परिवार के भरण-पोषण के लिए किए जाने वाले गलत आचररण वाले कर्मों का फल आदमी कै अकेले ही भोगना पड़ता है- आचार्यश्री महाश्रमण, अणुव्रत कार्यकर्ता प्रशिक्षण सम्मेलन का आयोजन

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परिवार के भरण-पोषण के लिए किए जाने वाले गलत आचररण वाले कर्मों का फल आदमी कै अकेले ही भोगना पड़ता है- आचार्यश्री महाश्रमण,

अणुव्रत कार्यकर्ता प्रशिक्षण सम्मेलन का आयोजन

लाडनूं (kalamkala.in)। तेरापंथ धर्मसंघ के अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण ने अपनी दैनिक प्रवचन सभा में ‘बंधुजन का असहयोग’ विषय को विवेचित करते हुए कहा कि धर्म एक महान तत्त्व है। धार्मिक जगत में कई सिद्धांत भी मिलते हैं। कर्मवाद का सिद्धांत धार्मिक जगत से प्राप्त होता है। कर्म उसी को फल देता है, जिसे उस कर्म को किया है, क्योंकि कर्म कर्ता का ही अनुगमन करता है। उन्होंने कहा कि संसार में आदमी अपने परिवार के लिए कर्म करता है। आदमी सभी कर्म अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए करता है। कोई-कोई आदमी गलत आचरणों, यथा चोरी, झूठ, डकैती, लूट, हत्या आदि कर्म भी करता है। ऐसे किए हुए कर्मों का तो फल भी उसे ही भोगना होता है। जब उस पापकर्म का उदयकाल आता है तो उन कर्मों का फल भोगने में परिवार का कोई सदस्य साथ नहीं निभाता। सारे बंधु दूर हो जाते हैं। इसलिए आदमी को यह ध्यान देने का प्रयास करना चाहिए कि आदमी कर्मवाद के सिद्धांत को जानकर पाप कर्मों से बचने का प्रयास करना चाहिए।

आदमी को पापकर्मों से बचने का प्रयास करना चाहिए

आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि दुनिया में स्वार्थ चलता है। स्वार्थ होता है तो आदमी एक-दूसरे के निकट आता है और जब स्वार्थ समाप्त हो जाता है तो सब उससे दूर हो सकते हैं। आदमी अपने स्वार्थ सिद्धि को देखता है। इसलिए आदमी को यथासंभव पापकर्मों से बचने का प्रयास करना चाहिए। वैसे तो आदमी जो भी कार्य करे, पाप कर्म अथवा पुण्यकर्म करे, बंधन तो होता ही है। सभी का अपना-अपना पुण्य-पाप होता है। हालांकि पुण्यकर्मों का अच्छा फल मिलता है और पापकर्मों का बुरा फल प्राप्त होता है। इसलिए आदमी को जहां तक संभव हो धर्म के पथ पर चलने का प्रयास करना चाहिए। प्रवचन के बाद आचार्यश्री ने चारित्रात्माओं की जिज्ञासाओं को भी समाहित किया।

अणुव्रत कार्यकर्ता प्रशिक्षण सम्मेलन का पंचदिवसीय आयोजन

इसी अवसर पर अणुव्रत कार्यकर्ता प्रशिक्षण सम्मेलन का पंचदिवसीय आयोजन हुआ। इस संदर्भ में अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के अध्यक्ष प्रतापसिंह दुगड़ व मंत्री मनोज सिंघवी ने अपनी अभिव्यक्ति दी। मंगलवार को तेज हवा व बरसात के कारण आचार्य श्री महाश्रमण ने अपना प्रवचन कार्यक्रम अपने प्रवास स्थल महाश्रमण विहार में ही समायोजित किया।

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Author: kalamkala

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