करंट से बादेड़ में मरे हलवाई के शव को उठाने से किया इंकार, सौंपा मांगपत्र और दिया धरना,
50 लाख का मुआवजा, मकान व प्लॉट, सरकारी नौकरी, डेयरी और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों को बर्खास्त करने की मांग





लाडनूं (kalamkala.in)। तहसील के ग्राम बादेड़ में विद्युत विभाग की लापरवाही से घरेलू विद्युत सप्लाई में हाईटेंशन लाईन के करंट आ जाने से मृतक मोटनाथ के परिजनों को आर्थिक सहायता दिलाने को लेकर लोगों ने मृतक के शव को उठाने से मना करते हुए लाडनूं के राजकीय चिकित्सालय में धरना देकर बैठ गए। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन द्वारा मांगे नहीं माने जाने तक सरकारी अस्पताल में धरना जारी रखने और तब तक मृतक का पोस्टमार्टम नहीं करवाने और अपनी मांगों को मनवाने तक परिजन अड़े हुए हैं। धरनार्थियों ने इस सम्बन्ध में जिला कलेक्टर के नाम का एक ज्ञापन भी यहां उपखण्ड अधिकारी को सौंपा। धरनार्थियों ने ज्ञापन में मृतक के परिजनों को 50 लाख की आर्थिक सहायता देने, पक्का मकान बनवा कर दिया जाए, प्लॉट आवंटित किया जाने, एक जने को सरकारी नौकरी दी जाए, दोषी अधिकारियों को बर्खास्त किया जाने तथा 15 दिनों में 11 केवी लाईन हटाई जाने की मांग की गई है।
इस प्रकार हुई थी घटना
ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम बादेड़ में प्रेमाराम इनाणिया के घर में हलवाई का काम करने वाले व्यक्ति मोटनाथ पुत्र खेतनाथ उम्र 40 वर्ष निवासी चाउ की 2 अप्रेल को सुबह 9 बजे बिजली हाईटेन्शन 11 के.वी. का करण्ट आने से मौत हो गई। इसमें हाईटेंशन लाईन 11 के.वी. का और एल.टी. लाईन टकराने से यह खतरनाक करंट लगा। उन्हें लाडनूं के सरकारी अस्पताल लेकर आने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
एक गिलहरी बनी हादसे का कारण
बताया गया है कि बादेड़ निवासी प्रेमाराम जाट के घर पर रात्रि को जागरण था गुरुवार को प्रसादी वितरण होनी थी। इसके लिए 800 आदमियों का भोजन प्रसादी तैयार हो रहा था, करीब 9 बजे करीब एलटी लाइन के पास 11 हजार लाइन एक छोटे से जानवर गिलहरी के कारण दोनों लाइनें टच हो गई और घरों में हाईलाइट वोल्टेज प्रवाहित होने के कारण घरों के वायर व उपकरण जलने लगे तो दूसरे हलवाई गोवर्धन राम जाट ने लाइन से जुड़े वायरों को तत्काल हटाया। तब तक अन्य कोई बड़ा हादसा होने से टल गया।
दोषी हैं विद्युत अधिकारी व कर्मचारी
ज्ञापन में बताया गया है कि बिजली विभाग की गाईड लाईन के अनुसार 11 के.वी. विद्युत लाईन एवं एल.टी. विद्युत लाईन में नियमानुसार 3 फीट का गेप/दूरी और दोनों लाईन पर इन्सुलेटर होने का प्रावधान है। इस घटना में गेप 1.5 फीट व एल.टी. लाईन का इन्सुलेटर नहीं होना पाया गया है। इस बिजली लाईन को लेकर 181 पोर्टल पर अनेक प्रकरण दर्ज हैं, जिन पर बिजली विभाग ने अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया। इससे स्पष्ट है कि बिजली विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही साबित होती है, जिसका मौका मुआयना स्वयं ए.ई.एन. अवधेश बैरवा ने किया है। इनके सबूत भी लोकेशन कैमरा में उपलब्ध है। इस तरह से विद्युत करण्ट विद्युत विभाग की लापरवाही से घरेलू विद्युत लाईन में प्रवाहित हुआ।बादेड़ ग्रामवासी का कहना है कि इस लाइन से 1 वर्ष में दूसरी घटना घटित हुई है फिर भी विभाग इस लाइन को नहीं हटा रहे हैं। विद्युत विभाग को इस हादसे की जानकारी देने के बाद भी तीन घंटे तक नहीं पहुंचे, विरोध करने के बाद विभाग के सहायक अभियंता अवधेश बैरवा, कनिष्ठ अभियंता लक्ष्मी नारायण आदि पहुंचे तथा ग्रामीणों के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर की जांच की, जिसमें दोनों लाइनों के बीच गिलहरी जानवर आने के कारण यह घटना घटित होनी पाई गई, जिसकी जिम्मेदारी लेते हुए विभाग द्वारा जो भी सहायता दी जाएगी, उसके लिए देने का आश्वासन दिया।
मृतक पर ही आश्रित था पूरा परिवार
मृतक मोटू नाथ सिद्ध निवास चाऊ नागौर हाल निवासी काणूंता (सुजानगढ़) का है। उसने काणूंता के बस स्टैंड पर मिठाई व चाय-पकौड़ी की दुकान पिछले 10-15 वर्ष से लगा रखी है। दुकान की मजदूरी से ही वह अपने चार बच्चों व परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। करीब 1 महीने पहले उनकी माता का देहांत हो गया था, वृद्ध पिता और बच्चे-पत्नी सब इसी पर निर्भर थे। अचानक मोटानाथ सिद्ध की मृत्यु होने के कारण दोनों जगह चाऊ व कानूता में सन्नाटा छा गया।
ये सब हैं धरनार्थियों की मांगें
इस करण्ट से हुई मौत प्रकरण में परिजनों और उपस्थित लोगों द्वारा अपना मांग पत्र एसडीएम को जो प्रस्तुत किया, जिसमें बताया गया है कि इस दुर्घटना प्रकरण में विद्युत विभाग के लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों पर कानूनी कार्यवाही कर उनको निलम्बित और बर्खास्त किया जाये। क्योंकि, लाडनूं उपखण्ड में विद्युत विभाग की लापरवाही से बार-बार ऐसी दुर्घटनाएं हो रही हैं। ग्राम बादेड़ में ही पिछली साल भी ऐसी घटना घटित हुई थी। इस प्रकरण में मृतक मोटनाथ के परिवार में कोई कमाने वाला व्यक्ति नहीं है। चार छोटे-छोटे बच्चे हैं और वृद्ध पिता व उनकी पत्नी है। इसलिए परिवार में कोई कमाने वाला नहीं बचा है। इसलिए मृतक के परिजनों को 50 लाख की आर्थिक सहायता दी जावे। साथ ही मृतक के परिजनों को एक सरकारी नौकरी दी जावे। मृतक के घर पर पक्का मकान नहीं है, इसलिए प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उसके परिवार को दिलाया जावे। मृतक काणूंता ग्राम में किराये के मकानों में रहता है, इसलिए मृतक मोटनाथ के परिजनों को एक प्लोट आवंटन किया जावे। मृतक मोटनाथ की पत्नी को राज्य सरकार की योजनाओं में दुग्ध डेयरी सहित राज्य सरकार व केन्द्र सरकार की योजनाओं का लाभ दिया जावे। ग्राम बादेड से हाईटेंशन लाईन 11 के.वी. को 15 दिवस में हटाई जावे। जर्जर पोल की जगह नया पोल लगाया जावे, क्योंकि बिजली करंट से मरने व घायल होने की बादेड़ ग्राम में दूसरी घटना है। ज्ञापन में मांग की पूर्ति कर मृतक मोटनाथ के परिजनों को राहत प्रदान करें, अन्यथा मृतक का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
ग्रामीणों व प्रशासन के बीच हुई वार्ता
ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और प्रशासन का विरोध करते रहे। फिर वे सब मोर्चरी के बाहर धरना देकर बैठ गए। इसके बाद भी 8 घंटे तक प्रशासन से कोई नहीं पहुंचा तो पीड़ित परिवारजन व ग्रामीणों में रोष व्याप्त हो गया और विरोध पर उतर आए। तब नायब तहसीलदार कानूनगो के साथ धरना स्थल पर पहुंचे तथा विद्युत विभाग के अधिकारियों ग्रामीणों के साथ समझाइश की बातचीत की, लेकिन कोई समझौता नहीं हो पाया। इस दौरान निम्बी पुलिस थाना अधिकारी के अलावा वृत पुलिस अधीक्षक, नायब तहसीलदार, बिजली विभाग के संबंधित अधिकारी सहित अनेक राजनीतिक दलों के पदाधिकारीगण, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और आम जनता उपस्थित रहे। अस्पताल परिसर में दिए गए धरने के दौरान चाऊ के प्रशासक सुरेश दान चारण, सुरजाराम भाकर, ज्ञानाराम महरिया, गोविंदराम मंडा, नाथूराम ठोलिया आदि ने पुलिस प्रशासन से वार्ता की। इस अवसर पर पुलिस उप अधीक्षक जितेंद्रसिंह चारण, थानाधिकारी सिद्धार्थ प्रजापत आदि उपस्थित रहे। सभी मांगों पर लिखित रूप से नियमानुसार व न्यायसंगत समझौता नहीं होने तक मृतक का पोस्टमार्टम नहीं कराने और धरना जारी रखने के निर्णय पर परिजन और ग्रामीण अड़े हुए हैं।
इन सबने सौंपा ज्ञापन व दिया धरना
मुख्यमंत्री व कलेक्टर के नाम का ज्ञापन तहसीलदार अनिरूद्ध देव पांडेय को सौंपा। ज्ञापन देने वालों में विधायक प्रतिनिधि सुरजाराम भाकर, एडवोकेट हरीश मेहरडा, सरपंच प्रेमाराम बीरड़ा कानूता, सरपंच सुरेशदान चाऊ, गोपीराम बिजारणियां संजय ढाका, गोविंद मण्डा, सामाजिक कार्यकर्ता मो. मुश्ताक खान कायमखानी, नाथूराम बादेड़, भंवरनाथ सिद्ध, महन्त मोहननाथ, गणेश नाथ, लालनाथ, ज्ञानाराम महरिया, रामनिवास, नानूराम, रामलाल, सलीम, ओमप्रकाश लोहार, सीताराम कडे़ला, धर्मेन्द्र, अनवर अली, उम्मेद सिंह, जगदीश, विष्णु, सद्दाम, अयूब आदि शामिल थे।







