लाडनूं के डम्पिंग यार्ड में जला प्लास्टिक का कचरा और अन्य गंदगी से हुई लोगों को सांस की दिक्कतें,
आएदिन लगती है यहां कचरे में आग और फायर ब्रिगेड के दौड़ने व मशक्कत करने का काम, हो गया है आम

लाडनूं (kalamkala.in)। फसलों की पराली जलाने से दिल्ली महानगर का दम घुट सकता है। लेकिन लाडनूं में तो प्लास्टिक कचरा, मृत पशु-पक्षियों के अवशेष, पंख आदि और अन्य गंदगी के जलने से धुआं फैल कर कितना प्रदूषण फैला रहे हैं, इनका किसी ने कोई माप तक नहीं किया। यहां आबादी के बीच स्थित राती खान डम्पिंग यार्ड में लगे कचरे के पहाड़ों में चिंगारी से लगी आग के कारण उठा प्रदूषित धुआं आसपास के समस्त आबादी क्षेत्र में फैल गया और लोगों को श्वास की समस्याएं खड़ी कर दी। यह आग शनिवार को लगी, जिससे धुआं आकाश में चढ़ा और शाम को ठंड होते ही धुआं जमीन पर उतर आया और घने कोहरे की तरह समूचे वातावरण को धुंधला कर दिया। करंट बालाजी मंदिर के पीछे स्थित इस डंपिंग यार्ड में लगी हुई इस आग से घंटों तक विषैला काला धुआं आसमान में छाया रहने के बाद जमीन के निकट उतर कर पूरे वातावरण को प्रदूषित बना दिया।विशाल जांगिड़ ने बताया कि इस धुएं के कारण बस स्टेण्ड, दयानन्द कॉलोनी, मालियों का बास आदि पूरे क्षेत्र में धुआं ही धुआं फैल गया। डम्पिंग यार्ड में डाले गए प्लास्टिक कचरे के जलने से पूरा धुआं जहरीला हो गया था और लोगों को खांसी, सांस आदि की तकलीफ़ें पैदा हो गई। सारे इलाके में पॉल्यूशन बिगड़ने के हालात बन गए। लोगों में इस स्थिति को लेकर काफी रोष देखा गया। लोगों का कहना है कि वे लम्बे समय से डम्पिंग यार्ड के बाहर फेंके जा रहे कचरे की समस्या से पीड़ित थे। गंदगी, मृत पशु और सड़ांध से सारे रहवासी दु:खी हो चुके थे और उस पर प्रायः आग लग कर हवा में प्रदूषण फैलाया जा रहा है। इस डम्पिंग यार्ड में आग लगने की घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। बहुत बार यहां आग लग चुकी और फायर ब्रिगेड उसे बुझाने भी पहुंची थी। शनिवार को लगी आग को भी नगर पालिका के अग्निशमन कार्मिकों द्वारा बुझा दिया गया है, लेकिन हवा में फैल चुके विषैले प्रदूषण को हटाने के कोई साधन उपलब्ध नहीं है।







