लाडनूं के राजकीय चिकित्सालय के 16 डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पाबंदी लगी, मरीज से फीस लेते हुए पाए जाने पर होगी कार्रवाई, राज्य सरकार के आदेशों की अनुपालना में पीएमओ ने जारी की सूची और शर्तें, दिया जाएगा एनपीए 

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लाडनूं के राजकीय चिकित्सालय के 16 डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पाबंदी लगी, मरीज से फीस लेते हुए पाए जाने पर होगी कार्रवाई,

राज्य सरकार के आदेशों की अनुपालना में पीएमओ ने जारी की सूची और शर्तें, दिया जाएगा एनपीए

लाडनूं (kalamkala.in)। राज्य सरकार ने लाडनूं के राजकीय उप जिला चिकित्सालय के 16 डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस करने पर रोक लगा दी है। इस सम्बन्ध में राज्य सरकार ने उन चिकित्सकों को उनके मूल वेतन का 20 प्रतिशत लाभ नोन प्रेक्टिस एलाउंस (एनपीए) के रूप में देना तय किया गया है। साथ ही सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर इनमें से कोई भी डाक्टर प्राइवेट स्तर पर प्रेक्टिस करता हुआ और मरीज को देखने की फीस लेता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी तथा समस्त एनपीए की वसूली की कार्रवाई भी की जाएगी। इस सम्बन्ध में सचिव, वित (बजट) राजस्थान सरकार, जयपुर के आदेश क्रमांक एफ.6 (3) एफडी/रूल्स 2008 जयपुर दिनांक 28.06.2013 एवं एफ.6 (8) एफडी / रूल्स/2017 दिनांक 30.10.2017 की पालना में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) राजकीय चिकित्सालय, लाडनूं ने भी आदेश क्रमांक- लेखा/चिकि/2026/1192 जारी करके सभी सम्बंधित चिकित्सकों और अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।

इन 16 डॉक्टरों की प्रेक्टिस पर रहेगी रोक

पीएमओ द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन नॉन प्रेक्टिस 16 डॉक्टरों में वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. बलबीर सिंह, उप निदेशक डॉ. राजकुमार डिडेल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. पार्थ सारथी अरोड़ा, चिकित्सा अधिकारी (मेडिसिन) डॉ. सुरेश कुमार, कनिष्ठ विशेषज्ञ (दन्त) डॉ. मन्जूश्री चौधरी, कनिष्ठ विशेषज्ञ (दन्त) डॉ. नवल सोनी, चिकित्सा अधिकारी डॉ. ताराचंद कुमावत, चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेन्द्र कुमार वर्मा, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुनेश कुमार, चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार महला, चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामावतार जाखड़, चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयपाल बाज्या, चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेन्द्र सिंह थोरी, चिकित्सा अधिकारी डॉ. फारूख खान, चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास सैनी एवं वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक कुमार देवन्दा शामिल हैं।

इस डाक्टरों पर रहेंगी ये शर्तें लागू

इस सभी चिकित्सकों को प्रत्येक माह की 15 तारीख तक ‘नॉन प्रेक्टिस अलाउन्स’ का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इन एनपीए लेने वाले चिकित्सकों को अपने परामर्श केन्द्र पर मरीज से परामर्श शुल्क के साथ देखते हुए पाया जाता है, तो उसके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही अमल में लाते हुए आवेदन की तिथि से प्राप्त एनपीए राशि की वसूली की जायेगी। यह आदेश इन चिकित्सकों के लिए एक जनवरी से पूरे कलेण्डर वर्ष 2026 तक लागू रहेगी। इनको मूल वेतन का 20 प्रतिशत ‘नॉन प्रेक्टिस अलाउन्स’ दिये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें से किसी चिकित्सक का पदस्थापन /स्थानान्तरण अन्यत्र होने पर यह आदेश स्वतः निरस्त माना जायेगा।

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Author: kalamkala

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