रामचरितमानस धार्मिक ग्रंथ के साथ जीवन को आदर्श, सद्नीति और धर्माचरण से जोड़ने वाली अनमोल धरोहर- संत अमृतराम जी महाराज,
लाडनूं की श्री रामआनंद गौशाला में अभूतपूर्व आयोजन, रामचरित मानस नवाह्न पारायण का संतश्री क्षमारामजी महाराज के सान्निध्य में नौ दिवसीय कार्यक्रम भक्तिभाव से सम्पन्न


लाडनूं (kalamkala.in)। स्थानीय श्री रामआनंद गौशाला में सिंहस्थल पीठाधीश्वर संतश्री क्षमारामजी महाराज के सान्निध्य में नौ दिन चले श्री रामचरित मानस नवाह्न पारायण कार्यक्रम के समापन पर अपने प्रवचन में रामस्नेही संतश्री अमृतारामजी महाराज ने कहा कि रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि जीवन को आदर्श, सद्नीति और धर्माचरण से जोड़ने वाली अनमोल धरोहर है। इसके श्रवण मात्र से ही मनुष्य के भीतर शांति और करुणा का संचार होता है। इस अवसर पर संयोजक हनुमानमल जांगीड़ ने कार्यक्रम को लाडनूं नगर की धार्मिक परंपरा को एक नया आयाम देने वाला बताया और कहा कि यह शहर का अपनी तरह का पहला और ऐतिहासिक कार्यक्रम है। रामचरित मानस पारायण के अंतिम दिवस पूजन-अर्चन आयोजन में यजमान के रूप में हनुमानमल जांगीड, सुशील कुमार पीपलवा, हंसराज सोनी, नीतेश माथुर, महेश जाजू, नारायण झंवर व सुरेश चौहान सपत्नीक उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती भी उतारी। इस अवसर पर इस कार्यक्रम की आयोजन समिति का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में संत श्री क्षमारामजी महाराज के श्रीमुख से मानस के पावन श्लोक गूंजने से पूरा वातावरण भक्तिभाव से सराबोर गया। इस अवसर पर विनोद पटावरी, राजेश चौहान, अजय चौहान, नारायण प्रसाद झंवर, सुरेश जाजू, पूसराज सोनी, नंदकिशोर चौहान, शिवशंकर बोहरा, सुशील पीपलवा, डाॅ. वीरेन्द्र भाटी मंगल, हंसराज सोनी, सीताराम गौतम, निर्मला जांगीड, शारदा पीपलवा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की उपस्थिति बड़ी संख्या ने रह।





