गाय को राष्ट्र माता का दर्जा मिले और गौरक्षा सुनिश्चित हो- संत दयालपुरी महाराज, बादेड़ के भैरव धाम में गौ रक्षा अलख जगाई और दिलाई सबको शपथ

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गाय को राष्ट्र माता का दर्जा मिले और गौरक्षा सुनिश्चित हो- संत दयालपुरी महाराज,

बादेड़ के भैरव धाम में गौ रक्षा अलख जगाई और दिलाई सबको शपथ

लाडनूं (kalamkala.in)। पूरे राजस्थान में गांव-गांव, ढाणी-ढाणी में गौरक्षा और वृद्ध माता-पिता की सेवा का आह्वान लेकर अलग जगाने वाले संत दयालपुरी महाराज ने कहा है कि जब तक इस देश में गाय की रक्षा नहीं होगी व गाय को राष्ट्र माता का दर्जा नहीं दिया जाएगा, तब तक राष्ट्र का कल्याण नहीं होने वाला है। वे यहां लाडनूं दौरे के दौरान ग्राम बादेड़ स्थित सिद्धपीठ बादेड भैरव धाम में लोगों को सम्बोधित कर रहे थे।बाड़मेर के राष्ट्रीय गौ-रक्षक संत दयालपुरी महाराज ने आगे कहा कि गौ रक्षा मानव का महत्वपूर्ण कर्तव्य है। क्योंकि, गाय कोई पशु नहीं बल्कि गाय माता है, जिसका दूध अमृत से कम नहीं है। गाय का महत्व केवल पौराणिक ही नहीं, बल्कि सनातन और वैज्ञानिक महत्व भी है। कार्यक्रम में संत दयालपुरी ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को गौ रक्षा की शपथ भी दिलवाई। कार्यक्रम में संत दयालपुरी महाराज का अभिनंदन भी किया गया। संत दयालपुरी महाराज बाड़मेर के हैं और वहां की राजनीति के चलते दयालपुरी के वृद्ध आश्रम एवं गौ चिकित्सालय को वक्फ बोर्ड की राजनीति ने हटा दिया। तब से संत दयालपुरी पूरे राजस्थान का भ्रमण कर गांव-गांव, ढाणी-ढाणी, गौ-रक्षा और बूढ़े माता-पिता की सेवा का अभियान चला रहे हैं।

हर धर्म करता है गौरक्षा की बात

यहां बादेड़ भैरव धाम मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भैरव उपासक जेठाराम महाराज ने भी गाय की रक्षा के लिए आगे आने के लिए सभी से आह्वान किया और उन्होंने बाबा भैरवनाथ एवं गुरु गोरखनाथ को भी गायों का रक्षक बताया। कार्यक्रम में प्रख्यात मोटीवेशनल गुरु शंकर आकाश ने भारतीय संस्कृति की सुरक्षा एवं संवर्धन हेतु गोवंश की रक्षा को आवश्यक बताते हुए कृषि एवं मानव जीवन के विकास में गोवंश के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी धर्म नहीं है जो गौ रक्षा की बात न करता हो। कार्यक्रम में गोगाजी उपासक पप्पू राम महाराज, हरिप्रसाद स्वामी कुचामन, हरजीराम चौधरी, जितेंद्र स्वामी सीकर, कपिल सुजानगढ़, बजरंग ठोलिया सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। साथ ही विभिन्न संस्थाओं के गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के बाद संत दयालपुरी महाराज यहां से डीडवाना के लिए रवाना हो गए।

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Author: kalamkala

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