हम समाज को राष्ट्रीय विचारधारा पर खड़ा करते हैं- आसोपा, लाडनूं में संघ का सात दिवसीय प्राथमिक शिक्षा वर्ग सम्पन्न

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हम समाज को राष्ट्रीय विचारधारा पर खड़ा करते हैं- आसोपा,

लाडनूं में संघ का सात दिवसीय प्राथमिक शिक्षा वर्ग सम्पन्न

लाडनूं। स्थानीय आदर्श विद्या मंदिर भवन में आरएसएस की प्राथमिक शिक्षा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सात दिवसीय प्राथमिक प्रशिक्षण वर्ग के समापन सत्र में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संघ के नागौर विभाग कार्यवाह महावीर आसोपा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा संस्कारों के निर्माण की अभिनव पद्धति है। कार्यकर्ताओं को बौद्धिक, मानसिक और शारीरिक रूप से दक्ष बनाने के लिए यह प्रशिक्षण वर्ग लगाए जाते हैं। इस प्रशिक्षण वर्ग में युद्ध, दंड, सूर्य नमस्कार आदि के माध्यम से युवाओं को विषम परिस्थितियों में सामना करने की शिक्षा दी जाती है। पिछले 7 दिनों से चल रहे प्राथमिक शिक्षा वर्ग में सहभागी स्वयंसेवकों से उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रमों में भाग लेने से स्वयंसेवकों के भीतर कार्यकर्ता का गुण विकसित होता है। वह अपने से अधिक राष्ट्र को महत्व देने लगता है। हम जो विचारधारा लेकर चले वह इस देश की विचारधारा थी। हम विचार का प्रचार कर रहे थे। हमारा प्रमुख उद्देश्य है कि समाज को राष्ट्रीय विचारधारा पर खड़ा करना है। इस विचारधारा के अभाव में यह देश 800 वर्षों तक पराधीन रहा।

प्रखर हिन्दूवादी चला रहे हैं हिन्दुत्व का एजेंडा

आसोपा ने कहा कि जहां संघ की शाखा व इससे जुड़े लोग नहीं भी हो, वहां भी आज हमारी विचारधारा चल रही है। वर्तमान समय में प्रखर हिंदूवादी लोगों की संख्या समाज में बहुत अधिक है। भले ही वह संघ से न जुड़े हो। ऐसे लोगों को हम सज्जन शक्ति कहते हैं। समाज का हर वह व्यक्ति जो राष्ट्र के लिए समर्पित है। राष्ट्र की विचारधारा से जुड़ा है। समाज में हिंदुत्ववादी विचारधारा का तेजी से प्रचार-प्रसार बड़ा है। भले वह संघ के कार्यकर्ता ना हो, लेकिन प्रखर हिंदूवादी हमसे ज्यादा हिंदुत्व का एजेंडा चलाते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में हुई थी। तब से संघ लगातार समाज के निर्माण में अपनी महती भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि 1925 में जब संघ प्रारम्भ हुआ, तो संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार स्वयंसेवकों को सैन्य प्रशिक्षण देना चाहते थे। उनकी सोच थी कि अनुशासन तथा समूह भावना से संस्कार निर्माण होगा और उससे से राष्ट्र का निर्माण संभव है।

46 गांवों के स्वयंसेवक हुए सम्मिलित

इस अवसर वर्ग कार्यवाह तेजराम ने बताया कि इस प्रशिक्षण वर्ग में डीडवाना जिले सभी तहसीलों से 46 गांवों के स्वयंसेवकों ने भाग लिया। उन्होंने कठोर दिनचर्या का पालन करते हुए विभिन्न प्रकार का प्रशिक्षण प्राप्त किया। योग्य शिक्षकों द्वारा प्रदत्त यह प्रशिक्षण वर्ग के समापन के अवसर पर लाडनूं शहर के प्रमुख कार्यकर्ता सभी उपस्थित रहे।

kalamkala
Author: kalamkala

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