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सोशल मीडिया के दौर में भी पुस्तक-लेखन प्रांसगिकता है- राज्यपाल मिश्र, साहित्यकार डॉ. भाटी की नई पुस्तक ‘अंतर्मन के दीप’ का राज्यपाल द्वारा विमोचन

सोशल मीडिया के दौर में भी पुस्तक-लेखन प्रांसगिकता है- राज्यपाल मिश्र,

साहित्यकार डॉ. भाटी की नई पुस्तक ‘अंतर्मन के दीप’ का राज्यपाल द्वारा विमोचन

लाडनूं (kalamkala.in)। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने शनिवार को राज भवन जयपुर में स्थानीय वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. वीरेंद्र भाटी मंगल की नव-प्रकाशित पुस्तक ‘अंतर्मन के दीप’ का विमोचन किया। इस अवसर राज्यपाल मिश्र ने कहा कि पुस्तक में समाहित आलेख पाठकों के लिए उपयोगी साबित होंगे। राज्यपाल ने सोशल मीडिया के दौर में भी पुस्तक लेखन को प्रासंगिक बताया। उन्होंने पुस्तक में समाहित अध्यायों में स्वस्थ रहना है तो प्रकृति के साथ मिलकर जीना होगा, नैतिकता पर छा रही है अनैतिकता की धुंध, सोशल मीडिया की बढ़ती लत, संयम है समाधान, राजनेताओं में बढ़ती अनैतिकता लोकतंत्र के लिए खतरनाक आदि के बारे में चर्चा भी की।धर्म-संस्कृति, अध्यात्म व सम-सामयिक विषयों पर लिखी गई इस पुस्तक में विभिन्न विषयों के 47 अध्याय शामिल किये गये है। पुस्तक-लेखक डॉ. भाटी ने राज्यपाल से भेंट के दौरान अपनी पुस्तक ‘अंतर्मन के दीप’ की प्रथम प्रति विमोचन के लिए राज्यपाल को भेंट की। उल्लेखनीय है कि डॉ. भाटी विगत 30 वर्षों से साहित्य-लेखन कार्य में संलग्न हैं। उनकी विविध विषयों की 12 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी। साथ ही उन्हें 50 से अधिक राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय सम्मान, पुरस्कार मिल चुके है। इस अवसर पर सुजानगढ के राजस्थानी साहित्यकार डॉ. घनश्याम नाथ कच्छावा ने राज्यपाल को पुस्तक-लेखक डा. वीरेन्द्र भाटी मंगल का परिचय एवं उनकी पुस्तक ‘अन्तर्मन के दीप’ की विषयवस्तु की जानकारी दी। इस मौके पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव सुबीर कुमार भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में राज भवन के संयुक्त निदेशक जनसंपर्क डॉ. राजेश कुमार व्यास का योगदान सराहनीय रहा।

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Author: kalamkala

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