प्रख्यात विद्वान प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी को आईसीपीआर नयी दिल्ली की सीनियर फैलोशिप मिली, ‘जैन एवं वैदिक दर्शन में सामाजिक नैतिक सिद्धांत: एक तुलनात्मक अध्ययन’ विषय पर शोध प्रस्ताव के लिए दी गई यह प्रतिष्ठित फैलोशिप

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प्रख्यात विद्वान प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी को आईसीपीआर नयी दिल्ली की सीनियर फैलोशिप मिली,

‘जैन एवं वैदिक दर्शन में सामाजिक नैतिक सिद्धांत: एक तुलनात्मक अध्ययन’ विषय पर शोध प्रस्ताव के लिए दी गई यह प्रतिष्ठित फैलोशिप

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन दर्शन सहित सम्पूर्ण भारतीय दर्शन एवं पाश्चात्य दर्शन के तुलनात्मक अध्ययन के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले प्रकांड विद्वान प्रोफेसर आनंद प्रकाश त्रिपाठी को भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (इईसीपीआर) नई दिल्ली द्वारा दो वर्षों के लिए प्रतिष्ठित सीनियर फैलोशिप अवार्ड प्रदान किया गया है। आईसीपीआर के निदेशक डॉ. अमित यादव ने इस बारे में आधिकारिक पत्र से सूचना भेजी है। इस प्रतिष्ठित फैलोशिप के अंतर्गत प्रो. त्रिपाठी को दो वर्षों की अवधि तक प्रति माह 44 हजार रुपयों की फैलोशिप राशि प्रदान की जाएगी, साथ ही 44 हजार रुपयों का वार्षिक कंटिन्जेंसी अनुदान भी दिया जाएगा। यह फैलोशिप उनके शोध प्रस्ताव ‘जैन एवं वैदिक दर्शन में सामाजिक नैतिक सिद्धांत: एक तुलनात्मक अध्ययन’ विषय पर प्रदान की गई है। प्रो. त्रिपाठी भारतीय दर्शन जगत में एक सशक्त और सम्मानित नाम हैं। वे अब तक 70 से अधिक महत्वपूर्ण पुस्तकों के रचनाकार हैं, जिनमें जैन दर्शन, भारतीय सांस्कृतिक चिंतन, नैतिकता, आध्यात्मिकता एवं तुलनात्मक दर्शन जैसे विषयों पर उनका गहन और मौलिक अध्ययन परिलक्षित होता है। उनके लेखन में न केवल शास्त्रीय गहराई है, बल्कि समकालीन संदर्भों में भी उसकी प्रासंगिकता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। साहित्यिक अभिरुचि के कारण उनके कई कहानी संग्रह, बाल कहानी संग्रह, लघु कथा, नाटक, जीवनी साहित्य आदि भी प्रकाशित हुए हैं। शैक्षणिक एवं संस्थागत स्तर पर भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वे 10 वर्ष ब्राह्मी विद्यापीठ में एवं 31 वर्ष जैन विश्व भारती संस्थान लाडनूं में अपनी सेवाओं के दौरान विभिन्न पदों को सुशोभित करते हुए जैन विद्या एवं तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष पद को सुशोभित कर चुके। उनके नेतृत्व में विभाग ने शोध एवं अध्ययन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां प्राप्त कीं।
इसके अतिरिक्त, प्रो. त्रिपाठी विगत चार दशकों से अणुव्रत आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। उन्होंने अणुव्रत को केवल सिद्धांत तक सीमित न रखकर जीवन में उतारने का निरंतर प्रयास किया है।
आईसीपीआर की यह सीनियर फैलोशिप न केवल प्रो. त्रिपाठी की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय दर्शन जगत, विशेषकर जैन दर्शन एवं तुलनात्मक धर्म-दर्शन अध्ययन के क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय है। उनके इस सम्मान से युवा शोधार्थियों को प्रेरणा मिलेगी तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार को नई दिशा प्राप्त होगी।

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Author: kalamkala

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