व्यक्तिगत शांति के लिए ही नहीं, वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए भी अत्यंत प्रभावी हैं महावीर के सिद्धांत- प्रो. जैन, जैविभा विश्वविद्यालय में महावीर जयंती पर कार्यक्रम आयोजित

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व्यक्तिगत शांति के लिए ही नहीं, वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए भी अत्यंत प्रभावी हैं महावीर के सिद्धांत- प्रो. जैन,

जैविभा विश्वविद्यालय में महावीर जयंती पर कार्यक्रम आयोजित

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में भगवान महावीर जयंती का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने कहा कि भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, जिन्होंने न केवल जैन धर्म को पुनर्गठित किया, बल्कि समाज को अहिंसा और समता का एक नया मार्ग दिखाया। भगवान महावीर का विशिष्ट योगदान सत्य, अहिंसा और अनेकांतवाद जैसे सिद्धांतों के माध्यम से मानवीय चेतना का विस्तार करना रहा। भगवान महावीर ने पंच महाव्रत की शिक्षा प्रदान की, जिसका अनुपालन करने पर व्यक्ति श्रेष्ठ बन सकता है। जैन धर्म के सिद्धांत केवल व्यक्तिगत शांति के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए भी अत्यंत प्रभावी हैं।  ‘अनेकांतवाद’ महावीर का सबसे महत्वपूर्ण बौद्धिक योगदान है, जिसके अनुसार सत्य के कई पहलू हो सकते हैं और किसी भी वस्तु को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है। यह सिद्धांत धार्मिक सहिष्णुता और दूसरों के विचारों के सम्मान की सीख देता है। आत्म-मुक्ति के लिए तीन मार्ग बताए, सम्यक दर्शन (सही विश्वास), सम्यक ज्ञान (सही जानकारी) और सम्यक चरित्र (सही आचरण)। उन्होंने सिखाया कि आत्मा स्वयं के सुख-दुख के लिए जिम्मेदार है और पुरुषार्थ के माध्यम से कर्मों के बंधन को काटकर मोक्ष प्राप्त किया सकता है। उन्होंने जातिवाद और बलि प्रथा जैसी कुरीतियों का विरोध किया। उन्होंने घोषणा की कि मनुष्य अपने जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है। आज के संघर्षपूर्ण और उपभोक्तावादी युग में महावीर के सिद्धांत अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। आतंकवाद और आपसी संघर्षों के दौर में उनका ‘अहिंसा’ का सिद्धांत मानसिक, वैचारिक और आध्यात्मिक शांति का आधार है। आज की लालसा और भ्रष्टाचार की समस्याओं का समाधान ‘अपरिग्रह’ में छिपा है। यह सिद्धांत संतुलित जीवनशैली और संसाधनों के समान वितरण पर जोर देता है। भगवान महावीर ने सिखाया कि मिट्टी, पानी और पौधों में भी जीवन है। अंत में उन्होंने एक भजन ‘ऐजी कुण्डलपुर के बीच अकेलो खेले महावीर’ को गाया, जिससे सभी विद्यार्थी मन्त्रमुग्ध हो गये।
डॉ. अमिता जैन ने भगवान महावीर की जीवन कथा एक राजकुमार के वर्धमान से महावीर बनने की आध्यात्मिक यात्रा से परिचय कराया। उनके जन्म के बाद राज्य में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि हुई, इसलिए उनका नाम ‘वर्धमान’ रखा गया। बचपन से ही वर्धमान साहसी और निडर थे। उनके साहस से जुड़ी अनेक कथाएं प्रसिद्ध हैं। उन्होंने महावीर के नाम में छिपे ‘म’ से महादेव, ‘ह’ से हनुमान, ‘वी’ से विष्णु और ‘र’ से राम को बताया। बी.एड छात्रा स्वाति ने कविता के माध्यम से भगवान महावीर के जीवन परिचय से अवगत कराया। लीलावती ने महावीर के संदेशों पर प्रकाश डाला। मंच का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमिता जैन ने किया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के संकाय सदस्य डॉ. अमिता जैन, डॉ. आभा सिंह, डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. गिरधारी लाल शर्मा, डॉ. देवीलाल कुमावत सहित सभी छात्राएं उपस्थित रहीं।
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Author: kalamkala

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