लाडनूं के राजस्थानी भाषा-साहित्य शोध केन्द्र के निदेशक डॉ. व्यास को मिला ‘मायड़ भासा सम्मान’

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लाडनूं के राजस्थानी भाषा-साहित्य शोध केन्द्र के निदेशक डॉ. व्यास को मिला ‘मायड़ भासा सम्मान’

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के राजस्थानी भाषा-साहित्य शोध केन्द्र के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत व्यास को उनकी राजस्थानी भाषा और साहित्य कै समर्पित सेवाओं और साहित्यिक योगदान को ध्यान में रखते हुए जोधपुर में राजस्थान दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय समारोह में ‘मायड़ भाषा सेवा सम्मान’ प्रदान कर सम्मानित किया गया। मेहरानगढ़ महाराजा म्यूजियम ट्रस्ट जोधपुर के मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केंद्र एवं जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के राजस्थानी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें यह ‘मायड़ भाषा सेवा सम्मान’ प्रदान किया गया है। डॉ. व्यास को उनके द्वारा राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के संवर्धन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर किये वाले कार्यों को ध्यान में रखते हुए प्रदान किया गया।
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के राजस्थानी विभाग के 50 वर्ष पूर्ण होने पर मनाए गए ‘उजास-उछब’ राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति के उत्सव कार्यक्रम में इसी विभाग में उनके द्वारा की गई सेवाओं के लिए उन्हें विशिष्ट सम्मान प्रदान किया गया है। इस सम्मान समारोह में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलपति डॉ. अजित कुमार कर्नाटक एवं साहित्य अकादमी नयी दिल्ली के राजस्थानी परामर्श मंडल के संयोजक डॉ. अर्जुनदेव चारण द्वारा उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में डॉ. व्यास ने ‘राजस्थानी भाषा: उद्भव एवं विकास यात्रा,’ विषयक व्याख्यान भी प्रस्तुत किया। डॉ. व्यास ने कई ग्रंथों का लेखन एवं सम्पादन किया है। इन्होंने राजस्थानी साहित्य अकादम की मासिक पत्रिका ‘जागती जोत’ का लगातार तीन वर्षों तक सम्पादन भी किया है। डॉ. व्यास को इस सम्मान दिए जाने पर कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएं देते हुए राजस्थानी भाषा और साहित्य की सतत् उन्नति के लिए कामना की है।

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Author: kalamkala

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