बंदर के पीछे-पीछे अनेक छतों पर कूद-फांद और उतरने-चढ़ने की कवायद करते हुए 3 घंटों में पारित युवकों ने बंदर पर काबू,
आखिरकार 20 से ज्यादा बच्चों को जख्मी करने वाली बंदरिया पकड़ी गयी, टीम हारे का सहारा और गौरक्षक टीम ने किया रेस्क्यू
सुजानगढ़ (kalamkala.in)। यहां विभिन्न क्षेत्रों में 20 से अधिक बच्चों को जख्मी करने वाली बंदरिया को रेस्क्यू आखिर पकड़ लिया गया। इस बंदरिया को पकड़ने के लिए बीदासर से आई टीम के सदस्यों ने 3 घंटों से अधिक समय तक बंदर के छलांगें लगाने के साथ-साथ खुद भी एक छत से दूसरी छत, कभी नीचे, कभी दीवारों पर कूद-फांद करते हुए आखिर बंदर को कब्जे में ले ही लिया। यह बंदरिया पिछले 5-6 दिनों से सुजानगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों मे 20 से ज्यादा बच्चों को जख्मी कर आतंक मचा रही थी। इस बंदरिया को बीदासर से आयी टीम गौरक्षक ने 3 से अधिक घंटों के अथक प्रयास के बाद आखिरकार दुलियां बास सुजानगढ़ के स्वामी चौक सांगलिया धूनी के पीछे से रेस्क्यू कर ही लिया। बंदरिया को पकड़ने के लिए टीम हारे का सहारा के संयोजक श्याम स्वर्णकार काफी दिनों से प्रशासन और नगरपरिषद को सूचित भी कर रहे थे, पर पर्याप्त संसाधन और टीम नहीं होने की वजह से परेशानी आ रही थी। इस पर स्वर्णकार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की तो बीदासर के कैलाश सिंह राठौड़ की मदद से टीम गौरक्षक के संयोजक अर्जुन सैन से बात हुई, तो उन्होंने तुरंत हां भर दी तथा दोपहर को सुजानगढ़ पहुंच गए। स्वर्णकार के अलावा राहुल सांखला, टीम गौरक्षक बीदासर की टीम अर्जुन सैन के नेतृत्व में शिवजी छापर, गोवर्धन सैन, ओमसिंह राठौड़, संदीप राठौड़, राजवीर राणा, नंदू ने 3 घंटे के अथक प्रयास के बाद दुलिया बास स्थित सांगलिया बगीची के पीछे से रेस्क्यू किया। बंदरिया के पकड़े जाने के बाद लोगो ने राहत की सांस ली। टीम द्वारा वन विभाग में बंदरिया को छोड़ा जायेगा। अर्जुन सैन ने बताया कि सम्भवतः ये बंदरिया पालतू है तथा मालिक द्वारा इसे छोड़ दिया गया था, इसलिए ये ऐसा करने लगी। बंदरिया ने बड़ों पर कभी हमला नहीं किया, केवल बच्चों को ही अपना निशाना बनाया। सभी ने टीम गौरक्षक के सदस्यों का तहेदिल से धन्यवाद दिया।






