*संख्याबल से सता में भागीदारी तय करेगा कुम्हार समाज* *भारतीय प्रजापति हीरोज ऑर्गेनाइजेशन का 11वां स्थापना दिवस समारोह 29 मई को*

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*संख्याबल से सता में भागीदारी तय करेगा कुम्हार समाज*

*भारतीय प्रजापति हीरोज ऑर्गेनाइजेशन का 11वां स्थापना दिवस समारोह 29 मई को*

जगदीश यायावर। लाडनूं (kalamkala.in)। भारतीय प्रजापति हीरोज ऑर्गेनाइजेशन (रजिस्टर्ड) का 11वां स्थापना दिवस समारोह 29 मई को प्रजापति भवन लाडनूं में आयोजित किया जाएगा। समारोह में मुख्य एजेंडा ‘संख्या के आधार पर ओबीसी में कुम्हार सबसे अधिक हैं और संख्या के आधार पर सत्ता और संगठनों में समाज की भागीदारी तय की जावे’ रहेगा। इसे लेकर देश भर के हीरोज पदाधिकारी स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे। हीरोज के राष्ट्रीय मुख्य संस्थापक सत्यनारायण प्रजापति, राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश सरोहा और प्रदेशाध्यक्ष अशोक प्रजापत ने इस सम्बंध में जानकारी दी। इस अवसर पर मुख्य संस्थापक सत्य नारायण प्रजापति ने कहा कि देश में ओबीसी में कुम्हार समाज की संख्या सर्वाधिक है। हम मांग करते हैं कि सत्ता और संगठनों में संख्या के अनुरूप भागीदारी तय की जावे। हीरोज संगठन समाज में व्याप्त कुरीतियों को कुप्रथाओं को समाप्त कर युवाओं को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए कृत संकल्पित है। देशभर में समाज के साथ अगर कोई अत्याचार होता है तो हमारा संगठन पीड़ित के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर संघर्षरत रहता है और आगे भी रहेगा। समाज में व्याप्त दहेज प्रथा, मृत्यु भोज आदि बंद हो, इसके लिए हम प्रयासरत हैं। साथ ही देश में एक बड़े शिक्षा संकुल का निर्माण करना हीरोज की प्राथमिकता है।

झोंपड़ी-झोंपड़ी और खोपड़ी-खोपड़ी तक पहुंचे संगठन

राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश सरोहा प्रजापति ने कहा कि 11 वर्ष पूर्व कुम्हार समाज के देशव्यापी संगठन भारतीय प्रजापति हीरोज ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना की गई। स्थापना के दौरान 11 सदस्यीय संस्थापक मंडल ने पूरे देश में भ्रमण कर समाज में जागृति पैदा कर संगठन की मजबूती के प्रयास आरंभ किया। आज 11 वर्ष पश्चात पूरे देश के सभी राज्यों में हीरोज की शाखाएं काम कर रही हैं। 25 से अधिक राज्यों में हीरोज तहसील और पंचायत स्तर तक पहुंच चुका है। सामाजिक उत्थान और समाज का विकास हीरोज की प्राथमिकता है। हमारा ध्येय है कि हीरोज झोपड़ी-झोपड़ी और खोपड़ी-खोपड़ी तक फैले। हीरोज के साथी पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक हीरोज के सदस्य पहुंचे, हम इसके लिए कृत संकल्पित है।

अन्याय-अत्याचार के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा

भारतीय प्रजापति हीरोज आर्गेनाईजेशन के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट अशोक प्रजापत ने कहा कि राजस्थान में हीरोज घर-घर तक पहुंच चुका है। राजस्थान में किसी भी सामाजिक व्यक्ति या परिवार के साथ कोई प्रताड़ना, अत्याचार होता है तो हीरोज संगठन उनके साथ खड़े होकर धरना-प्रदर्शन करते हैं, प्रदेश और देश के राजनेताओं और उच्च अधिकारियों तक पीड़ित की बात पहुंचा कर उसको न्याय दिलाने हेतु संघर्षशील रहते हैं। हमने राजस्थान में कई प्रकार के प्रदर्शन कर लोगों को आगे बढ़ने का काम किया है और आगे भी करते रहेंगे। राजस्थान में ओबीसी आरक्षण का वर्गीकरण किया जावे, तथा राजनीति में सत्ता और संगठनों में समाज की संख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व मिले उसके लिए भी हीरोज संघर्षशील है।

शिक्षा व स्वावलंबन के लिए अग्रणी संगठन

हीरोज के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष किशन संवाल ने कहा कि हीरोज द्वारा बालिका शिक्षा, महिलाओं को रोजगारोन्मुखी बनाने तथा स्वावलंबी समाज की संरचना करने के लिए हीरोज अग्रणी संगठन है। बाल विवाह को रोकने के लिए हीरोज लगातार प्रयासरत है। बीपीएचओ देश का पहला ऐसा संगठन है, जिसकी सदस्यता के लिए फीस ₹ 1200 फीस भरनी पड़ती है, उसके बावजूद भी हीरोज में विभिन्न प्रकार के अधिकारी, राजनेता, कर्मचारी, व्यापारी और आमजन जुड़ रहा है।

प्रजापत समाज की मुख्य मांगें

इन पदाधिकारियों ने बताया कि प्रजापति समाज की मुख्य मांगें इस प्रकार से हैं-
1. माटीकला राष्ट्रीय आयोग और राज्य आयोग का गठन किया जावे।
2. ओबीसी को लोकसभा और विधानसभा चुनाव में आरक्षण दिया जावे।
3. ओबीसी के आरक्षण का वर्गीकरण किया जावे। आर्थिक रूप से मजबूत जातियों को अलग से आरक्षण मिले।
4. कुम्हार समाज को संख्या के आधार पर सत्ता और संगठन में भागीदारी मिले।
5. माटीकला का कार्य करने वाले कुम्हार परिवार को आधुनिक उपकरण नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जावे।
6. माटी का काम करने वाले परिवारों को गांव स्तर पर मिट्टी खुदाई के लिए नि:शुल्क भूमि आवंटित की जाए तथा भूमि आरक्षित हो।

ये सब पदाधिकारी रहे उपस्थित

पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और संस्थापक जय भगवान प्रजापति हरियाणा, पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री रमेश टाक हरियाणा, राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष किशन संवाल, सह संस्थापक होसियार सिंह, आयोजन प्रभारी नव रतन प्रजापत, विधि सलाहकार लक्ष्मण प्रजापत आदि इस अवसर पर उपस्थित रहे।

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Author: kalamkala

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