एंटी टेरेरिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदर सिंह बिट्टा ने की जैविभा विश्वविद्यालय के कार्यों की सराहना, बोले, यह है विलक्षण विश्वविद्यालय, अहिंसा के प्रसार को बताया सबसे जरूरी, विश्व शांति के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करने की जरूरत पर दिया जोर

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एंटी टेरेरिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदर सिंह बिट्टा ने की जैविभा विश्वविद्यालय के कार्यों की सराहना, बोले, यह है विलक्षण विश्वविद्यालय,

अहिंसा के प्रसार को बताया सबसे जरूरी, विश्व शांति के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करने की जरूरत पर दिया जोर

लाडनूं (kalamkala.in)। अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा के अध्यक्ष एवं राष्ट्रवादी सामाजिक कार्यकर्ता मनिन्दरजीत सिंह बिट्टा सोमवार को यहां लाडनूं स्थित जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय आए और कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ से मुलाकात की। कुलपति प्रो. दूगड़ ने उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. दूगड़ ने उन्हें जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में संचालित अहिंसा एवं शांति विभाग के पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। साथ ही अन्य पाठ्यक्रमों के बारे में बताते हुए विश्वविद्यालय की विशेषताओं के बारे में भी बिट्टा को अवगत करवाया। उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में तैयार घोषणा पत्र और यूएनओ, अमेरिका राष्ट्रपति, ईरान के सुप्रीमो व अन्य नेताओं और इस्राइल के नेताओं को शांति-स्थापना के लिए भिजवाए प्रस्ताव और वार्ता के सुझाव की जानकारी दी। विश्वविद्यालय के अहिंसा प्रशिक्षण की पूरी जानकारी दी और जैन दर्शन के साथ अन्य सभी धर्म-दर्शनों में निहित अहिंसा के बारे में किए जा रहे कार्य के बारे में बताया।

व्यापक पैमाने पर दिया जाए युवाओं को अहिंसा प्रशिक्षण 

मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने हरीतिमा युक्त प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक वातावरण में संत-मुनियों के सान्निध्य में अध्ययन-अध्यापन और अनुशासन व भारतीय नैतिक मूल्यों के माहौल में संस्कारित शिक्षा को वर्तमान समय का सबसे विलक्षण शिक्षण संस्थान बताया। उन्होंने अहिंसा प्रशिक्षण को सबसे बेहतर बताते हुए व्यापक पैमाने पर युवाओं को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने जैन धर्म को अहिंसा का मूल दर्शन बताते हुए कहा कि इसे सबसे अधिक महत्व देते हुए शिक्षण होना चाहिए। उन्होंने विश्व में युद्ध की स्थिति में विश्वविद्यालय की पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां से उठे विचारों का असर निश्चित ही सार्थक सिद्ध होता।उन्होंने इस बात पर हर्ष जताया कि सुदूर ग्रामीण परिवेश वाले क्षेत्र में इतना अच्छा शिक्षण कार्य करके इस विश्वविद्यालय ने देश ही नहीं विदेशों तक ख्याति अर्जित की है।

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Author: kalamkala

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