प्रकृति, विज्ञान और मानवीय सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए होता है पर्वों का आयोजन- महीपाल शास्त्री,
आर्य समाज लाडनूं में अक्षय तृतीया पर विशेष कार्यक्रम आयोजित



लाडनूं (kalamkala.in)। स्थानीय आर्य समाज मंदिर में अक्षय तृतीया के अवसर पर विशेष यज्ञ-सत्संग एवं कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यज्ञ-पुरोहित आर्य महीपाल शास्त्री ने यज्ञोपरांत कहा कि हमारे सभी धार्मिक पर्व केवल अंध मान्यताओं पर आधारित नहीं होते, बल्कि उनका प्रकृति, विज्ञान और मानवीय सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आयोजन होता है। हमें उनके मूल को समझते हुए मानना चाहिए। उन्होंने मौसम परिवर्तन, स्वास्थ्य के लिए खान-पान और रहन-सहन सभी इन त्योहारों के मूल में होते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर एक होता है। उसके विविध रूपों को अलग-अलग देवी-देवताओं के रूप में मान कर पूजा करना अनुचित है। उन्होंने इस अवसर पर भजन भी प्रस्तुत किए और उनकी भावनाओं को स्पष्ट किया। कार्यक्रम में भंवरदास ने भी भजनों की प्रस्तुति दी। सुरेन्द्र प्रताप आर्य ने आर्य समाज में सबको नियमित रूप से आने की आवश्यकता बताई और कहा कि यज्ञ सबसे महत्वपूर्ण होता है, इसमें प्रतिदिन नहीं तो साप्ताहिक रूप से तो यज्ञ में शामिल होना ही चाहिए। पार्षद सुमित्रा आर्य ने आर्य समाज के सभी लोगों को अपनी आस्था पर मजबूती से कायम रहने और उसे प्राथमिकता से निभाने की जरूरत बताई। कार्यक्रम में अनेक लोग उपस्थित रहे।





