भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए पंच प्रण आत्मसात करें- प्रो. दूगड़, जैविभा विश्वविद्यालय में 78वां स्वाधीनता दिवस धूमधाम से मनाया

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भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए पंच प्रण आत्मसात करें- प्रो. दूगड़,

जैविभा विश्वविद्यालय में 78वां स्वाधीनता दिवस धूमधाम से मनाया

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि स्वाधीनता दिवस पर हमें अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य के बारे में चिंतन करना चाहिए। भारत 2500 वर्ष पूर्व तक इकोनोमिकल, इंटेलेक्चुअल और स्प्रिचुअल पावर था। आज भी दुनिया की बड़ी कम्पनियों के अध्यक्ष भारतीय हैं। हमें गर्व होना चाहिए कि टैलेंट हंट के लिए कम्पनियां भारत आती हैं। दुनिया की बड़ी कम्पनियों में भारतीयों का निवेश है। देश सोलर एनर्जी की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने यहां विश्वविद्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि डबल्यूएचओ में भारत की स्वीकृति व प्राथमिकता से ट्रेडिशनल मेडिसिनल केन्द्र स्थापित हुआ है और इसका केन्द्र भारत को माना गया है। मार्क जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स ने भारत के नीम करौली बाबा के पास आकर नवीन ऊर्जा प्राप्त की और बताया कि यहां आकर हताशा-निराशा से मुक्ति मिलती है। प्रो. दूगड़ ने कहा कि हमारी थाती ऐसी है कि इसमें अनेक बिंदु लोगों को नई ऊर्जा देने में सक्षम हैं।

इक्कीसवीं सदी भारत की है

उन्होंने कहा कि 19वीं सदी मैकाले की थी, 20वीं मार्क्स की और 21वीं सदी भारत की रहेगी। हम किसी देश को मिलाने, उसकी सीमाओं पर कब्जा करने में भरोसा नहीं करते, बल्कि सह अस्तित्व पर निर्भर हैं और ‘विश्वगुरु’ बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम सह सकते हैं, लेकिन कमजोर नहीं हैं। जिस नाग की पूजा हम नागपंचमी को करते हैं, नागयज्ञ में उनकी आहुति भी देते हैं। महिला शक्ति की समानता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब ब्रिटिश में महिला को चुड़ैल समझ कर शिकार किया जाता था, तब भारत में अहिल्याबाई जैसी शासन करती थी। भारत में महिलाएं पुरुषों के साथ शास्त्रार्थ करती थी और यही नहीं वे ज्यूरी की भूमिका में भी होती थी। उन्होंने याज्ञवल्क्य और गार्गी, मंडन मिश्र की पत्नी के उदाहरण भी दिए और कहा कि इस देश का कोई मुकाबला नहीं कर सकता। हमें अपनी विरासत पर गर्व है।

पंच प्रण को आत्मसात् करें

इस अवसर पर उन्होंने भारत में पहली बार आयुध निर्माण, राकेट उत्पादन आदि का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ‘पंच प्रण’ का उल्लेख भी किया और उन्हें स्मृति में रखने व श्रम पूर्वक भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए पंच प्रण को आत्मसात कर आगे बढ़ें। कार्यक्रम में कुलपति ने झंडारोहण किया और एनसीसी द्वारा प्रस्तुत परेड की सलामी ली। रजिस्ट्रार डा. अजयपाल कौशिक, प्रो. जिनेन्द्र कुमार जैन व प्रो. बीएल जैन मंचस्थ रहे। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की छात्राओं ने अपनी सुंदर प्रस्तुतियां दी। सुनीता काजला का गीत, कंचन के मारवाड़ी में प्रस्तुत विचार एवं मुमुक्षु प्रियंका व प्रिया शर्मा के गीत को सभी ने सराहा। कार्यक्रम में सभी विभागों के संकाय सदस्य, स्टाफ सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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Author: kalamkala

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