लाडनूं में बहिन ने भाई पर लगाए सम्पत्ति हड़पने, अपंग बहिन व मंदबुद्धि माता को धन के लिए प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप, कालीजी का चौक और महावीर स्कूल के सामने के मकानों को खुर्द-बुर्द करने और पैसों के लालच में लगातार षड़यंत्र रचने की एफआईआर दर्ज

SHARE:

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

लाडनूं में बहिन ने भाई पर लगाए सम्पत्ति हड़पने, अपंग बहिन व मंदबुद्धि माता को धन के लिए प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप,

कालीजी का चौक और महावीर स्कूल के सामने के मकानों को खुर्द-बुर्द करने और पैसों के लालच में लगातार षड़यंत्र रचने की एफआईआर दर्ज

लाडनूं (kalamkala.in)। दिवंगत पिता, मंदबुद्धि माता और अपंग बहिन की सम्पत्तियों को हड़पने का षड्यंत्र रचने को लेकर दु:खी हुई बहिन ने अपने ही भाई के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवा कर कार्रवाई की मांग की है। भाई पर आरोप है कि बीमार पिता का नाजायज़ लाभ उठाया, उनके फर्जी हस्ताक्षर किए, उनके शेयर बेचे, बैंक खाते किए खाली और विकलांग बहिन का मकान बेच कर रुपए हड़पे। मंदबुद्धि वृद्धा माता पर भी सम्पत्ति खुर्द-बुर्द करने के लिए प्रताड़ना करने के लिए लगा हुआ है। पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

उमा सोनी ने अपने भाई के खिलाफ मां व बहिन की प्रताड़ना और धोखाधड़ी की रिपोर्ट दी

लाडनूं के काली जी का चौक में जोड़ भवन की गली में रहने वाली उमा सोनी (51) पुत्री स्व. गोर्वधनलाल सोनी/ पत्नी संजय सोनी, जो वर्तमान में जोधपुर के बागर चौक की निवासिनी है, उसने अपने भाई संजय सोनी पुत्र स्व.गोर्वधनलाल सोनी निवासी कालीजी का चौक, जोगड भवन वाली गली लाडनूं, जो वर्तमान में जोधपुर बागर चौक में रहते हैं, के खिलाफ धारा 316, 318, 338, 336, 340 व 339 भारतीय न्याय संहिता 2023 सपठित धारा 175 (3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत एफआईआर दर्ज करवाई है।इस प्रकरण में परिवादी उमा सोनी का कहना है कि उसके पिता स्वर्गीय गोर्वधन लाल सोनी की चार संतानें हैं, जिनमें से तीन पुत्रियां उमा सोनी (वह स्वयं), ललिता सोनी व डिंपल सोनी तथा एक पुत्र संजय सोनी (अभियुक्त) है। उसके पिता गोर्वधन लाल सोनी का स्वर्गवास 31 मई 2024 को हो गया था। उसकी माता सुन्दर देवी लगभग 65 वर्ष की है। उनकी पुस्तैनी जायदाद में एक पैतृक मकान लाडनूं में काली जी का चौक में स्थित है, जिसमें उसकी माता सुन्दर सोनी, बहन ललिता व अभियुक्त संजय उसकी पत्नी व बच्चे निवास कर रहे हैं। उसकी माता मंदबुद्धि व भोले स्वभाव की महिला है। उसकी बहन ललिता कमर के नीचे के हिस्से से पोलियोग्रस्त होने से पूर्णतयाः विकलांग है और अपने आप को घसीट कर चलती है। वह अविवाहित है, जबकि वह स्वयं एवं उसकी बहन डिंपल विवाहिता हैं।

पिता ही नहीं विकलांग बहिन का मकान बेचकर भी सभी लाखों रुपए हड़पे

परिवाद में बताया गया है कि लाडनूं में ही महावीर उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर के सामने भी एक मकान उसके पिता के नाम का व दूसरी तीन मंजिला बिल्डिंग उसकी विकलांग बहिन ललिता के नाम की थी। वर्ष 2024 में अभियुक्त संजय ने उसके पिता के साथ षडयंत्र रचकर इन दोनों मकानों को विक्रय करवा दिया। इन बेचे गये मकानों में जो मकान उसकी बहन ललिता के नाम का था, उसे बेचान करते समय अभियुक्त संजय ने ललिता को उसकी विक्रय राशि ललिता के नाम से चैक से लेने और उसके सेविंग एकाउंट में जमा करवा देने व बाद में उस सम्पूर्ण राशि की एफडी ललिता के नाम करवा देने की बात कही, जिस पर बहन ललिता मकान बेचने को तैयार हो गयी व उसने हस्ताक्षर कर दिये। लेकिन मकान के बेचान के बाद ललिता ने अभियुक्त संजय से बेचान राशि के बारे में पूछा तब अभियुक्त संजय ने बताया कि रूपये तो उसने पापा के खाते में जमा करवा दिये हैं, क्योंकि तुम तो विकलांग हो और तुम्हें बार-बार बैंक ले जाना सम्भव नहीं होगा। ललिता ने इस पर ऐतराज जताया था, क्योंकि सभी बहनों को अभियुक्त पर पहले से ही भरोसा नहीं था और भाई संजय पर हमेशा ही सन्देह रहता था। क्योंकि अभियुक्त संजय सोनी उनकी पैतृक सम्पत्ति व बहन के मकान के बेचान से प्राप्त राशि को खुर्दबुर्द करने की तैयारी कर रहा था। अभियुक्त संजय ने बहन को झांसे में लेकर मकान के आये हुए रूपयों को पिता के खाते में जमा करवा दिये, क्योंकि पिता के बैंक एकाउंट का नोमिनी अभियुक्त संजय खुद ही था। इसके अलावा मकान से प्राप्त बेचान राशि की एफडी भी अभियुक्त संजय ने पिता के नाम से करवायी, क्योंकि उसमें भी उसने स्वयं को ही नोमिनी बनाया। इस प्रकार अभियुक्त ने बहन ललिता के साथ धोखाधड़ी कर उसके नाम की सम्पति से बेचान की प्राप्त हुई राशि का नोमिनी बन कर स्वयं के उपयोग में ले ली। जब बहन ललिता के उपरोक्त मकान के बेचान की बात चल रही थी उस समय उनके पिता अत्यधिक अस्वस्थ स्थिति में थे, जिसे जानते हुए अभियुक्त ने पिता व ललिता को झांसे में लेकर सम्पति बेचने की योजना बनाई और इस बेचान के 20-25 दिन पश्चात् ही उनके पिता की संदिग्ध मृत्यु हो गयी व मृत्यु के बाद अभियुक्त संजय ने पिता के खाते में जमा ललिता के हिस्से की बड़ी राशि लगभग 25 लाख रुपए अपने स्वयं के खाते में आनन-फानन में ट्रांसफर करवा लिए और अब उस राशि को खुर्दबुर्द करने में लगा हुआ है। साथ ही ललिता के मकान के बेचान से प्राप्त राशि की एफडी, जो ललिता के नाम से करवाने के बजाए पिता के नाम से करवा कर स्वयं नोमिनी बन उस राशि को भी अभियुक्त संजय खुर्दबुर्द करने की कोशिश कर रहा है।

विकलांग बहिन को प्रताड़ित करके बंदी बनाकर रखने पर पुलिस ने छुड़ाया

अभियुक्त संजय ने ललिता के व्यक्तिगत बचत खाते में भी स्वयं नोमिनी बनने के लिये उस पर दबाव बनाया और उसके साथ मारपीट की। यह अंदेशा भी था कि ललिता को अभियुक्त संजय स्लो पोइजन देकर उसे मार डालेगा और उसकी मृत्यु के बाद नोमिनी वाली समस्त रकम स्वयं ही हड़प लेगा। अभियुक्त संजय अपने परिवार व मोहल्ले के लोगों को भी घर में नहीं आने देता है, ताकि ललिता की मदद कोई भी नहीं कर सके और न ही किसी को भी संजय के षड़यंत्र का पता नहीं चल सके। इन सब आशंकाओं के कारण उन्होंने पुलिस अधीक्षक डीडवाना के समक्ष एक शिकायत पेश कर अपनी बहिन ललिता को लाडनूं के घर से मुक्त करवा कर उसे जोधपुर ले आए।

मां व बहिन की सम्पत्ति हड़पने के लिए उन्हें बंधक बना कर लड़ाई-झगड़े

उनका एक पैतृक व रहवासीय मकान, काली जी का चौक में है। जिसमें उसकी विकलांग बहन रहती है, उस मकान को गैर कानूनी तरीके से अभियुक्त संजय बेचना चाहता है व रूपये हड़पना चाहता है। इसके लिये अभियुक्त संजय अपनी बहन ललिता व माता पर लगातार दबाव बना रहा है व आये दिन विकलांग बहन व मां के साथ लडाई-झगड़ा करके उन्हें तंग व परेशान करके घर से बेदखल करना चाहता था। इसके अलावा कालीजी के चौक में ही उनकी माता सुन्दर देवी के नाम का एक मकान भी है, जिसमें तीन दुकानें बनी हुई हैं, जिसे बेचने के लिये भी अभियुक्त लगातार मंदबुद्धि माता पर दबाव बना रहा है व रोजाना लड़ाई-झगड़ा व मारपीट कर कागजों पर हस्ताक्षर व अंगूठा लगवाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन बहन ललिता के वहां होने से यह मकान बेचान नहीं हो पा रहा था, इस कारण अभियुक्त आये दिन ललिता के साथ लड़ाई-झगड़ा व मारपीट करता था। सम्पति को खुर्दबुर्द करने व रूपये हडपने के प्रयास में अभियुक्त संजय ने विकलांग बहन को अपने ही घर में बंदी बना कर रखा हुआ था व जब अभियुक्त संजय स्वयं घर के बाहर जाता था तो अपनी पत्नी को यह सख्त हिदायत दे कर जाता था कि किसी भी सूरत में ललिता घर से बाहर न जा सके और न ही हम बहने लाडनूं जाकर अपनी बहिन व मां को मुक्त करवा सकें। बहन ललिता व माता को मुक्त करवाने व अपनी स्वेच्छा से हमारे साथ जोधपुर आने-जाने हेतु स्वतंत्र करने के लिये हमने पूर्व में भी थानाधिकारी लाडनूं को एक रिपोर्ट दी थी, लेकिन पुलिस ने अभियुक्त संजय द्वारा सम्पति व राशि को खुर्दबुर्द करने व परिवादिया की विकलांग बहन व माता को मुक्त करवाने के लिये कोई कार्यवाही नहीं की।

बीमार और अल्पदृष्टि पिता का उठाया पूरा फायदा, खातों और शेयर्स के सब पैसे हड़पे

उमा सोनी ने लिखा है कि उसके पिताजी लम्बे समय से अत्यधिक बीमार चल रहे थे, और उनकी आंखों की रोशनी भी लगभग जा चुकी थी।अभियुक्त संजय कई जगह पिता के हस्ताक्षर स्वयं ही हस्ताक्षर कर देता था, क्योंकि पिताजी चलने, फिरने व देखने में असमर्थ थे। अभियुक्त संजय ने पिता गोरर्धन लाल सोनी व मां सुन्दरी सोनी के नाम के शेयर से मिले हुये रूपयों को भी पिता की मृत्यु के पश्चात् कूटरचित हस्ताक्षर कर सभी शेयर स्वयं के नाम ट्रांसफर करवा लिये और शेयर से मिली हुई राशि को भी अपने बचत खाते में स्थानान्तरित करवा लिया।आरोपी संजय सोनी ने इन मकानों के बेचान व शेयर से प्राप्त राशि, जो आरोपी के एस.बी.आई. बैंक के बचत खाता संख्या 30894345160 से अवैध तरीके से रूपये निकलाकर 29 लाख की एफ.डी. स्वयं के नाम करवा दी तथा एफ.डी. की नोमिनी स्वयं की पत्नी किरण सोनी को बना दिया। इसके अलावा संजय ने पिता के पी.एन. बी. बैंक के खाता में से फर्जीवाड़ा कर सम्पूर्ण रकम निकला कर खाता बन्द करवा दिया। जबकि इस सम्पूर्ण राशि पर परिवादिया वों बहनों का बराबर का हक व हिस्सा है। परिवाद में पिता के बैंक खातों के नम्बर भी अंकित किए हैं। न्यायालय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, लाडनूं से प्राप्त इस परिवाद को लाडनूं पुलिस ने दर्ज करके जांच सीआई महीराम बिश्नोई ने शुरू की है।

kalamkala
Author: kalamkala

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सबसे ज्यादा पड़ गई

शहर चुनें

Follow Us Now