लाडनूं के एक्सीडेंट पॉइंट बने करंट बालाजी चौराहे का एनएचएआई के अधिकारियों ने देखा मौका लोगों में जगी समस्या समाधान की उम्मीद, अब तक अनगिन हादसों में हुई अनेक मौतें

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लाडनूं के एक्सीडेंट पॉइंट बने करंट बालाजी चौराहे का एनएचएआई के अधिकारियों ने देखा मौका

लोगों में जगी समस्या समाधान की उम्मीद, अब तक अनगिन हादसों में हुई अनेक मौतें

लाडनूं (शंकर आकाश)। यहां लगातार सड़क दुर्घटनाओं और मौतों के केन्द्र बने करंट बालाजी चौराहे पर ब्रिज, अंडर पास, सर्किल और डिवाइडर बनाने की मांग लम्बे समय से की जाती रही है। हाल ही में लोगों ने भाजपा के नेतृत्व में सड़क पर बैठ कर विरोध प्रदर्शन किया था और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। अब इस समस्या के हल की उम्मीद लोगों में जगी है। बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने यहां आकर मौका देखा और पुलिस अधिकारी सीआई राजेन्द्र सिंह चारण से पूरी जानकारी प्राप्त की। यहां पर होनेवाली दुर्घटनाओं को रोकने की योजना के बारे में इस टीम को थानाधिकारी राजेंद्र सिंह कमाण्डो ने हादसों की जानकारी के साथ ही समस्या निवारण के सुझाव भी अधिकारियों को दिए। एनएचआई के अधिकारी आरएस त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने मौका निरिक्षण किया है।यहां हो रही दुर्घटनाएं चिंताजनक है। इनकी रोकथाम के लिये वे अपनी रिपोर्ट बनाकर शीघ्र ही प्रस्तुत करेंगे और उसके अनुसार उचित कार्रवाई अवश्य की जाएगी।

विधायक और भाजपा की ओर से किए गए प्रयास

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों यहां एक दुर्घटना में एक दंपति की मौत होने के बाद भाजपा के जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह ओड़ींट के नेतृत्व में भाजपा के कार्यकताओं ने आमजन के साथ इस चौराहे पर धरना-प्रदर्शन किया था और ज्ञापन में उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण दिल्ली के अधिकारियों को भी वस्तुस्थिति से अवगत करवाया था। वहीं उन्होंने सम्बंधित केन्द्रीय मंत्री को भी इस समस्या के समाधान बाबत लिखा था। पंचायत समिति सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में विधायक मुकेश भाकर ने भी इस समस्या को गंभीर मानते हुए हाईवे के अधिकारियों से फोनवार्ता करके इस समस्या के शीघ्र समाधान के लिए कहा था।

शीघ्र किया जाएगा समाधान

एनएचएआई दिल्ली के अधिकारी आरएस त्रिपाठी ने मौके पर मौजूद लोगों को बताया कि इस समस्या का समाधान शीघ्र ही किया जायेगा। मालूम हो कि अब तक इस चौराहे पर करीब 31 जानें जा चुकी है तथा सैंकड़ों लोग घायल हो चुके हैं।

kalamkala
Author: kalamkala

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