क्षेत्र के समस्त शिक्षकों ने विरोध जताते हुए निष्पक्ष जांच के लिए दिया ज्ञापन
लाडनूं। क्षेत्र के सम्पूर्ण शिक्षक समुदाय ने एकजुट होकर सांवराद प्रकरण में यहां उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देकर एफआईआर सं. 0131/08.08.2022 को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सांवराद के अध्यापक सांवरमल शर्मा व रामनिवास जाट के विरुद्ध लगाए गए झूठे आरोप के संबंध में निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। ज्ञापन में आठ बिन्दुओं में बताया गया है कि जसवंतगढ़ थाने में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सांवराद में कार्यरत सांवरमल शर्मा और रामनिवास जाट अध्यापक के खिलाफ झूठा एवं मनगढ़ंत आरोप लगाया गया है। इन अध्यापकों द्वारा बच्चे को बुरी तरह पीटने और उठक-बैठक निकलवाने के आरोप निराधार है, क्योंकि यह बालक 19 जुलाई से लगातार अनुपस्थित चल रहा है।
पांच साल से चल रही थी मस्तिष्क की दवाएं
दूसरे अन्य बिन्दु में बताया गया है कि बालक को पीटकर मानसिक रूप से विक्षिप्त कर देने का आरोप भी गलत है, क्योंकि बालक को लगभग पिछले 5 वर्षों से मिर्गी या मानसिक रोग की दवाई चल रही है। इसकी आवश्यकता पड़ने पर कार्यालय को प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत कर दिया जाएगा। वादी द्वारा 1 अगस्त को विद्यालय में बच्चे को पीटने की बात ही सरासर गलत है, क्योंकि उस दिन बच्चा विद्यालय में उपस्थित ही नहीं था। इसी प्रकार 2 अगस्त को विद्यालय में जाने पर अध्यापकों द्वारा गाली-गलौज करने की बात भी गलत है, शिक्षक सांवरमल शर्मा से 8 अगस्त से पूर्व वादी की मुलाकात भी नहीं हुई थी।
केवल साजिश के सिवा कुछ भी नहीं
ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि 1 अगस्त को वादी ने संपर्क पोर्टल पर उक्त शिक्षकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सांवरमल शर्मा अध्यापक का नाम उल्लेख नहीं किया गया है, बल्कि इसमें अन्य शिक्षक रामनिवास जाट, प्रधानाचार्य चंद्र सिंह तथा वरिष्ठ अध्यापक ओमप्रकाश के नामों का उल्लेख किया गया है। 8 अगस्त को 3 घंटे तक वादी को झूठा मुकदमा दर्ज नहीं करने बाबत लगभग 15-20 व्यक्तियों की मौजूदगी में समझाया गया जिसमें वादी के साथ आये एक व्यक्ति ने इन शिक्षकों से मामले को निपटाने के लिए रुपयों की मांग की गई। ज्ञापन में उलटा यह आरोप भी लगाया गया है कि वादी ने पूर्व में भी झूठे आरोप लगाकर रूपये ऐंठने का कार्य किया है और कई झूठे मामले भी दर्ज करवाए, जिनमें से एक ससी-एसटी मामले में अभी एफआर लगी है। ज्ञापन में इसी प्रकार तथ्य अंकित करने व साक्ष्य प्रस्तुत करने का भरोसा दिलाते हुए इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर शिक्षक वर्ग को राहत प्रदान करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।







