंह, चूरू राजगढ अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह, सरदारशहर अध्यक्ष दलीप सिंह , रतनगढ अध्यक्ष राधेश्याम सिंह, लूण सिंह ईयारा बादि पहुंचे। सोशल मीडिया पर मानसिंह करेड़ा, राजेन्द्र सिंह, सुजानगढ (इटली) से महावीर सिह भाटी, सेलड़ी देवी सिंह रतनगढ, बजरंग सिंह तारानगर, अजय पाल सिंह शेखावत, पप्पु सिंह सुजानगढ आदि सक्रिय रहे। सम्मेलन में राजस्थान के अलावा बाहर से भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। कार्यक्रम सह संयोजक मनोज कुमार परिहार ने बताया सम्मेलन में  80 गुणा 325 के 3 डोम लगाए गए थे। कार्यक्रम में शामिल समाज के लोगों के लिए भोजन बनाने की व्यवस्था सुबह 8 बजे से शुरू हुई। यहां 18 भट्टियों पर 20 हजार से अधिक लोगों के लिए सुबह 8 बजे से भोजन बनाना शुरू कर दिया गया थ।

कौन थे मेजर दलपतसिंह देवली

जोधपुर के सपूत मेजर दलपत सिंह देवली पाली जिले के देवली गांव मे जन्मे थे। वे पोलो खिलाड़ी थे एवं भारतीय सेना (तात्कालिक ब्रिटिश सेना) में मेजर थे। दलपतसिंह सिंह शेखावत रावणा राजपूत से थे। उनका 105वां बलिदान दिवस है। उनकी जोधपुर रेजीमेंट ने 23 सितंबर 1918 को प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान इजराइल में अदम्य साहस का परिचय दिया। प्रथम विश्व युद्ध मे तुर्की की सेना ने इजरायल के हाइपा शहर पर कब्जा कर लिया था, तब भारतीय सेना (उस समय के ब्रिटिश भारत की सेना) के सेनापति मेजर दलपतसिंह शेखावत के नेतृत्व में मात्र 1 घण्टे में हाइपा को आजाद करवा दिया गया था। इजराइल के इस हाइफा शहर में मेजर सहित सेना ने दुश्मनों की तोपों का मुकाबला तलवार से किया। इसके बावजूद उन्होंने दुश्मन को कुछ ही देर में घुटनों पर ला दिया। घोड़े पर सवार होकर तलवार और भाले से अदम्य साहस से लड़ते 26 वर्षीय मेजर दलपत सिंह को देखकर अंग्रेज सेना के अधिकारी भी दंग रह गए थे। दुश्मन की गोलियां और बारूद से छलनी होने के बावजूद मेजर दलपत सिंह ने जीत सुनिश्चित करने के बाद ही सांस छोड़ी। मेजर साहेब मात्र 26 बर्ष की अल्पायु में ही शहीद हो गए थे। उनकी वीरता को देखकर तत्कालीन सरकार ने उन्हें मरणोपरांत ‘हाइफा हीरो’ के टाइटल एवं कई युद्ध पदक से सम्मानित किया। उन्हें मरणोपरांत ब्रिटिश सेना का सर्वोच्च सम्मान मिलिट्री क्रॉस प्रदान किया गया। है। हाइफा विजय के उपलक्ष में तत्कालीन वायसराय ने दिल्ली में वायसराय भवन के सामने युद्ध स्मारक का निर्माण करवाया। त्रिमूर्ति भवन में भी उनकी प्रतिमा स्थापित की गई। दिल्ली में तीन मूर्ति चैक का नामकरण इन्ही की याद में हाइपा चैक रखा गया। इतना ही नहीं इजराइल में भी हाइफा हीरो आज भी अस्तित्व में है। इजराइल की स्कूलों के कोर्स में भी यह युद्ध और हाइफा हीरो को शामिल किया गया

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Author: kalamkala

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