नगर पालिका लाडनूं की व्यथा-कथा- जेईएन का पद छह महिनों से है खाली, सारा प्रशासन बन चुका घड़ियाली, सारे काम पड़े हैं अटके, शहर के लोग हैं भटके-भटके, लगेंगे अगले चुनाव में झटके

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नगर पालिका लाडनूं की व्यथा-कथा-

जेईएन का पद छह महिनों से है खाली, सारा प्रशासन बन चुका घड़ियाली,

सारे काम पड़े हैं अटके, शहर के लोग हैं भटके-भटके, लगेंगे अगले चुनाव में झटके

लाडनूं (kalamkala.in)। ‘आंधा की मांखी राम उड़ावै’ इस कहावत को चरितार्थ करती है लाडनूं की नगर पालिका। इस नगर पालिका का कोई धणी-धोरी नहीं है। प्रदेश में पहले कांग्रेस सरकार थी, तब नगर पालिका के हालात बदतर थे, फिर सरकार बदली तो उम्मीद जगी कि अब भाजपा अपनी ‘सबका साथ- सबका विकास’ की नीति से लाडनूं में भी काम करेगी। लेकिन हुआ इसका उल्टा ही। यहां सारे विकास के काम ठप्प हो गए। लाडनूं नगर पालिका में कभी ईओ का पद फुटबॉल बन जाया है और कभी पालिका कोष का अभाव सबको सालता है। अब रही सही कसर पिछले छह महीनों से खाली पड़े जेईएन के पद ने निकाल छोड़ी है‌। विकास के काम तै जनता के लिए स्वप्न बन कर रह गए हैं। बिना जेईएन के कोई भी एस्टीमेट नहीं बन सकता, कोई टेंडर नहीं निकल सकता, टेंडर स्वीकृत नहीं हो सकता और कोई भी निर्माण व विकास का काम नहीं करवाया जा सकता और किसी काम का कोई भुगतान भी नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति पालिका के समस्त अधिकारियों, कार्मिकों, पार्षदों और आम नागरिकों सभी के लिए अतीव दु:खदायी बनी हुई है। ‘चोर की मां घड़े में मुंह देकर रोती है ‘ यही हाल सबके हैं। लोगों को दिखा कर न तो रोया जा सकता है और ना ही हंसा जा सकता है। अजीब ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। यहां भाजपा पार्षद परेशान हैं और कांग्रेसी पार्षद हैरान हैं। पूरा शहर दुर्दशा का शिकार है, समस्याओं से जल रहा है और नीरो (मुख्यमंत्री व नगरीय विकास मंत्री) दूर बैठ कर बंशी बजा रहे हैं। लाडनूं के विकास के लिए आए करोड़ों रुपए जेईएन के अभाव में नाकारा हो रहे हैं।

पालिकाध्यक्ष के पत्रों को किया जा रहा है डस्टबिन के हवाले, क्या निहाल करेंगे ये निठल्ले

इस सारी स्थिति को लेकर नगर पालिका के अध्यक्ष रावत खां भी हैरान-परेशान हैं। उन्होंने इस बाबत जिला कलेक्टर और स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक तक गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। सभी अधिकारियों का रवैया गैरजिम्मेदाराना बना हुआ है, किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। सिवाय आश्वासन और प्राप्त पत्र पर झूठी-सांची चिड़ी मांडने से अधिक उनसे कुछ नहीं होता और फिर उस पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है। नगर पालिका के अध्यक्ष रावत खां ने स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक इन्द्रजीत सिंह को पत्र देकर नगर पालिका लाडनूं में कनिष्ठ अभियंता के पद पर किसी अभियंता को नियुक्त किए जाने की मांग करते हुए बताया कि जिला कलेक्टर डीडवाना-कुचामन को उनके द्वारा पूर्व में पत्र क्रमांक- एनपीएल/डीएन/33/25 का हवाला देते हुए पूरी समस्या से अवगत करवाया गया। इस पत्र में बताया गया है कि स्वायत्त शासन विभाग के आयुक्त एवं शासन सचिव के आदेश क्रमांक एस्टे/एम/एफ 10 (Tr-) (01) / आरएमएस (टी) / डीएलबी/25/599 दिनांक 15.01.2025 के द्वारा नगरपालिका लाडनूं में कनिष्ठ अभियन्ता के पद पर कार्यरत दीपक मीणा का स्थानान्तरण नगरपालिका लाडनूं से नगर परिषद लालसोट (दौसा) में होने के कारण आदेशों की पालना में कार्यालय आदेश क्रमांक न.पा. ला. / संस्थापन शाखा/2025/3865 दिनांक 20.01.2025 को मध्यान्ह पश्चात स्थानान्तरित कर्मचारी को कार्यमुक्त किया गया था। लेकिन इसके बाद स्वायत शासन विभाग द्वारा अभी तक कनिष्ठ अभियन्ता के रिक्त पद पर किसी कनिष्ठ अभियन्ता का पदस्थापन नहीं किये जाने से कनिष्ठ अभियन्ता से सबंधित सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं तथा राज्य सरकार द्वारा नगर निकाय के परिसीमन एवं वार्डों का पुर्नगठन में भी परेशानी पैदा हुई थी। इसके लिए हमने जिला कलेक्टर डीडवाना-कुचामन के समक्ष उपस्थित होकर सारी स्थिति से अवगत करवाया तथा पत्र क्रमांकः NPL/CDN/33/25 प्रस्तुत करके श्री रामेश्वर जाट सहायक अभियन्ता आरयूआईडीपी पीआईयू कुचामन सिटी को नगरपालिका लाडनूं के कनिष्ठ अभियन्ता के रिक्त पद पर अतिरिक्त कार्य करने हेतु अधिकृत्त करवाने की कृपा कराने का लिखा था। परन्तु आज दिनांक तक किसी को नगर पालिका लाडनूं में कनिष्ठ अभियंता पद पर नियुक्त नहीं किया गया है। अतः नगर पालिका लाडनूं में कनिष्ठ अभियंता की नियुक्ति अविलम्ब करवायें, ताकि नगर पालिका के बाधित पड़े समस्त आवश्यक कार्य पूरे करवाए जा सके। इस पत्र पर अपने मातहत अधिकारी को कार्यवाही बाबत लिखे जाने के बावजूद सब पूरी तरह से बेअसर रहा। कहीं कोई सुनवाई नहीं हो पाई।

बिना जेईएन अटके पड़े हैं करोड़ों के विकास कार्य, भुगतना होगा खामियाजा

इस गंभीर व बड़ी समस्या पर केवल नगर पालिका के अध्यक्ष ही चिंतित हों, ऐसा नहीं है। भाजपा पार्षद भी इस जटिल समस्या पर चिंतित हैं। उन्होंने भी स्थानीय निकाय विभाग के उच्चाधिकारी का ध्यान आकर्षित करवाया, परन्तु चिकने घड़े पर छांट नहीं लगती। ढाक के वही तीन पात, सब बेअसर रहा। पार्षद सुमित्रा आर्य ने डीएलबी डायरेक्टर को दिए अपने ज्ञापन में नगर पालिका लाडनूं जिला डीडवाना कुचामन में रिक्त पड़े कनिष्ठ अभियंता पद पर पदस्थापित किए जाने की मांग करते हुए लिखा है कि नगर पालिका लाडनूं में लम्बे समय से अधिकारियों के अभाव की स्थिति बनी हुई रहती आई है, यहां कभी अधिशाषी अधिकारी का पद रिक्त हो जाता है और कभी कनिष्ट अभियंता का पद खाली पड़ा रहता है। इससे शहर का विकास और नगर पालिका के रोजमर्रा के काम बाधित होते हैं तथा नागरिकों को बहुत परेशानियां उठानी पड़ती है। हाल ही में गत जनवरी माह में यहां कार्यरत कनिष्ठ अभियंता दीपक मीणा का स्थानान्तरण यहां से कर दिया गया और उसके बाद से यहां कनिष्ठ अभियंता का पद रिक्त पड़ा है, इससे आम लोगों के समस्त कार्य प्रभावित हो रहे हैं तथा नगर पालिका के कार्य भी पूरी तरह से अवरूद्ध हो चुके हैं। हमें उम्मीद थी कि डीएलबी से अथवा जिला कलेक्टर से यहां किसी को पदस्थापित किया जाएगा या अतिरिक्त कार्यभार सौंपा जाएगा, लेकिन छह महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक किसी को यहां नहीं लगाया गया है। नगर पालिका लाडनूं में जेईएन का पद रिक्त होने से नगर पालिका का परिसीमन कार्य प्रभावित हुआ था और बजट पारित हो जाने के बावजूद कोई भी विकास कार्य नहीं हो पा रहा है। सामने स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं और ऐसी अवस्था में केवल भाजपा के चुने हुए पार्षदों को ही नहीं, पूरी भाजपा पार्टी को भी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा, जो चुनाव परिणामों को निश्चित ही प्रभावित करेगा। अतएव इसे गंभीरता से लिया जाकरलाडनूं नगर पालिका में अविलम्ब कनिष्ठ अभियंता लगाने की व्यवस्था करवाई जाए। मगर इस सबके बावजूद प्रशासन का ढर्रा वही ‘ढपोर शंख’ का बना हुआ है। केवल खींसे निपोरना और मिट्टी के माधो बने रहना बस।

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Author: kalamkala

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