कुचेरा में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की रात को मुस्लिम कौम के लोगों ने ताजियों का जुलूस निकाला। ढोल-ताशों पर मातमी धुनें बजाई।

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कुचेरा में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की रात को मुस्लिम कौम के लोगों ने ताजियों का जुलूस निकाला। ढोल-ताशों पर मातमी धुनें बजाई।

कुचेरा न्यूज़ रिपोर्टर महबूब खोखर

कुचेरा इस्लामिक साल के पहले महीने मोहर्रम में पैगंबर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की रात को मुस्लिम कौम के लोगों ने ताजियों का जुलूस निकाला। ढोल-ताशों पर मातमी धुनें बजाई।
कुचेरा क्षेत्र में अमन व शांति से आपसी सहयोग और भाईचारे के साथ ढोल ताशे के साथ निकाला गया ताजिया । ढोल ताशे से निकलती हुई मातम भरी आवाज़ लोगो को आज भी कर्बला की याद दिला देती है ।
मोहर्रम ( ताजिया) का जुलूस , इमाम बाड़े से शुरू होकर क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से बड़ा बाजार , शहीद सुलेमान शाह र.अ की दरगाह , बड़ा बाजार , छोटा बाजार ,छिम्पो की मस्जिद , सदर बाजार , कायमखानी मोहल्ला व नगर पालिका क्षेत्र से होते हुए कर्बला पहुंचा ।
इस दौरान कुचेरा के पीर साहब सैय्यद शाहिद हुसैन , सैय्यद मोहम्मद अली , सैय्यद अल्ताफ अली , सैय्यद इश्तेखार , सैय्यद मुजाहिद अली , मोहम्मद साबिर , इसाक मोहम्मद , मोहम्मद रशीद (भुर जी), अब्बास सिलावट, मांगीलाल लोहार, शाहरुख पठान व समाजसेवी फिरोज़ खान पठान आदि गणमान्य उपस्थित रहे ।
ताजिये के जुलूस में सर्वसमाज तथा कुचेरा थानाधिकारी विमला चौधरी मय जब्ता सभी मार्गो पर उपस्थित रहा जिसके लिए
मीडिया से रूबरू होते हुए फ़िरोज़ पठान ने सभी का आभार व्यक्त किया तथा बताया की,
हज़रत इमाम हुसैन इंसाफ और हक़ की खातिर अपने पूरे परिवार सहित शहीद हो गए थे। उनका काफ़िला बहुत छोटा था , और यजीदी लाखो में थे।
उन्ही की याद में ये मातमी त्योहार हर साल मनाया जाता है।

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Author: kalamkala

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