अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखें- यूथ आइकॉन राजवीर सिंह चलकोई,
‘परंपरा री छाँव में भविष्य रो निर्माण’ विषयक एक दिवसीय राजस्थानी भाषा कार्यशाला आयोजित




लाडनूं (kalamkala.in)। राजस्थानी भाषा के जाने-माने चिंतक व मोटीवेशनल स्पीकर राजवीर सिंह चलकोई ने कहा है कि वर्तमान में आधुनिक शिक्षा के साथ ही अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखना अत्यंत आवश्यक है। वे यहां जैन विश्वभारती की सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में आचार्य महाश्रमण आॅडिटोरियम में आयोजित ‘परंपरा री छाँव में भविष्य रो निर्माण’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला को मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया और विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और निरंतर आत्मविकास की दिशा में अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय के सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण, उच्च संस्कारों एवं सांस्कृतिक समृद्धि की सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आदर्श मंच बताया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के साथ आयोजित एक संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने अपने विचार, जिज्ञासाएं एवं अनुभव साझा किए, जिनका अतिथियों द्वारा संतोषजनक समाधान किया गया। कार्यक्रम के पश्चात् राजवीर सिंह ने कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के साथ आचार्य श्री महाश्रमण के दर्शन तथा सेवा लाभ लिया।
अपनी जड़ों से जुड़े रहने से होता सशक्तिकरण
विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग के प्रो. लक्ष्मीकांत व्यास ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर ही हम सशक्त पहचान बना सकते हैं और समाज में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रथम अनुशास्ता आचार्य श्री तुलसी को याद किया तथा उनके आदर्शों पर चलने के लिए सभी को प्रेरित किया।
राजस्थानी भाषा के सभी विद्यार्थियों की फीस भरी चलकोई ने
कार्यक्रम के अंत में राजस्थानी भाषा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई, ताकि उनका मनोबल बढे और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले। राजवीरसिंह चलकोई ने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा में अध्ययनरत 7 छात्रों को उनकी पूरी फीस अपनी तरफ से दी और उन्होंने भविष्य में भी राजस्थानी में यहां पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों की सारी फीस देते रहने का विश्वास दिलाया। उन्होंने कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ से भेंट करके उनको भी सभी राजस्थानी भाषा का अध्ययन करने वालों की फीस देने का विश्वास दिलाया। कुलपति ने उनके प्रति आभार ज्ञापित किया।
संस्कारित भविष्य का निर्माण परम्परा और आधुनिकता के समन्वय से संभव
सांस्कृतिक समिति की अध्यक्ष डॉ. लिपि जैन ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अतिथियों का परिचय कराया और कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि परंपरा और आधुनिकता के समन्वय से ही एक सशक्त एवं संस्कारित भविष्य का निर्माण संभव है। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के पारंपरिक स्वागत के साथ हुआ। कार्यक्रम में सांस्कृतिक सचिव स्नेहा शर्मा द्वारा आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में 350 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संयोजन जीनत एवं सिद्धि ने किया।






