विशेष आलेख

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कलम कला की विशेष रिपोर्ट-  (आओ चिंतन करें) ‘सेठाणा गांव’ रहे लाडनूं के पिछड़ते व्यापार को कैसे पंख लगाए जाएं? व्यापारी जनहित का रवैया अपनाएं, सामाजिक सरोकारों को महत्व दें और फिर आगे बढें (लाडनूं से वरिष्ट पत्रकार जगदीश यायावर की कलम से)

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आखिर कहां लटक कर रह गया लाडनूं का ट्रोमा सेंटर? लाडनूं से गुजरते तीन हाईवे और रोजमर्रा के सड़क हादसे बनते जा रहे हैं जानलेवा, पर्याप्त चिकित्सा सेवा के अभाव और रेफर करने चलते जा रही है जानें

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क्यों मिल रही है बंद मकानों से लाशें? लाडनूं की पहली पट्टी में तीन दिनों में बंद मकान से दूसरी लाश बरामद होना चिंतनीय, एकाकी रहने वालों की देखभाल, सार-संभाल की संस्थागत व्यवस्था जरूरी

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