आचार्य तुलसी की समूची मानवता को देन और उनके समाज परिवर्तन के काम अद्वितीय रहे हैं- कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, आचार्य तुलसी जन्मोत्सव पर कार्यक्रम आयोजित एवं उनकी जन्मस्थली के दर्शन किए

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आचार्य तुलसी की समूची मानवता को देन और उनके समाज परिवर्तन के काम अद्वितीय रहे हैं- कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़,

आचार्य तुलसी जन्मोत्सव पर कार्यक्रम आयोजित एवं उनकी जन्मस्थली के दर्शन किए

लाडनूं (kalamkala.in)। अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक आचार्य तुलसी के जन्मोत्सव पर यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित किया गया। आचार्य तुलसी इस विश्वविद्यालय के प्रथम अनुशास्ता थे और यह विश्वविद्यालय उनकी ही दुूरदर्शिता के कारण स्थापित हुआ था। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. दूगड़ ने आचार्य तुलसी की समूची मानवता को देन और उनके द्वारा किए गए समाज परिवर्तन के कामों को अद्वितीय बताया और आचार्य तुलसी के अणुव्रत आंदोलन, समाज के सरलीकरण, घूंघट प्रथा के उन्मूलन, महिला शिक्षा को बढावा देने, दलितों के साथ समानता को महत्व देना आदि प्रमुख कामों का उल्लेख भी किया। उन्होंने आचार्य तुलसी की विभिन्न महत्वपूर्ण व्यक्तियों से भेंट, वार्ताओं एवं उनके प्रभाव का उल्लेख करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी, डा. राधाकृष्ण, जयप्रकाश नारायण, डा. जैनेन्द्र कुमार आदि के संस्मरणों आदि का उल्लेख किया। अमेरिका की प्रसिद्ध टाईम्स मैगजीन में आचार्य तुलसी के उल्लेख के बारे में भी जानकारी दी। प्रो. दूगड़ ने जैन विश्वभारती संस्थान के रूप में विश्वविद्यालय की शुरूआत के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर उन्होंने विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में ‘अनुशास्ता और उनका अनुशासन’ विषयक एक पेपर शामिल करने के लिए सभी प्रोफेसर्स को निर्देशित भी किया।

आचार्य तुलसी के कामों को सतत आगे बढाने की आवश्यकता

आचार्य तुलसी जन्मोत्सव कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन, आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डा. रविन्द्र सिंह राठौड़, अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा तिवाड़ी, जैनविद्या एवं तुलनात्मक धर्म व दर्शन विभाग के डा. रामदेव साहू, अहिंसा एवं शांति विभाग के डा. बलवीर सिंह, डा. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, वित्ताधिकारी आरके जैन, प्रो. दामोदर शास्त्री, राजस्थानी भाषा एवं साहित्य केन्द्र के प्रो. एलके व्यास, प्राकृत एवं संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जिनेन्द्र कुमार जैन आदि ने भी आचार्य तुलसी के संस्मरणों, कार्यों, उपदेशों, साहित्य आदि का विवरण देते हुए उनका स्मरण किया और उनके कार्यों के विस्तार की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम का संचालन डा. युवराज सिंह खंगारोत ने किया। कार्यक्रम में उप रजिस्ट्रार अभिनव सक्सेना, सहायक रजिस्ट्रार दीपाराम खोजा, पंकज भटनागर, डा. लिपि जैन, डा. आभासिंह, डा. अमिता जैन, डा. सुनीता इंदौरिया, डा. गिरीराज भटनागर, डा. जगदीश यायावर, डा. वीरेन्द्र भाटी मंगल, ईर्या जैन, स्नेहा शर्मा, डा. प्रगति भटनागर, डा. मनीष भटनागर, डा. विष्णु कुमार, डा. गिरधारीलाल, खुशाल जांगिड़, दशरथ सिंह, रोहित सिंह, अजय पारीक, डा. जेपी सिंह, राजेन्द्र बागड़ी, डा. सत्यनारायण भारद्वाज, डा. आयुषी जैन, प्रगति चौरडिया, अभिषेक चारण, मनीष सोनी, पवन सैन, शरद जैन निरंजन सिंह सांखला आदि उपस्थित रहे।

तुलसी जन्मस्थान के किए दर्शन-अवलोकन

कार्यक्रम के पश्चात विश्वविद्यालय के समस्त शैक्षणिक, शैक्षेत्तर स्टाफ एवं विद्यार्थीगण यहां दूसरी पट्टी स्थित आचार्य तुलसी जन्म स्थान को देखने के लिए गए। वहां उन्होंने आचार्य तुलसी का जन्म जिस कक्ष में हुआ था, उसके देखा ओर उनका बचपन जिन कक्षों, बरामदों, चौक में बीताए उनके दर्शन किए। उनके जन्म और बालपन की पूरी जानकारी प्राप्त की। सभी विद्यार्थियों एवं स्टाफ ने इस प्राचीन मकान की ऐतिहासिकता और विशेषताओं को जानकर हर्ष व्यक्त किया और कहा कि आचार्य तुलसी के जन्म और बाललीलाओं का प्रत्यक्षदर्शी रहा यह भवन आज भी दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूमियों से भर देता है।

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Author: kalamkala

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