लाडनूं में गोगामेड़ी मंदिर के जीर्णोद्धार का मुस्लिम युवाओं ने उठाया बीड़ा, कायमखानी युवक तन, मन, धन से जुटे हैं गोगामेड़ी का कायाकल्प करने के सद्भावी कार्य में

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लाडनूं में गोगामेड़ी मंदिर के जीर्णोद्धार का मुस्लिम युवाओं ने उठाया बीड़ा,

कायमखानी युवक तन, मन, धन से जुटे हैं गोगामेड़ी का कायाकल्प करने के सद्भावी कार्य में

लाडनूं । यहां शहरिया बास स्थित शहीद अजीम खां राजकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल न. 2 के पास स्थित प्रसिद्ध गोगापीर के सार्वजनिक मंदिर गोगामेड़ी की जीर्ण-शीर्ण हालत को सुधारने का बीड़ा यहां के कुछ मुस्लिम युवाओं ने उठाया है। यह मंदिर पिछले काफी वर्षों से जगह-जगह से खण्डित हो चुका था और गिरने की कगार पर था। इस गोगामेड़ी के पास ही स्थित सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के खेलने या इस गोगामेड़ी पर आकर बैठने पर आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए आस-पास के युवाओं की टीम ने इस जीर्ण-शीर्ण गोगामेड़ी की हालात सुधारने का संकल्प लिया और जन सहयोग से राशि जुटाई और इसका पुनर्निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।

स्वेच्छा से जुटे हैं सभी मंदिर कार्य में 

पिंटू भाई ने बताया कि गोगापीर की इस सार्वजनिक गोगामेड़ी में काम करने वाले कारीगर व मजदूरों ने भी स्वेच्छा से इस कार्य में अपना सहयोग करते हुए नि: शुल्क सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। सभी लोग मिल कर बजरी, ईंट, पत्थर, सीमेंट और पानी की व्यवस्थाएं भी अपनी तरफ से कर रहे हैं। युवा वर्ग ने इस गोगामेड़ी का कायाकल्प करने बीड़ा उठाया है।

दिल खोलकर कर रहे हैं सहयोग 

सामाजिक कार्यकर्ता मो. मुश्ताक खान कायमखानी ने बताया कि गोगापीर के भक्तों की देखरेख में यह गोगामेड़ी चल रही थी, लेकिन काफी सालों से उन्होंने इस गोगामेड़ी की सुध लेनी बंद कर दी थी। इस स्थिति में इस मंदिर की दुर्दशा होने लगी। अब मोहल्ले के कायमखानी समाज के युवाओं और पिंटू भाई की टीम ने आगे आकर दिल खोल कर गोगामेड़ी के नवनिर्माण में अपना योगदान किया है। मुश्ताक खान ने इसे सर्वसमाज के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि उनके इस फैसले की शहर भर में प्रशंसा हो रही है।

दिया जा रहा है सभी मूर्तियों को पूरा सम्मान 

इस गोगामेड़ी मन्दिर में मूर्तियां विराजमान हैं, जो जमीन पर ही रखी हुई थी, अब उनके लिए मंदिर के अंदर एक नया ऊंचा स्थान तैयार किया जा रहा ताकि मंदिर में सभी मूर्तियों की पूरी हिफाजत और सम्मान हो सके। मंदिर जीर्णोद्धार कार्य में इसमें चारों तरफ ग्लैज्ड टाइल्स लगवाई जाने और मंदिर में रंग-रोगन के साथ सुरक्षा के लिए लोहे का दरवाजा भी लगाया जाएगा। इन युवाओं का संकल्प है कि गोगापीर की इस सार्वजनिक गोगामेड़ी मंदिर की पूरी रक्षा और सम्मान कायम किया जा सके। इसके लिए उन्होंने पूरी योजना पर काम शुरू किया है। लोगों ने इसे हिन्दू-मुस्लिम एकता व भाईचारा की दिशा में एक बेहतर कदम बताया है।

इस टीम के युवाओं ने उठाया बीड़ा 

इस मंदिर पुनर्निर्माण कार्य में सहयोग और मदद करने के लिए आगे आए युवाओं की टीम में पिंटू भाई, मो. मुश्ताक खान कायमखानी, सद्दाम भाणू, रिहान, अरशद, शकील, बाबू खां, सबीर खां, शाहरुख, अन्शु, रमजान, सौहेल, अयूब, आसिफ, मोहम्मद, बोदू, हनीफ, इमरान, नानजी, इरशाद, बाजी, चिकू, अनीस, राजा आदि शामिल हैं। यहां गौरतलब है कि गोग चव्हाण ददरेवा के शासक थे। इन गोगाजी चव्हाण को कायमखानी समाज अपने पूर्वजों में मानते हैं। मुस्लिम बनने से पूर्व समस्त कायमखानी चौहान राजपूत थे। गोगाजी को हिंदू और मुस्लिम दोनों मानते हैं और गोगापीर के रूप में पूजा जाता है।

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Author: kalamkala

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