भरनावां में इफ्को के नैनो यूरिया के उपयोग को लेकर विचार गोष्ठी आयोजित,  किसानों को विशेषज्ञों ने दी लाभदायक जानकारियां

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परंपरागत यूरिया को छोड़कर नैनो यूरिया अपनाये किसान- बुरडक 
लाडनूं। इफको द्वारा ग्राम भरनावा में नैनो यूरिया के उपयोग पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस विचार गोष्ठी में क्षेत्र के कुल 300 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत समिति के पूर्व प्रधान जगन्नाथ बुरडक ले की। बुरड़क ने अपने सम्बोधन में किसानों से परंपरागत यूरिया को छोड़कर नैनो यूरिया अपनाने का आह्वान किया। कृषि विज्ञान केंद्र मौलासर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. अर्जुन सिंह जाट ने यूरिया से जल, मृदा व वायु प्रदूषण का जिक्र करते हुए कहा कि मात्र नैनो यूरिया से ही प्रकृति में होने वाले प्रदूषण से बचा जा सकता है। साथ ही नैनो यूरिया से किसान अपनी पैदावार व उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ा सकता है। नागोर जिले के सभी किसानों को नैनो यूरिया प्रयोग लेने की सलाह दी। सहायक निदेशक कृषि विस्तार कुचामनासिटी पन्ना लाल जाट ने किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत कृषि तकनीक के बारे में जानकारी दी तथा कृषि विभाग में चल रही योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। इफको मेडतासिटी के क्षेत्रीय प्रबंधक लाला राम चौधरी ने किसानों को खेती में काम आने वाले तत्वों के बारे में बताया। इस अवसर पर पशु चिकित्सा अधिकारी डा. महेंद्र चौधरी ने पशुओं में लंपी वायरस से बचाने के उपाय किसानों को बताए।
विश्व का अनूठा उर्वरक है नैनो यूरिया
इफको के वरिष्ठ प्रबंधक डॉ. एपी सिंह ने नैनो यूरिया के बारे में बताया कि यह विश्व का एक अनूठा उर्वरक है, जिसे किसानों की अपनी सहकारी संस्था इफको द्वारा पहली बार तैयार किया गया है। उन्होनें नैनो यूरिया की परंपरागत यूरिया से तुलना करते हुए बताया कि-
1. परंपरागत यूरिया जल जमीन व वायु तीनों को प्रदूषित करता है, जबकि नैनो यूरिया किसी तरह का प्रदूषण नहीं फैलाता है।
2. परंपरागत यूरिया मात्र 30 प्रतिशत पौधों के काम आता है, जबकि नैनो यूरिया 90 से 95 प्रतिशत तक पौधों के काम आता है।
3. परंपरागत यूरिया को बारानी खेतों में जहां सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, वहां प्रयोग में नहीं लिया जा सकता, जबकि नैनो यूरिया बारानी क्षेत्र में भी प्रयोग किया जा सकता है।
4. नैनो यूरिया परंपरागत यूरिया की एक बोरी से 10 प्रतिशत सस्ता है।
5. परंपरागत यूरिया में परिवहन व भंडारण खर्च अत्यधिक होता है, जबकि नैनो यूरिया में परिवहन व भंडारण खर्च नाम मात्र का होता है।
6. परंपरागत यूरिया की स्वदेशी प्लांटों द्वारा पूर्ण रूप से आपूर्ति नहीं हो पाती है तथा लगभग 35 प्रतिशत यूरिया विदेश से मंगवाना पड़ता है, जबकि नैनो यूरिया से विदेशों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।
7. परंपरागत यूरिया पर भारत सरकार प्रतिवर्ष लगभग एक लाख करोड रुपए सब्सिडी के रूप में वहन करती है जबकि नैनो यूरिया पर किसी तरह का सरकार पर सब्सिडी भार नहीं रहेगा।
ऐसे करें नैनो यूरिया के प्रयोग
उन्होंने किसानों द्वारा नैनो यूरिया के प्रयोग करने के बारे में बताते हुए कहा कि-
1. किसान भाई प्रति लीटर पानी में 2 से 4 एमएम नैनो यूरिया मिलाकर स्प्रे कर सकते हैं।
2. प्रयोग करने से पहले बोतल को अच्छी तरह हिला लंे।
3. छिड़काव के लिए सदैव ही फ्लैट फैन नोजल का प्रयोग करें।
4. छिड़काव सुबह या शाम के समय करें।
5. नैनो यूरिया का प्रयोग मात्र फसल पर छिड़काव के माध्यम से ही किया जा सकता है, अतः किसान भाई ड्रिप या खुले पानी के साथ ना बढ़ाएं।
6. पहला छिड़काव बुवाई के 30 से 35 दिन पर तथा दूसरा छिड़काव 45 से 50 दिन पर करना चाहिए।
7. किसान भाई नैनो यूरिया के प्रयोग के साथ बिजाई के समय दी जाने वाली उर्वरक पूर्व की भांति डीएपी, एनपीके, एसएसपी तथा यूरिया की पूरी मात्रा दें तथा उसमें कोई कटौती न करें तथा ऊपर से फसल में दी जाने वाली दानेदार यूरिया की आधी मात्रा का प्रयोग करें।
8. नैनो यूरिया का प्रयोग कृषि रसायनों, जल घुलनशील उर्वरकों, इफको सागरिका आदि के साथ मिलाकर किया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन इफको मेडता के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक लालाराम चौधरी द्वारा किया गया। अंत सभी आगंतुक अतिथियों व किसानों का आभार व्यक्त किया गया।

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Author: kalamkala

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