देश के सबसे बड़े पत्रकार संगठन आईएफडब्लूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. विक्रम राव के निधन पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संदेश भेज जताया शोक


जयपुर (kalamkala.in)। देश के ख्यातनाम पत्रकार एवं अग्रणी पत्रकार संगठन आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. विक्रम राव के निधन पर प्रेस सिटी प्रेस क्लब के प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा आयोजित करके उनकी स्मृतियों को संस्मरणों के रूप में साझा किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभा का आयोजन आई.एफ.डब्ल्यू.जे. संगठन के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष अभय जोशी तथा अध्यक्षता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह राठौड़ ने किया। सभा में उपस्थित सभी वरिष्ठ पत्रकारों ने दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार एवं विलक्षण संगठनकर्ता विक्रम राव से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा किया। वरिष्ठ पत्रकार अशोक भटनागर, सत्य पारिक, आशा पटेल, देवेन्द्र शास्त्री, बाबूलाल भारती, शंकर नागर, विष्णु दत्त शर्मा, उपेन्द्र सिंह राठौड़, अभय जोशी, आशा शर्मा, एस एन गौतम, मनवीर सिंह चुंडावत, अमर सिंघल, अरुण झा, दिनेश अधिकारी, लोकेन्द्रसिंह, रमाकांत गोस्वामी ने सभा में अपने उद्बोधन दिए। साथ ही बड़ी संख्या में उपस्थित पत्रकारों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को श्रद्धांजलि एवं श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
प्रधानमंत्री मोदी ने भेजा शोक-संदेश
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडियन फैडरेशन आॅफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के० विक्रम राव के निधन पर शोक व्यक्त किया है। इस सम्बंध में उन्होंने डॉ. के. सुधा राव’ को शोक-संदेश पत्र भेजा है। इस पत्र में प्रधानमंत्री ने सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर स्व. डॉ. राव के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए लिखा कि उनके द्वारा लिखित पुस्तकें पाठकों के लिए एक धरोहर के समान है। प्रधानमंत्री ने पत्र में स्वर्गीय डॉक्टर राव द्वारा ’आपातकाल’ के दौरान किए गए संघर्ष का उल्लेख भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में डॉ. के. सुधा राव को लिखा है, ‘श्री के. विक्रम राव जी के निधन के बारे में जानकर बहुत दुःख हुआ। इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएं परिवार के साथ हैं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री के. विक्रम राव जी का पत्रकारिता के लिए स्नेह उल्लेखनीय था। सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों के प्रति उनका दृष्टिकोण व जरूरतमंद लोगों के लिए कार्य करने का उत्साह अद्भुत था। विभिन्न विषयों को समेटे उनकी पुस्तकें पाठकों के लिए एक धरोहर के समान हैं। आपातकाल के दौरान देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए उन्होंने अनेक कठिनाइयों का सामना किया और उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। उनका निधन पत्रकारिता जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। आज वह सशरीर हमारे साथ नहीं हैं पर उनकी शिक्षाएं और जीवन मूल्य परिवार के साथ बने रहेंगे। ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वह शोक संतप्त परिजनों व शुभचिंतकों को यह दुःख सहन करने का धैर्य और संबल प्रदान करें।’







