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सज्जनों की निष्क्रियता से समाज को अधिक नुक़सान- सुखदेव महाराज, सप्तम अध्यात्म ज्ञान योग प्रशिक्षण शीतकालीन शिविर का आयोजन, आसन, योग, प्राणायाम, दंड-युद्ध, खांडा पट्टा, चक्र, पिरामिड, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक चर्चा व आत्मसाक्षात्कार साधना चलेगी

सज्जनों की निष्क्रियता से समाज को अधिक नुक़सान- सुखदेव महाराज,

सप्तम अध्यात्म ज्ञान योग प्रशिक्षण शीतकालीन शिविर का आयोजन,

आसन, योग, प्राणायाम, दंड-युद्ध, खांडा पट्टा, चक्र, पिरामिड, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक चर्चा व आत्मसाक्षात्कार साधना चलेगी

लूणवा (kalamkala.in)। राष्ट्रीय आध्यात्मिक ज्ञान सेवा केंद्र के तत्वावधान में राष्ट्र एवं समाज हितार्थ वैदिक ज्ञान से युक्त, तन-मन से स्वस्थ, परहित में व्यस्त, सेवाभावी चरित्रवान व्यक्तियों के निर्माण एवं संगठनार्थ ‘सप्तम अध्यात्म ज्ञान योग शीतकालीन प्रशिक्षण शिविर’ का आयोजन गुरुकुल एकेडमी लूणवा में 28 से 31 दिसंबर तक किया जा रहा है, जिसमें आसपास के गांवों के शिविरार्थी शारीरिक विकास के लिए आसन, योग, प्राणायाम, संस्कारप्रद खेल, विभिन्न कलाओं जैसे दंड-युद्ध, खांडा पट्टा, चक्र, पिरामिड, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए चर्चा सत्र, आत्मसाक्षात्कार साधना सत्र, संध्या विज्ञान सत्र, विचार प्रकटीकरण, संगीत एवं विविध प्रतियोगिताओं का आनंद एवं प्रशिक्षण ले रहे हैं।

युवाओं को संस्कारित करना आवश्यक

शिविर के उद्घाटन सत्र में गुरुकुल संस्था के संरक्षक रतनलाल द्वारा दीप प्रज्वलन के बाद, मंगलाचरण, अतिथि परिचय, माल्यार्पण, शिविरार्थियों का तिलक स्वागत के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। संगठन के संस्थापक सुखदेव महाराज ने बताया कि देश समाज का उज्जवल भविष्य चरित्रवान, सेवाभावी, वीर्यवान, तेजस्वी, ध्येयनिष्ठ, श्रद्धासंपन्न, निष्कपट नवयुवकों पर हीं निर्भर है, किन्तु आज के भौतिकवादी वातावरण में ऐसे युवा मिलना दुर्लभ बात है। अतः युवाओं को संस्कार देकर, चरित्र बनाकर ही सुसंस्कारित समाज का निर्माण किया जा सकता है। यह आज के समय नितांत आवश्यक है। केंद्र का लक्ष्य बताते हुए उन्होंने कहा कि समाज को समाज-कंटकों से इतना नुकसान नहीं होता, जितना कि समाज के सज्जनों की निष्क्रियता से होता है। इसलिए समाज के वरिष्ठ सम्माननीय एवं चिंतकों का आगे आकर समाज को अच्छे संस्कार देने का प्रयास करना चाहिए। क्योंकि संस्कार के अभाव में समाज विकृतियों से दूषित हो जाता है। व्यक्ति का जीवन नीरस एवं व्यर्थ हो जाता है। केंद्र के द्वारा ऐसे प्रशिक्षण शिविरों एवं अन्यान्य गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को संस्कारवान, कर्मवीर, तेजस्वी, सेवाभावी बनाते हैं, जिससे वे राष्ट्र के विकास में भागीदार बनकर अपने जीवन को धन्य कर सके।

इन सबकी रही उपस्थिति

संगठन के अध्यक्ष पन्नालाल ने भी शिविरार्थियों का मार्गदर्शन किया।संस्था निदेशक कमल, प्रधानाध्यापक कन्हैया लाल ने भी अपने उद्गार व्यक्त किये। इस अवसर पर राजू बंजारा, सुभाष चावला, बंसीलाल, बाबूलाल, मुकेश, टीकम आदि गणमान्य जनों की भी उपस्थित रही

दंड योग व सूर्य नमस्कार करवाए

प्रथम दिवस में शिवरार्थियों ने विविध खेलों का आनंद लिया, दंड योग, सूर्य नमस्कार का अभ्यास किया एवं संध्या-वंदन का संस्कार प्राप्त किया। शिविर में गिरधारी, धर्मेंद्र, बाबूलाल, जयप्रकाश, जितेंद्र, राहुल व अंकित प्रशिक्षण सेवा प्रदान कर रहे हैं।

kalamkala
Author: kalamkala

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