आचार्य श्री महाश्रमण के मंगलपाठ से शुरू किया गया जैविभा विश्वविद्यालय का नया सत्र,
प्रो. वंदना कुंडलिया की पुस्तक ‘पाथ्स ऑफ अहिंसा’ का समर्पण और लोकार्पण


लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय में नए सेशन का प्रारंभ विश्वविद्यालय परिवार द्वारा अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण का मंगल आशीर्वाद प्राप्त करके किया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण ने विद्यार्थियों के विकास को केंद्र में रखकर ज्ञान के साथ संयमित और नैतिक आचरण की प्रेरणा प्रदान की। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ एवं शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने भी अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी। विश्वविद्यालय की प्रोफेसर वंदना कुंडलिया ने अपनी रचित पुस्तक ‘पाथ्स ऑफ अहिंसा’ यानि ‘अहिंसा के रास्ते’ का प्रथम समर्पण अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण को करके पुस्तक का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर प्रो. वंदना कुंडलिया ने अपनी पुस्तक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक विश्व के महान नैतिक चिंतकों लियो टॉलस्टॉय, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, अल्बर्ट श्वाइट्ज़र, दलाई लामा और थिच न्यात हान्ह के चिंतन तथा आचार्य श्री महाश्रमण के अहिंसा, संयम और नैतिक जीवन-दर्शन के तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित है। इन सभी चिंतकों ने मानवता को करुणा, आत्मानुशासन, सेवा, सजगता और नैतिकता का संदेश दिया, किंतु आचार्य महाश्रमण के जीवन और चिंतन में ये सभी मूल्य केवल विचार के रूप में नहीं, बल्कि जीवंत आचरण के रूप में दिखाई देते हैं।






