अजमेर की आनासागर झील को किया जा रहा है लुप्त- आनासागर के लिए कमेटी पर कमेटी बना कर भी समस्या का हल होता नहीं दिख रहा, ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ में 2014 के बाद हुए अवैध कब्जों को कब तक हटाया जाएगा और कौन हटाएगा, धर्मेश जैन ने की आनासागर की भराव क्षमता पुनः 16 फिट की जाने की मांग

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अजमेर की आनासागर झील को किया जा रहा है लुप्त-

आनासागर के लिए कमेटी पर कमेटी बना कर भी समस्या का हल होता नहीं दिख रहा,

‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ में 2014 के बाद हुए अवैध कब्जों को कब तक हटाया जाएगा और कौन हटाएगा,

धर्मेश जैन ने की आनासागर की भराव क्षमता पुनः 16 फिट की जाने की मांग

(एसपी मित्तल, ब्लाॅगर व अन्य)
अजमेर। अजमेर के बीचो बीच बनी प्राकृतिक झील आनासागर को भू माफियाओं से बचाने के लिए हाईकोर्ट ने झील संरक्षण कमेटी बना कर रिपोर्ट तलब की है। हाईकोर्ट की इस कमेटी के निर्देश पर अजमेर प्रशासन अभी रिपोर्ट तैयार कर रही रहा है कि अब राज्य सरकार के स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. जोगाराम ने सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर भूपेंद्र माथुर के नेतृत्व में एक और कमेटी बना दी है। इस कमेटी के सदस्य भी अजमेर आकर जांच पड़ताल कर रहे हैं। इससे पहले भी आनासागर को लेकर अनेक जांच कमेटियां बनी, लेकिन आज तक भी आनासागर को भू माफियाओं के चंगुल से नहीं बचाया जा सका। 10 नवंबर को भी भूपेंद्र माथुर वाली कमेटी जब आना सागर का भ्रमण कर रही थी, तब भी भराव क्षेत्र में मिट्टी डाल कर आनासागर को छोटा किया जा रहा था। कमेटी पर कमेटी बनाते रहने का तर्क समझ से परे है।

क्या काम आएगी डा. समित शर्मा की गंभीरता
गजट में प्रकाशित ‘नो कंस्टक्शन जोन’ आदेशों की उड़ी धज्जियां

जनवरी 2014 में आनासागर के भराव क्षेत्र को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया गया था। इस आदेश का गजट नोटिफिकेशन भी हो चुका। ऐसे में जनवरी 2014 के बाद हुए अवैध निर्माण टूटने ही चाहिए थे। जिला प्रशासन से लेकर सभी जांच कमेटियों के पास 2014 से लेकर 2022 तक की सैटेलाइट इमेज है। इससे आसानी से पता चल सकता है कि 2014 के बाद से अब तक कितना अवैध निर्माण हुआ है। जांच करने के बजाए अवैध निर्माणों को तत्काल प्रभाव से तोड़ा जाए। अजमेर के लोगों को हाईकोर्ट द्वारा बनाई गई झील संरक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ. समित शर्मा (आईएएस) पर बहुत भरोसा है। डॉ. शर्मा ने जनवरी 2014 और नवंबर 2022 की सैटेलाइट इमेज भी तैयार कर ली है। डॉ. शर्मा को अब जिला प्रशासन की रिपोर्ट का इंतजार है। हो सकता है कि रिपोर्ट मिलने के बाद आनासागर के भराव क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों पर सख्त कार्यवाही हो। डॉ. समित शर्मा आनासागर के भराव क्षेत्र से अवैध कब्जों को हटाने को लेकर बेहद गंभीर हैं।

यूआईटी के पूर्व चैयरमेन धर्मेश जैन ने उठाया मुद्दा
आनासागर झील की भराव क्षमता 16 फिट हो

अजमेर यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष और आनासागर बचाओ समिति के अध्यक्ष धर्मेन्द्र जैन ने मांग की है कि आनासागर की भराव क्षमता को पुनः 16 फिट किया जाए। झील संरक्षण समिति के प्रमुख डॉ. समित शर्मा और जिला कलेक्टर अंशदीप को लिखे पत्र में जैन ने बताया कि 1975 तक आनासागर की भराव क्षमता 16 फिट थी। 16 फिट भराव क्षमता होने के कारण आनासागर के चारों तरफ पानी भरा रहता था। यही वजह थी कि भराव क्षेत्र में अवैध निर्माण भी नहीं हो पा रहे थे। लेकिन, भू माफियाओं और अधिकारियों की आपसी मिलीभगत के कारण आनासागर की भराव क्षमता को 13 फिट कर दिया। इससे भराव क्षेत्र खाली रहने लगा और भू माफियाओं ने अवैध निर्माण कर लिए। अब तो आनासागर के भराव क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां भी धड़ल्ले से हो रही है। जैन ने पत्र में आग्रह किया है कि आनासागर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए राजस्व विभाग, नगर निगम, अजमेर विकास प्राधिकरण, स्मार्ट सिटी आदि विभागों का सहयोग लिया जाए। उन्होंने 1947 से अब तक के राजस्व रिकॉर्ड की जांच-पड़ताल कराने की मांग भी की है। पत्र में कहा गया कि उन अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए, जिन्होंने भराव क्षमता को 16 फिट से घटाकर 13 फिट किया है। यदि आनासागर में 16 फिट तक पानी भरा जाता है, तो अवैध कब्जों की समस्या भी हल हो जाएगी।

लगातार सिमटती जा रही है ऐतिहासिक आनासागर झील

अजमेर की सुंदरता को चार चांद लगाने वाली मानव निर्मित आना सागर झील सिमटती जा रही है। झील के चारों तरफ अतिक्रमण किया जा रहा है। झील तक पानी लाने वाले बरसाती नाले भी अतिक्रमण का शिकार हैं। झील के आस-पास पाथ-वे बनाने की आड़ में अतिक्रमण को प्रश्रय दिया जा रहा है। भू माफिया मिट्टी डालकर झील को कब्जाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। आनासागर झील के संरक्षण का मुद्दा विधानसभा में भी उठा चुका है। अजमेर की प्यास बुझाने के लिए बनी ऐतिहासिक मानव निर्मित झील पिछले 59 वर्षों से उपेक्षा की शिकार होती आ रही है। झील तक पहुंचने वाले 15 नालों के साथ-साथ डूब क्षेत्र और बहाव एरिया में लोगों और सरकारी एजेंसियों तक ने निर्माण कर डाले। आज झील के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। अब्दुल रहमान बनाम सरकार केस में झील को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए चली मुहिम भी खानापूर्ति बन कर रह गई।

12 मील के फैलाव वाली झील का मात्र 2-3 किमी तक ही बचा दायरा

शहर के बीच यह झील रक्त-रंजित भूमि पर बनी है। कभी चैहान राजा अर्णोराज ने यमनी के सुल्तान के आक्रमण को विफल किया था। अर्णोराज ने बाद में इस स्थान को खुदवा कर 1135 ई में झील का निर्माण करवाया। तब झील 12 मील तक फैली थी। आज ये सिमटकर 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में रह गयी है। झील के बहाव क्षेत्र में रातीडांग, नौसर, चैरसिया वास, कोटड़ा, हाथी खेड़ा बोराज, काजीपुरा, अजयसर, खरेकड़ी गांव के साथ नागफनी, राम नगर, प्रेम नगर आते हैं. इन क्षेत्रों से बरसाती पानी नालों के माध्यम से झील तक पहुंचता रहा है। प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही के चलते झील तक आने वाले नाले अतिक्रमण का शिकार होते गए। वर्तमान में शहर की बस्तियों का गंदा और प्रदूषित पानी झील में आ रहा है। इसके लिए किए गए सर्वे में 130 आवास ऐसे पाए गए, जो डूब क्षेत्र में बने हुए हैं। इनमें सर्कुलर रोड स्थित सभी वाणिज्य मॉल, आवासन मंडल के वैशाली नगर सेक्टर 3 तथा इसके नीचे बने आवास, गैस एजेंसी का गोदाम, महेश्वरी पब्लिक स्कूल के सामने स्थित मंदिर और आवास, आदर्श विद्या मंदिर, ट्रीटमेंट प्लांट, पुरानी विश्राम स्थली, चामुंडा कॉलोनी, अरिहंत कॉलोनी, महावीर कॉलोनी का अधिकांश हिस्सा झील के डूब क्षेत्र में आता है।

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Author: kalamkala

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