पाठ्यक्रम में शांति व अहिंसा का पाठ शामिल किया जाए, ताकि विद्यार्थियों में अहिंसा व एकता का संचार हो,
शांति एवं अहिंसा निदेशालय द्वारा नागौर में जिला स्तरीय कौमी एकता व अहिंसा सम्मेलन आयोजित
जगदीश यायावर। लाडनूं/ नागौर (kalamkala.in)। राज्य सरकार की 100 दिवसीय कार्ययोजना के तहत नागौर शहर के टाउन हॉल में जिला स्तरीय कौमी एकता व अहिंसा सम्मेलन का आयोजन किया गया। शांति व अहिंसा निदेशालय के एएओ विजयशरण गुप्ता और निदेशालय प्रतिनिधि रमेश सिंह के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस सम्मेलन में वक्ताओं ने वर्तमान संक्रमण के दौर में सबको आपसी सौहार्द कायम रखने की जरूरत बताई। उन्होंने समानता के अधिकार को राष्ट्र की हमारी ताकत बताते हुए धर्मनिरपेक्षता, अहिंसा, आपसी सौहार्द, सांप्रदायिकता, सांस्कृतिक एकता, कमजोर वर्गों के विकास और खुशहाली, महिलाओं संरक्षण के मुद्दे आदि क्षेत्रों में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया। सभी वक्ताओं ने विश्व में बन रही गृहयुद्ध की परिस्थितियों के स्थानों पर महसूस की जा रही शांति की जरूरत के बारे में बताते हुए भारतीय संविधान में की अनेकता में भी एकता की विशेषता को महत्वपूर्ण बताया।
युद्ध व आतंक के माहौल में शांति की जरूरत बढी
वक्ताओं ने बताया कि विश्व भर में आतंकवाद की घटनाओं, युद्ध की गतिविधियों आदि को देखते हुए लोगों को शांति की महती आवश्यकता प्रतीत होने लगी है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में कला संकाय के पाठ्यक्रम में शांति व अहिंसा के अध्याय को शामिल किए जाने की जरूरत बताई, ताकि विद्यार्थियों में अहिंसा और एकता की भावना का संचार हो सके। कार्यक्रम में प्राचार्य प्रेमसिंह बुगासरा, छात्रा पिंकी सारस्वत, छात्रा पूनम परिहार, छात्रा मनीषा कालवा, नरेंद्र डिडेल, नंदलाल रोज, अहिंसा प्रकोष्ठ अधिकारी मनोहरलाल मांडण, रामप्रकाश बाना, चिकित्सा विभाग के हेमंत उज्जवल, आजीविका समूह की संजू, सृष्टि आदि ने भी विचार व कविताएं प्रस्तुत की।






