दीपावली पर विशेष-
लाडनूं ही नहीं देश-विदेश में भी अपनी धूम मचा रहे हैं यहां के रसगुल्ले,
लाडनूं की खासियत बन चुके हैं यहां के स्पंजदार रसगुल्ले

अनूप तिवाड़ी, पत्रकार। लाडनूं (kalamkala.in)। त्योंहार का पर्व आते ही बच्चे हों या बूढ़े सभी मिठाई के लिए लालायित हो जाते हैं और मिठाई में भी लाडनूं के रसगुल्ले हों तो कहना ही क्या। लाडनूं के रसगुल्ले अपने सोफ्टनेस और स्पंजदार लचीलेपन के लिए विख्यात है। साथ ही इसकी खासियत यह है कि इसे कैसे भी मीठे को पसंद करने वाले बेझिझक खा सकते हैं। जिनको मधुमेह शुगर की बीमारी होती है, वे भी इसे पूरा निचोड़ कर पूरी चासनी निकाल कर खा सकते हैं। कम मीठे की चाह हो या अधिक मीठे की इच्छा, सब इस रसगुल्ले को अपनी पसंद के अनुसार खाने के काम ले सकते हैं। यह मात्र कोई गुणगान ही नहीं, बल्कि हकीकत है। लाडनूं के रसगुल्ले तो देश-विदेश में प्रख्यात हो चुके हैं। लाडनूं के रामेश्वर जी माली के रसगुल्ले कभी सबसे अधिक पसंदीदा थे। अब उनके पुत्रगण इसी हुनर का इस्तेमाल कर लोगों की पसंद और स्वाद की पूर्ति कर रहे हैं। इस काम को जेपी माली टाक ने आगे बढ़ाया और फिर उनके भाई भी इसी काम में जुट गए। पुरानी परम्परागत तकनीक से बनने वाले ये रसगुल्ले केवल गाय के शुद्ध दूध से ही तैयार होते हैं। दूध से खुद ताजा छैना (पनीर) बना कर उससे साफ शुद्ध की हुई चीनी की चासनी में इन्हें उबाल कर पकाया जाता है। इनमें स्पंज पैदा करना सबसे बड़ी कला और यही स्पंज इन रसगुल्लों को खास बनाते हैं। लाडनूं के रसगुल्ले आसाम, बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात आदि विभिन्न प्रदेशों के अलावा जयपुर, जोधपुर, अजमेर, श्री गंगानगर, भीलवाड़ा, उदयपुर आदि विभिन्न शहरों में लोगों के जायके में पहली पसंद बन चुके हैं। लाडनूं की सर्वश्रेष्ठ मिठाई यहां के रसगुल्ले हैं और वे भी जेपी टाक के बनाए रसगुल्ले कुछ विशेष ही स्वाद रखते हैं। टीवी चैनल फर्स्ट इंडिया न्यूज ने अपने कार्यक्रम ‘मरुधरा की मिठास’ में लाडनूं के रसगुल्लों को विशेष महत्व दिया है। इसकी रिपोर्ट फर्स्ट इंडिया न्यूज के लाडनूं संवाददाता अनूप तिवाड़ी ने तैयार व रिकॉर्ड की है।





