लाडनूं की सबसे बड़ी ज्वलंत समस्या-  एक बार फिर आग की लपटों और जहरीले धुएं से घिरा लाडनूं का डम्पिंग यार्ड, लोगों की बढी परेशानियां, दमकल टीम आकर बार-बार आग तो बुझा देती है, लेकिन पीड़ित लोगों की कौन सुध लेगा? डम्पिंग यार्ड से उपजी समस्याओं से कब मिलेगी लाडनूं को निजात

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लाडनूं की सबसे बड़ी ज्वलंत समस्या- 

एक बार फिर आग की लपटों और जहरीले धुएं से घिरा लाडनूं का डम्पिंग यार्ड, लोगों की बढी परेशानियां,

दमकल टीम आकर बार-बार आग तो बुझा देती है, लेकिन पीड़ित लोगों की कौन सुध लेगा? डम्पिंग यार्ड से उपजी समस्याओं से कब मिलेगी लाडनूं को निजात

लाडनूं (kalamkala.in)। लाडनूं के डम्पिंग यार्ड में फिर आग लग गई, जिसे काबू में लेने और बुझाने के लिए केवल लाडनूं ही नहीं बल्कि सुजानगढ़ से भी दमकल गाड़ी को बुलाना पड़ा। यहां कचरे में आग लगने से चारों तरफ हड़कंप सा मच गया। प्रशासन भी इस आग की सूचना मिलने पर अलर्ट मोड में आ गया। पुलिस थाना लाडनूं के थानाधिकारी शम्भुदयाल मीणा ने तत्काल इसकी सूचना उपखंड अधिकारी ममता लहुआ को दी। इस आग पर काबू पाने के लिए सुजानगढ़ से दमकल बुलाई गई। दमकल की तत्परता से इस आग पर काबू पाया जा सका। आग को नियंत्रित करने के लिए अग्निशमन दल को खासी मेहनत करनी पड़ी, तब कहीं जाकर डंपिंग यार्ड में लगी आग को बुझाया जा सका और यहां संभावित बड़ा हादसा टल गया। इस डंपिंग यार्ड में बार-बार आग लगने और साल में कई बार कचरा जलने की घटनाएं सामने आई हैं। अब आग पर तो काबू पा लिया लेकिन इससे सभी रहवासियों की बढी परेशानियों की सुध कौन लेगा? यह सवाल हर बार खड़ा होता है।

बार-बार उठने वाले जहरीले धुएं से त्रस्त हुए सभी नागरिक

यहां शहर भर के कचरे को डाले जाने के लिए मंगलपुरा के पास की पत्थरों की खदान ‘राती खान’ को नगर पालिका को डम्पिंग यार्ड के रूप में उपयोग किए जाने के लिए आवंटित की गई थी। जब से यहां डम्पिंग यार्ड बना है, तब से आसपास के रहवासियों के लिए यह एक बड़ी मुसीबत बन चुका है। यहां कचरे के निस्तारण के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं होने से डाला जाने वाला कचरा समस्या बन गया है। यहां ऑटो टीपर वाले कचरे को खान की गहराइयों में उतर कर कचरा डालने के बजाय वहां बाहर ही आसपास में ही खाली कर लौट जाते हैं। इस स्थिति में यह शहर भर की गंदगी वहां हवा के झोंकों के साथ उड़-उड़ कर लोगों के घरों में चली जाती है। यही नहीं उस गंदगी के उड़ने से वहां रहवासियों को सांस और एलर्जी की तकलीफ़ भी उठानी पड़ रही है। और तो और इस डम्पिंग यार्ड में बार-बार आग लगने की घटनाएं भी लगातार सामने आई हैं। यहां पड़े कचरे में आग लगने के कारण यहां से निष्कासित जहरीला धुआं भी लोगों के लिए भारी मुसीबत बना हुआ है। इस कचरे में प्लास्टिक व पॉलीथिन बहुतायत से होता है। इसके साथ ही शहर भर में फेंकी गई खराब दवाएं, विभिन्न अस्पतालों का अपशिष्ट, फल-सब्जियों का कचरा, पशुवध गृहों व मांस व्यापारियों के अवशिष्ट, पक्षियों के पंख आदि के साथ अनगिन प्रकार के अपशिष्ट होते हैं, जिनका निस्तारण बस्तियों से बहुत दूर किया जाता है और उसके विभिन्न नियम भी हैं। इसके बावजूद यहां लाकर डाले गए इस कचरे के जलने से पूरा क्षेत्र दूषित हवा और जहरीले धुएं से घिर जाता है। लगातार हो रही इस स्थिति के कारण आमजन बेहद परेशान हैं। यह ज़हरीला धुआं पास के हाईवे पर भी फैल जाता है, जिससे वाहन चालकों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

प्रशासन ले पूरी सुध, नकेल कसे सभी कार्मिकों की, शहर को भी सुधारे

प्रशासन की जानकारी में सारे हालात होते हुए भी इस समस्या के हल के लिए कोई सक्षम कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस डम्पिंग यार्ड में ठोस कचरा के निस्तारण के लिए संयंत्र लगा हुआ है, लेकिन उसका कोई भी उपयोग नहीं किया जा रहा है। बरसों से यह संयंत्र यहां धूल फांक रहा है। इस मशीन के संचालन के लिए बिजली का कनेक्शन भी लिया गया और कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं मिल सका। पिछले पालिका मंडल के दौरान भी यह डम्पिंग यार्ड समस्या बन कर बार-बार उभरा था और जेसीबी मशीनों को लगाया जाकर यहां बाहर डाला गया पूरा कचरा खान के अंदर डाला गया। डम्पिंग यार्ड के चारों तरफ दीवार भी बनाई गई, ताकि कचरा उड़ कर बाहर नहीं आए। यार्ड पर कर्मचारी लगा कर बाहर कचरा डालने वाले आटो टीपर चालकों को पाबंद करने के साथ ही निगरा नी की समुचित व्यवस्था की गई थी। इन सबके बावजूद यहां व्यवस्थाओं में कोई सुधार आता नजर नहीं आ रहा। प्रशासन को अपने कर्मचारियों, ऑटो टीपर चालकों आदि पर पूरी सख्ती करनी होगी, तभी स्थिति पर नियंत्रण किया जा सकेगा। लाडनूं में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र करने की सुविधा भी नहीं है। कभी लोगों को दुकानों, अस्पतालों आदि में अलग-अलग रंगों के कचरा पात्र इनके लिए नि:शुल्क आवंटित भी किए थे, लेकिन कब उनका कोई अता-पता तक नहीं है। पालिका प्रशासन को एक अभियान चला कर शहर के सभी दुकानदारों, व्यवसायियों और नागरिकों को इस बारे में प्रशिक्षित भी करना चाहिए। बिना कड़ाई के समस्याओं से छुटकारा नहीं पाया जा सकता। डम्पिंग यार्ड के आसपास बसे लोगों के स्वास्थ्य की नियमित जांच की व्यवस्था भी होनी जरूरी है। यहां से अस्पताल व सभी चिकित्सकीय सुविधाएं बहुत दूर पड़ती हैं। इनके घर-घर जाकर स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाएं उपलब्ध करवाई जानी जरूरी हैं। उम्मीद है कि प्रशासन इस तरफ भी पर्याप्त ध्यान अवश्य देगा।

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Author: kalamkala

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