लाडनूं के रेलवे स्टेशन पर मचा भारी हंगामा,
रेलवे के बुकिंग क्लर्क व वाणिज्य अधीक्षक ने टिकट बुकिंग ठेकेदार को बुरी तरह पीटा, उसे किया लहूलुहान, रुपए छीने और बिखेरे, जातिसूचक अपशब्द व गंदी गालियां बरसाई,
क्लर्क व वाणिज्य अधीक्षक के ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में होने का आरोप, जीआरपी मौके पर पहुंची, रिपोर्ट लेकर मामले की जांच में जुटी










लाडनूं (kalamkala.in)। यात्रियों से भरे रहने वाले लाडनूं रेलवे स्टेशन पर शनिवार को दोपहर कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला, जब अचानक आपस में घमासान मचा और वहां पर नोट ही नोट बिखरे नजर आए। एक व्यक्ति बुरी तरह से लहुलुहान हो गया, उसके कपड़े भी फट गए। परस्पर यह मारपीट की गंभीर घटना किन्हीं यात्रियों के बीच नहीं, बल्कि रेलवे यात्रियों को टिकटें जारी करने वाले दो अधिकृत व्यक्तियों व अधिकारी के बीच में हुई। इनमें एक पक्ष रेलवे का बुकिंग क्लर्क व वाणिज्य अधीक्षक था और दूसरा बुकिंग ठेकेदार। यह सारा बवाल रेलवे बुकिंग कार्यालय में चार्जिंग पॉइंट को लेकर हुआ। इस सॉकेट में बुकिंग बाबू द्वारा अपना मोबाइल लगा देने से बाहर बैठ कर टिकट बुकिंग करने वाले व्यक्ति की टिकटिंग मशीन वगैरह की बिजली बंद हो गई। इन टिकट क्लर्कों आदि के बीच हुई इस मारपीट की घटना के कारण रेलवे स्टेशन पर मौजूद रेल यात्री काफी परेशान रहे। आधे घंटे तक तो पूरी टिकट व्यवस्था ही बाधित हो गई। इस मामले में दीपक परिहार के नाक की हड्डी टूटने की बात सामने आई है। जीआरपी ने इस बारे जांच शुरू कर दी है। जीआरपी द्वारा पीड़ित दीपक का मेडिकल मुआयना लाडनूं के राजकीय चिकित्सालय में करवाया गया, जिसमें किए गए एक्सरे में उसके नाक की हड्डी टूटी हुई पाई गई है। अस्पताल में उसका उपचार किया जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों ने साधी चुप्पी, यात्रियों ने मिल छुड़ाया दोनों को
इस पर वह रेलवे ऑफिस के अंदर बिजली वापस शुरू करने के लिए गया। वहां बुकिंग क्लर्क ने उसके साथ हाथापाई शुरू कर दी। टेबलें और कुर्सियों का प्रयोग भी मारपीट के लिए किया गया। इस झगड़ा-फसाद के दौरान वहां बहुत सारे नोट गिर कर फर्श पर बिखर गए। बुकिंग ठेकेदार के कपड़े भी फट गए और चेहरे, नाक वगैरह पर चोटें लगने से उसका खून भी बहने लगा। रेलवे के वाणिज्य अधीक्षक विशाल चंदेल ने भी झगड़े में अंकित कपिला का साथ खुलकर दिया और मारपीट में बराबर का सहयोगी बना। रेलवे के किसी भी अधिकारी व कर्मचारी ने उन लोगों को झगड़ते हुए देखकर भी नहीं छुड़ाया, बाद में यात्रियों ने बीच-बचाव कर उनको छुड़ाया। इस बारे में रेलवे अधिकारियों ने तो कोई बात भी करना गवारा नहीं समझा और पूरी चुप्पी साधे रखी। मोबाइल उठाने भी बंद कर दिए।
बिखरे रुपयों में से पांच हजार से अधिक हुए गायब
रेलवे स्टेशन पर हुए इस झगड़े की जानकारी मिलने पर जीआरपी की रेलवे पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और पूरी घटना की जानकारी ली। रेलवे की जीआरपी पुलिस के कांस्टेबल गजेंद्र सिंह व श्रवणराम मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। यह मारपीट की घटना रेलवे के लिपिक अंकित कपिला, जिनकी ड्यूटी सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक थी, उसकी ड्यूटी के दौरान यह घटना हुई। उसका झगड़ा दीपक परिहार पुत्र सुरेश चंद्र निवासी वार्ड नंबर 23 वाल्मीकि बस्ती लाडनूं के साथ हुआ। मारपीट के पीड़ित दीपक परिहार पुत्र सुरेश चंद बाल्मीकि बस्ती लाडनूं का आरोप है कि उसके 8500 से अधिक रुपये थे, जो बिखेर दिए गए, जबकि जीआरपी पुलिस को निरीक्षण के दौरान मौके से सिर्फ 2876 रुपए ही मिले। इस प्रकार वहां से 5000 से अधिक रूपए कम हो गए। पीड़ित दीपक ने इन दोनों पिटाई करने वाले हमलावरों पर रुपए चुराने का आरोप लगाया है।
मारपीट के बाद क्वार्टर में घुस किया दरवाजा बंद
इस घटना के बाद रेलवे का बुकिंग क्लर्क अंकित कपिला जाकर अपने क्वार्टर में घुस गया और जीआरपी द्वारा बार-बार दरवाजा खटखटाए जाने पर भी उसने नहीं खोला। लोगों का कहना है कि वह बुकिंग क्लर्क व दूसरा अधिकारी शराब पिए हुए थे। दी गई रिपोर्ट में भी यह आरोप लगाया गया है।
यह रिपोर्ट दी गई है जीआरपी इंचार्ज को जांच के लिए
पीड़ित दीपक परिहार ने जीआरपी चौकी डीडवाना के इन्चार्ज को इसकी एक लिखित रिपोर्ट एफआईआर दर्ज करवाने के लिए दी है। परिहार दीपक पुत्र सुरेशचन्द वाल्मिकी निवासी वार्ड नं. 23 हरिजन बस्ती लाडनूं ने इस रिपोर्ट में बताया है कि उसने लाडनूं रेल्वे स्टेशन पर टिकट बुकिंग का टेण्डर लिया हुआ है, जहां पर वह हमेशा की तरह 1 अगस्त को भी अपना कार्य कर रहा था एवं यात्रियों की टिकट काट कर दे रहा था। तभी दोपहर 1:30 बजे करीब जब वह टिकट का प्रिन्ट निकाल रहा था, तभी वहां लाडनूं स्टेशन के टिकट काउण्टर पर कार्यरत कार्मिक अंकित कपिला ने उसकी एटीवीएम मशीन / प्रिन्टर के चार्जिंग के लिए लगे लाईट के प्लग से पिन निकाल दी। तब उसने उनसे कहा कि सर, आपने मुझे बताया नहीं एवं बिना बताये ही लाईट से मशीन की पिन प्लग निकाल दी। इससे उसकी टिकट नहीं बन पायी एवं यात्री से ली गयी राशि निरस्त हो गयी है, जो मुझे ही वहन करनी होगी। इतने में अंकित कपिला ने अपने मुंह से भद्दी-भद्दी गालियां निकालते हुए और अपशब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि यह ऑफिस तेरे बाप का है क्या? इस प्लग में मेरा फोन चार्ज होगा, तेरे को जरूरत है तो अन्दर आकर दूसरे प्लग में लगा ले। तब वह ऑफिस में प्रिन्टर की पिन लगाने गया, तो आरोपी अंकित कपिला व उसके सहयोगी विशाल चन्देल ने उसके साथ लात-घूसों से तथा टेबल-कुर्सी से भीषण मारपीट करने लगे। ये दोनों आरोपी शराब के नशे में थे तथा उसे जातिसूचक गालियां भी तथा अपशब्दों का प्रयोग करते हुए कहा, तूं यहां क्या टिकट काट रहा है, तेरा काम तो टॉयलेट, टट्टी-पेशाब सफाई का है। तूं यहां बाबू बनकर टिकट काउण्टर पर बाबूगिरी कर रहा है। यह कहते हुए भी उसे बुरी तरह मारा। इससे उसके नाक व मुंह से खून आने लगा और नाक की हड्डी में फ्रेक्चर भी आ गया। उसके टिकट बुकिंग के करीब 8500-9000 रूपये उसके पास शर्ट की जेब व हाथ में ही थे, वो रूपये-पैसे भी आरोपीगण ने वहीं बिखेर दिये एवं कुछ रूपये अपनी जेब में डालकर ले गये। हो-हल्ला सुन स्टेशन पर मौजूद यात्रीगण ने अन्दर आकर बीच-बचाव कर आरोपीगण के चंगुल से उसे छुड़ाया अन्यथा आरोपीगण उसे और अधिक गंभीर चोटें कारित करते। उसने पूरा मामला लिखते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।







