पत्रकार से भिड़ कर मुसीबत में फंसे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रेस कौंसिल आफ इंडिया ने नोटिस देकर मांगा दो सप्ताह में जवाब पत्रकार ने खोली थी पोल, तत्कालीन सीएम गहलोत ने अपने दबाव-प्रभाव से करवाई पत्रकार की नाजायज गिरफ्तारी

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पत्रकार से भिड़ कर मुसीबत में फंसे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रेस कौंसिल आफ इंडिया ने नोटिस देकर मांगा दो सप्ताह में जवाब

पत्रकार ने खोली थी पोल, तत्कालीन सीएम गहलोत ने अपने दबाव-प्रभाव से करवाई पत्रकार की नाजायज गिरफ्तारी

जयपुर (kalamkala.in)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के शासनकाल के षड्यंत्र लगातार परत-दर-परत खुलते जा रहे हैं। पुलिस के नाजायज उपयोग का एक मामला सामने आया है, जिसमें उन्हें दिल्ली से पीसीआई से नोटिस देकर जवाब-तलब किया गया है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (भारतीय प्रेस परिषद) ने वरिष्ठ पत्रकार महेश झालानी की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ दर्ज झूठे केसों को अत्यंत गंभीर मानते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नोटिस जारी करते हुए उन्हें दो सप्ताह के भीतर अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। प्रेस कौंसिल ने गहलोत के अलावा चितौड़गढ़ के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजन दुष्यन्त, जन सम्पर्क विभाग के निदेशक रहे पुरुषोत्तम शर्मा और कोतवाली चित्तौड़गढ़ के थाना प्रभारी विक्रम सिंह से भी नोटिस देकर जवाब मांगा है।

दो सप्ताह में मांगा जवाब

पत्रकार झालानी ने अपनी गिरफ्तारी को लेकर प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के पास विस्तृत शिकायत दस्तावेजों के साथ की थी। इस पर काउंसिल ने वाद दायर किया। शिकायत का अध्ययन करने के उपरांत कॉउंसिल की अध्यक्षा न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई ने विचार व्यक्त किये कि यह प्रकरण प्रेस की स्वतंत्रता पर अतिक्रमण/कुठाराघात प्रतीत होता है। अतः दो सप्ताह के भीतर अपना लिखित वक्तव्य तीन प्रतियों में प्रेषित करें।

गहलोत की कारस्तानियों को किया था झालानी ने उजागर

ज्ञातव्य है कि अशोक गहलोत ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए अपने समर्थित विधायकों को लूटने की खुली छूट दी। नतीजतन कतिपय होटलों में ठहर कर विधायकों ने जमकर अय्याशी की और सरकार का करोड़ों रुपया बेरहमी से खर्च किया। गहलोत का एक ही मकसद था कि किसी भी तरीके से सचिन पायलट उनकी कुर्सी पर काबिज नही हो जाए। पूरी सरकारी मशीनरी का अपनी कुर्सी बचाने के लिए गहलोत ने दुरुपयोग किया। चूंकि पत्रकार महेश झालानी ने गहलोत और जन सम्पर्क विभाग के निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा की काली करतूतों को बेरहमी से उजागर किया। इससे कुपित होकर गहलोत के इशारे पर झालानी के खिलाफ षड्यंत्रपूर्वक चितौड़गढ़ और कांकरोली में मुकदमे दर्ज कराए गए। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर पुरुषोत्तम शर्मा और चितौड़गढ़ के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजन दुष्यन्त ने मिलीभगत कर झालानी को गिरफ्तार करने की योजना तैयार की। योजना के अंतर्गत 28 जनवरी, 2023 की रात को कोतवाली, चितौड़गढ़ के थाना प्रभारी विक्रम सिंह हथियारों से लैश पांच-छह पुलिसकर्मियों के साथ रात 9 बजे झालानी के घर आए और उन्हें आतंकवादियों की तरह अर्द्ध नग्न अवस्था मे गिरफ्तार कर चितौड़गढ़ ले गये।

जांच में झालानी की गिरफ्तारी नाजायज पाई गई

नई सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर हुई जांच से प्रमाणित हुआ कि झालानी को नाजायज रूप से चितौड़गढ़ पुलिस ने गिरफ्तार किया था।कानूनन सूर्यास्त के बाद किसी भी वरिष्ठ नागरिक को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। जांच के बाद थाना प्रभारी विक्रम सिंह को राजस्थान सेवा नियमों के अंतर्गत दण्डित किया जा चुका है, लेकिन अन्य आरोपी अशोक गहलोत, राजन दुष्यंत और पुरुषोत्तम शर्मा का बाल भी बांका नही हुआ है।

जांच समिति को दिया जाएगा यह मामला

अशोक गहलोत ने जवाब प्राप्ति के बाद प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा इस प्रकरण को जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उधर झालानी ने चारों के खिलाफ सक्षम न्यायालय में फौजदारी का दावा भी कर रखा है, जो लम्बित है।

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Author: kalamkala

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