जीवन में सफल बनने के साथ ‘अच्छा इंसान’ बनना भी निर्धारित करें- आचार्यश्री महाश्रमण,
लाडनूं में अणुव्रत डिजीटल डिटॉक्स कार्यशाला आयोजित कर दिया मोबाइल की लत से दूर रहने का प्रशिक्षण





लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्व भारती लाडनूं में आयोजित ‘अणुव्रत डिजिटल डिटॉक्स’ कार्यशाला के तृतीय चरण में 108 बालिकाओं एवं 10 शिक्षकों ने संयमपूर्ण जीवन का संकल्प लिया।कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने एक स्वर में राय रही कि, ‘मोबाइल जीवन जीने का माध्यम होना चाहिए, पूरा जीवन नहीं।’ कार्यशाला में लाडनूं के आदर्श विद्या मंदिर, महाप्रज्ञ प्रोग्रेसिव स्कूल, गुरुकुल शिक्षण संस्थान एवं राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, मंगलपुरा की 108 बालिकाओं एवं 10 शिक्षकों ने सहभागिता की। कार्यशाला के अंतिम सत्र में मुख्य अतिथि अणुविभा के संयुक्त न्यासी रतनलाल दूगड़ की गरिमामय उपस्थिति रही।
मोबाइल व डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाए रखें
बुधवार को इस कार्यशाला के तृतीय चरण में सहभागी विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए आचार्यश्री महाश्रमण ने विद्यार्थियों को सद्भावना, ईमानदारी, व्यसन-मुक्ति एवं आत्म-संयम का संदेश देते हुए प्रेरित किया कि भोजन, अध्ययन एवं वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग नहीं करना चाहिए तथा रात्रि में डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। गुरुदेव ने कहा कि जीवन में सफल बनने के साथ ‘अच्छा इंसान’ बनना भी आवश्यक है। इस अवसर पर साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभा ने बालिकाओं एवं उपस्थित जनसमूह को प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा कि शांति, स्वास्थ्य एवंं तनावमुक्त जीवन के लिए संयमित एवं व्यवस्थित जीवन-शैली आवश्यक है। उन्होंने मोबाइल के ओवरयूज़ से बचने, समय पर सोने, सुबह जल्दी उठने, योग, ध्यान एवं मेडिटेशन को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल डिटॉक्स केवल मोबाइल से दूरी नहीं, बल्कि मानसिक, बौद्धिक एवं भावनात्मक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल संसाधनों पर अत्यधिक निर्भरता से बचते हुए अपने मस्तिष्क, चिंतन एवं अध्ययन क्षमता को विकसित करने का संदेश प्रदान किया।
डिजिटल अनुशासन, समय प्रबंधन एवं सकारात्मक जीवनशैली के लिए व्यावहारिक सुझाव
बालिकाओं को प्रशिक्षिका श्रीमती गरिमा ऋषभ डाकलिया ने प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने डिजिटल अनुशासन, समय प्रबंधन एवं सकारात्मक जीवनशैली को अपनाने हेतु व्यवहारिक सुझाव दिए। कार्यशाला में प्रशिक्षक चिराग पामेचा द्वारा 12 नियमों के माध्यम से स्क्रीन से दूरी बनाने की प्रेरणा दी गई, महावीर भटेवरा ने मोबाइल के मानसिक प्रभावों को समझाया तथा अंबिका डागा ने 45 दिनों के चैलेंज के माध्यम से आदत सुधारने की प्रेरणा दी। अणुव्रत के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनिश्री मनन कुमार एवं मुनिश्री धर्मेश कुमार ने द्वितीय चरण के सत्र में बच्चों द्वारा प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए श्वास, योग एवं मानसिक संतुलन से जुड़े प्रयोगात्मक उपायों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि संयमित दिनचर्या एवं सही जीवनशैली से मानसिक तनाव, डिप्रेशन एवं डिजिटल आसक्ति से बचा जा सकता है। साध्वीश्री दीप्ती यशा, साध्वीश्री परमार्थ प्रभा एवं साध्वीश्री चरितार्थ प्रभा ने भी बालिकाओं को आत्मसंयम, संस्कार एवं डिजिटल अनुशासन अपनाने की प्रेरणा प्रदान की।
मोबाइल एवं स्क्रीन की लत से मुक्त होकर सकारात्मक एवं संयमपूर्ण जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा मिली
सभी सहभागी बालिकाओं ने आचार्यश्री महाश्रमण के दर्शन करने के साथ ही उनके समक्ष अपने अनुभव प्रस्तुत किए। इस दौरान विद्यार्थियों एवं गुरुदेव के बीच प्रेरणादायी एवं आत्मीय संवाद भी हुआ। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। छात्र प्रतीक ओसवाल ने एआई एवं मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से सोचने की क्षमता एवं मानसिक एकाग्रता पर पड़ रहे प्रभावों को साझा करते हुए कहा कि आज लोग स्वयं विचार करने के बजाय सीधे गूगल एवं एआई पर निर्भर होते जा रहे हैं। विद्यार्थियों ने कार्यशाला में प्राप्त शिक्षाओं को साझा करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएं निरंतर आयोजित होनी चाहिएं, ताकि अधिकाधिक विद्यार्थी मोबाइल एवं स्क्रीन की लत से मुक्त होकर सकारात्मक एवं संयमपूर्ण जीवनशैली अपना सकें। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संयोजिका डॉ. नीलम जैन, अणुव्रत समिति लाडनूं के अध्यक्ष शांतिलाल बैद, मंत्री राज कोचर, संगठन मंत्री नवीन नाहटा, वीरेंद्र भाटी, योगक्षेम वर्ष के चिकित्सा प्रभारी श्रीमती सरला पन्नालाल बैद एवं अणुव्रत समिति लाडनूं के कार्यकर्ताओं ने अपना अप्रतिम सहयोग प्रदान किया।






