10 लाख रुपए और कार नहीं दे पाने पर पत्नी को मारपीट कर घर से निकाला,
यह है पढ़े-लिखे परिवारों की व्यथा, लाडनूं पुलिस कर रही है मामले की जांच
लाडनूं (kalamkala.in)। मेरे पति प्रदीप ने कहा, ‘तु मुझे तलाक दे दे, मैं दूसरी शादी करूंगा एवं अगर मेरे साथ रहना है, तो 10 लाख रूपये व एक कार की मांग पूरी कर दे।’ इसके बाद मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया। – ये वाक्यांश है उस रिपोर्ट के, जो एक दहेज-पीड़िता ने अपने पति सहित सभी ससुरालियों पर दहेज-प्रताड़ना, मानसिक व शारीरिक रूप से तंग-परेशान और पीड़ित करने तथा अंत में रोजमर्रा की मारपीट के बाद घर से ही निकाल डाला। यह पढ़े-लिखे परिवार की व्यथा है। लोग कहते हैं कि लड़की-लड़के को पढ़ाओ, पढ़ी-लिखी लड़की स्वयं दहेज होती है। यह दहेज पीड़िता पढ़ी-लिखी है और आर.ए.एस. परीक्षा की तैयारी कर रही थी, लेकिन ससुराल वालों ने परीक्षा से वंचित कर दिया। पति खुद सरकारी शिक्षक है, लेकिन फिर भी दहेज की घृणित सोच को पालना उसकी कैसी मजबूरी कही जा सकती है, यह तो एक सोचा-समझा अपराध प्रतीत होता है।
शादी के बाद से ही चलती रही 10 लाख नकद व कार की मांग
यह रिपोर्ट गायत्री ईनाणियां (30) पत्नी प्रदीप राहड़ पुत्री जगदीश प्रसाद ईनाणियां जाति जाट निवासी गाढ़ा बास, डीडवाना, हाल उत्तरादा जाटों का बास, लाडनूं द्वारा अभियुक्तों अपने पति प्रदीप राहड़ पुत्र हनुमानराम, श्वसुर हनुमानराम पुत्र स्व. बालाराम, सास उषा देवी पत्नी हनुमानराम, जेठ नवदीप पुत्र हनुमानराम, जेठानी सरोज पत्नी नवदीप समस्त जाति जाट, निवासी गाढ़ा बास, डीडवाना के खिलाफ पुलिस को दी गई है। इसमें बताया है कि उसका विवाह प्रदीप राहड़ के साथ 9 फरवरी 2023 को हुई थी। उसके घर वालों ने उस समय स्त्रीधन के रूप में अपनी हैसियत के अनुसार सभी सामान, उपहार, जेवरात, नगदी, कपड़े आदि दिए, जिन्हें अभियुक्तों को बतौर अमानत संभलाए गए। उसे ससुराल में प्रथम दिन से ही दहेज की मांग को लेकर तंग व परेशान किया जाने लगा तथा नाना प्रकार के ताने कसे जाने लगे। कहा गया, ‘तुम तो भूखे घर की हो तुम्हारे मां-बाप की हैसियत हमारे व हमारे नातेदारों व रिश्तेदारों के सामने कुछ नहीं है। तुम्हारे घरवालों ने तुम्हे कुछ नहीं दिया है।’ तथा ‘प्रदीप सरकारी अध्यापक है, इसलिये हमारे स्तर के अनुसार शादी नहीं की। कम से कम हमें 10 लाख रूपये नगद व एक कार दहेज में लाकर दो, अन्यथा हम तुम्हे़ इस घर में नहीं रखेंगे।’
खाना नहीं दिया और नौकरानी जैसा किया व्यवहार
इसके बाद सभी ससुराली अभियुक्तों ने हमेशा दहेज की मांग को लेकर उसे तंग व परेशान करते रहे। धीरे-धीरे वे ज्यादा क्रूरतापूर्ण व्यवहार करने लगे और दहेज में दस लाख रूपये नगदी व एक कार की मांग करने लगे। जून 2023 में वह वापिस ससुराल गई तो उनकी वहीं मांग फिर दोहराई जाती रही। उसे प्रताड़ित करने एवं गालियां निकालने का उनका रोज का काम हो गया। उसका पति कहता कि ‘मुझे दस लाख रूपये व एक कार की उम्मीद थी, लेकिन तुम्हारे घरवालों ने मुझे दस लाख रूपये व कार दहेज में नहीं दी। एवं कहता, मैं अध्यापक हूं और उसके साथ मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ना करता एवं गाली-गलौच करता एवं उसको ससुराल में समय पर खाना तक खाने नहीं दिया जाता एवं उसके साथ नौकरानी के जैसा बरताव करते।
स्त्री धन देने से इंकार व मारपीट प्रताड़ित कर घर से निकाला
इसकी जानकारी अपने पिता व घरवालों को दी, तो वे समझाने के लिये गये, लेकिन सभी अभियुक्तगण दहेज के लिये अड़े रहे। पीड़िता का 1 अक्टूबर 2023 को आर.ए.एस प्री का एक्जाम था, जो अभियुक्तों ने उसे नहीं देने दिया और ज्यादा तंग परेशान करने लगे। इस पर पीड़िता के पिता व गिरधारी ईनाणिया पर उसके ससुराल गये एवं अभियुक्तों को बहुत समझाईश की, परन्तु वे फिर भी अपनी दहेज की अनुचित मांग पर अड़े रहे। इसके बाद 2024 में ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय एक महीने ससुराल में रहने पर भी पीड़िता को सभी ने दहेज की मांग को लेकर तंग परेशान किया। इसके बाद दीपावली के अवकाश पर वापिस ससुराल गई एवं उसने अपने पति, सास, ससुर, जेठ, जेठाणी से अपने गहने मांगे तो सभी ने स्त्रीधन देने से इन्कार कर दिया एवं लडाई-झगड़ा करके कहा कि ‘हम तुम्हारा प्रदीप से तलाक करवाकर प्रदीप का विबाह दूसरी जगह करेगे’ एवं पति प्रदीप ने भी कहा कि, ‘तु मुझे तलाक दे दे, मैं दूसरी शादी करूंगा एवं अगर मेरे साथ रहना है तो 10 लाख रूपये व एक कार की मांग पूरी कर दे।’ फिर उसके साथ मारपीट कर घर से निकाल दिया। पुलिस ने इस रिपोर्ट को धारा 85 व 316(2) बीएनएस के तहत दर्ज किया है। मामले की जांच सीआई महीराम बिश्नोई स्वयं कर रहे हैं।






